10436
ज़नाबक़े रुख़-ए-रौशनक़ी,
दीद हो ज़ाती...
तो हम सियाह-नसीबोंक़ी,
ईद हो ज़ाती ll
अनवर शऊर
10437
हासिल उस मह-लक़ाक़ी दीद नहीं...
ईद हैं और हमक़ो ईद नहीं...
बेख़ुद बदायुनी
10438
क़हते हैं, ईद हैं,
आज़ अपनी भी ईद होती l
हमक़ो अग़र मयस्सर,
ज़ानाँक़ी दीद होती ll
ग़ुलाम भीक़ नैरंग़
क़हते हैं, ईद हैं,
आज़ अपनी भी ईद होती l
हमक़ो अग़र मयस्सर,
ज़ानाँक़ी दीद होती ll
ग़ुलाम भीक़ नैरंग़
10439
जहाँ न अपने अज़ीज़ोंक़ी दीद होती हैं,
ज़मीन-ए-हिज़्रपें भी क़ोई ईद होती हैं !
ऐन ताबिश
10440
आज यारोंक़ो मुबारक हो,
क़ि सुब्ह-ए-ईद हैं...!
राग हैं, मय हैं, चमन हैं...
दिलरुबा हैं !! दीद हैं !!!
आबरू शाह मुबारक़
आज यारोंक़ो मुबारक हो,
क़ि सुब्ह-ए-ईद हैं...!
राग हैं, मय हैं, चमन हैं...
दिलरुबा हैं !! दीद हैं !!!
आबरू शाह मुबारक़