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16 September 2026

11361 - 11365 दिल मोहब्बत सनम दुनियाँ ज़रुरत ज़ज़्बात क़दर नींद आदत ख़्याल नफ़रत शायरी

 
11361
ज़रुरत हैं मुझे क़ुछ नए,
नफ़रत क़रनेवालोंक़ी…
पुरानेवाले तो अब,
चाहने लग़े हैं मुझे…

11362
ये मोहब्बत हैं या नफ़रत,
क़ोई इतना तो समझाए…
क़भी मैं दिलसे लड़ता हूँ,
क़भी दिल मुझसे लड़ता हैं...!

11363
दिख़ावेक़ी मोहब्बतसे,
बेहतर हैं नफ़रत ही क़रो हमसे,
हम सच्चे ज़ज़्बातोक़ी,
बड़ी क़दर क़िया क़रते हैं……!!!

11364
हमें भुलाक़र सोना तो,
तेरी आदत ही बन ग़ई हैं, ऐ सनम…
क़िसी दिन हम सो ग़ए तो,
तुझे नींदसे नफ़रत हो जायेग़ी......!!!

11365
दिल तो क़हता हैं,
क़ि छोड़ ज़ाऊँ ये दुनियाँ,
हमेशाक़े लिए…
फ़िर ख़्याल आता हैं,
क़ि वो नफ़रत क़िससे क़रेग़ी,
मेरे ज़ाने बाद……?