Showing posts with label दिल ज़र्रे तवज्जो शम्स क़मर रात दुख़ आँख़ अर्सा निशान शरीक़ दर्द ज़ख़्म शायरी. Show all posts
Showing posts with label दिल ज़र्रे तवज्जो शम्स क़मर रात दुख़ आँख़ अर्सा निशान शरीक़ दर्द ज़ख़्म शायरी. Show all posts

29 March 2026

10616 - 10620 दिल ज़र्रे तवज्जो शम्स क़मर रात आँख़ अर्सा निशान शरीक़ दर्द ज़ख़्म शायरी

 
10616
ज़र्रेक़े ज़ख़्म दिलपें,
तवज्जोह क़िए बग़ैर...
दरमान-ए-दर्द-ए-शम्स-ओ-क़मर,
क़र रहें हैं हम...

                                                     रईस अमरोहवी


10617
रात छाई तो हर इक़,
दर्दक़े धारे छूटे…
सुब्ह फ़ूटी तो हर इक़,
ज़ख़्मक़े टाँक़े टूटे……
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

10618
क़्यूँ क़िसी औरक़ो,
दुख़ दर्द सुनाऊँ अपने…
अपनी आँख़ोंसे भी,
मैं ज़ख़्म छुपाऊँ अपने……
                                          अनवर मसूद

10619
वो ज़ख़्मभर ग़या, अर्सा हुआ,
मग़र अब तक़…
ज़रासा दर्द, ज़रासा निशान,
बाक़ी हैं……
ज़ावेद अख़्तर

10620
दिलपर ज़ो ज़ख़्म हैं,
वो दिख़ाएँ क़िसीक़ो क़्या…?
अपना शरीक़-ए-दर्द बनाएँ,
क़िसीक़ो क़्या……?
                                          हबीब ज़ालिब