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7 July 2026

10876 - 10880 ज़िंदग़ी अंदाज़ वक़्त ख़ुशबू बिख़र ख़्वाहिश हासिल लहज़ा सँवर तक़ल्लुफ़ रिश्ते लम्हा शायरी

 
10876
लम्हा-दर-लम्हा,
ग़ुज़रता ही चला ज़ाता हैं…l
वक़्त ख़ुशबू हैं,
बिख़रता ही चला ज़ाता हैं…ll
                                   तनवीर अहमद अल्वी

10877
ये लम्हा लम्हा ज़िंदा रहनेक़ी,
ख़्वाहिशक़ा हासिल हैं l
क़ि लहज़ा लहज़ा अपनेआपहीमें,
मर रहा हूँ मैं……
मुशफ़िक़ ख़्वाज़ा

10878
लम्हा लम्हा रोज़,
सँवरनेवाली तू…
लम्हा लम्हा रोज़,
बिख़रनेवाला मैं……!
                     ज़ावेद अक़रम फ़ारूक़ी

10879
ये लम्हा लम्हा,
तक़ल्लुफ़क़े टूटते रिश्ते…
न इतने पास मिरे आ,
क़ि तू पुराना लग़े……
ज़ुबैर रिज़वी

10880
ज़िंदग़ी एक़ फ़न हैं,
लम्होंक़ो अपने अंदाज़से,
ग़ँवानेक़ा……
                                      ज़ौन एलिया