11066
ज़िसने क़िसीक़ी,
दिल-दोज़ दास्ताँ ज़ो सुनी…
तो सुनक़े तड़प उठा हैं…ll
ज़ावेद अख़्तर
11067
ख़तोंक़ो ख़ोलती,
दीमक़क़ा शुक़्रियाँ,
वर्ना, तड़प रहीं थी,
लिफ़ाफ़ोंमें बे-ज़बानी पड़ी…
अज़हर फ़राग़
11068
इक़ तड़प मौज़-ए-तह-नशीं क़ी तरह…
ज़िंदग़ीक़ी बिना-ए-मोहक़म हैं…ll
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी
इक़ तड़प मौज़-ए-तह-नशीं क़ी तरह…
ज़िंदग़ीक़ी बिना-ए-मोहक़म हैं…ll
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी
11069
तिरी तड़पसे न तड़पा था,
मेरा दिल लेक़िन…
तिरे सुक़ूनसे,
बेचैन हो ग़या हूँ मैं…!
साहिर लुधियानवी
11070
ज़ो दिलक़ो दे ग़ई,
इक़ दर्द उम्र-भरक़े लिए…
तड़प रहा हूँ अभी तक़ मैं,
उस नज़रक़े लिए……
मुनव्वर बदायुनी
ज़ो दिलक़ो दे ग़ई,
इक़ दर्द उम्र-भरक़े लिए…
तड़प रहा हूँ अभी तक़ मैं,
उस नज़रक़े लिए……
मुनव्वर बदायुनी