Showing posts with label दुनियाँ आँख़ दीदार आसमाक़े चाँद आफ़रीं हसरत तरस हुस्न रूह ज़ानिब मुर्दन शायरी. Show all posts
Showing posts with label दुनियाँ आँख़ दीदार आसमाक़े चाँद आफ़रीं हसरत तरस हुस्न रूह ज़ानिब मुर्दन शायरी. Show all posts

6 February 2026

10391 - 10395 दुनियाँ आँख़ दीदार आसमाक़े चाँद बदली आफ़रीं हसरत चश्म तरस हुस्न रूह ज़ानिब मुर्दन शायरी

 
10391
मिरा ज़ी तो आँख़ोंमें आया,
ये सुनते ;
कि दीदार भी एक़ दिन,
आम होग़ा......

                                            मीर तक़ी मीर

10392
ऐ आसमाक़े चाँद,
तू बदलीमें छुप ज़ा l
क़रना हैं दीदार मुझे,
मेरे चाँदक़ा ll

10393
आफ़रीं तुझक़ो,
हसरत-ए-दीदार...
चश्म-ए-तरसे,
ज़बाँक़ा क़ाम लिया......

                              ज़लील मानिक़पूरी

10394
तेरे हुस्नक़ा दीदार,
दुनियाँ चाहती हैं l
तेरे रूहसे राब्ता तो,
महज़ मुझक़ो हैं ll

10395
देख़ना हसरत-ए-दीदार,
इसे क़हते हैं...
फ़िर ग़या मुँह,
तिरी ज़ानिब दम-ए-मुर्दन अपना ll

                                                ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर