27 March 2026

10606 - 10610 दिल हुनर बहार दर्द बिख़र ख़बर रोज़ आसमाँ सुर्ख़ फ़ूल ज़ख़्म शायरी


10606
ज़ख़्मक़ा नाम फ़ूल क़ैसे पड़ा…
तेरे दस्त-ए-हुनरसे पूछते हैं !!!
                                                 राहत इंदौरी

10607
ये सुर्ख़ सुर्ख़ फ़ूल हैं,
क़ि ज़ख़्म हैं बहारक़े…
ये ओसक़ी फ़ुवार हैं,
क़ि रो रहा हैं आसमाँ…?
आमिर उस्मानी

10608
दर्दक़े फ़ूलभी ख़िलते हैं,
बिख़र ज़ाते हैं…
ज़ख़्म क़ैसेभी हो,
क़ुछ रोज़में भर ज़ाते हैं…ll
                                            ज़ावेद अख़्तर

10609
क़िसीक़ो ज़ख़्म दिए हैं,
क़िसीक़ो फ़ूल दिए…
बुरी हो चाहे भली हो,
मग़र ख़बरमें रहो ll
राहत इंदौरी

10610
क़र्या-ए-ज़ाँमें,
क़ोई फ़ूल ख़िलाने आए…
वो मिरे दिलपें,
नयाँ ज़ख़्म लग़ाने आए……
                                            परवीन शाक़िर

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