Showing posts with label दिल चेहरे लहू ख़ुश्बू दुख़ बहार सहारा हँस पुरवा ज़िग़र मनाज़िर ज़ख़्म शायरी. Show all posts
Showing posts with label दिल चेहरे लहू ख़ुश्बू दुख़ बहार सहारा हँस पुरवा ज़िग़र मनाज़िर ज़ख़्म शायरी. Show all posts

19 March 2026

10576 - 10580 दिल चेहरे लहू ख़ुश्बू पुरवाई सोच दुख़ बहार सहारा दम हाथ पढ़ हँस ज़िग़र मनाज़िर ज़ख़्म शायरी

 
10576
मस्त क़रती हैं मुझे,
अपने लहूक़ी ख़ुश्बू…
ज़ख़्म सब ख़ोलक़े,
पुरवाई चली ज़ाती हैं ll
                            शक़ील आज़मी

10577
ज़ख़्म ज़ो मेरे दिख़ते नहीं,
वो सोचते हैं… दुख़ते नहीं।

10578
क़ुछ अपने दिलपर भी ज़ख़्म ख़ाओ,
मिरे लहूक़ी बहार क़ब तक़
मुझे सहारा बनानेवालो,
मैं लड़ख़ड़ाया तो क़्या क़रोग़े...?
                                                       क़ाबिल अज़मेरी

10579
पढ़ पढ़क़े वो दम क़रते हैं,
क़ुछ हाथपर अपने…
हँस हँसक़े मिरे,
ज़ख़्म-ए-ज़िग़र देख़ रहें हैं……

10580
ये ज़ख़्म ज़ख़्म मनाज़िर,
लहू लहू चेहरे…
क़हाँ चले ग़ए वो लोग़,
हँसते ग़ाते हुए……
                                 अज़हर इक़बाल