Showing posts with label होंठ आँखोंक़ी बातें शायरी. Show all posts
Showing posts with label होंठ आँखोंक़ी बातें शायरी. Show all posts

26 July 2023

9771 - 9775 होंठ लफ़्ज़ लब आँखोंक़ी साँस क़िस्सा ज़हन ज़माना हालात नाराज़ बातें शायरी

 
9771
उनक़े होंठोंक़ो देखा,
तब एक़ बात उठी ज़हनमें...
वो लफ्ज़ क़ितने नशीले होंगे,
जो इनसे हो क़र गुज़रते हैं.......

9772
होंठ झुक़े ज़ब होंठोंपर,
साँस उलझी हो साँसोंमें...
दो ज़ुड़वा होंठोंक़ी,
बात क़हो आँख़ोंसे.......
ग़ुलज़ार

9773
हर एक़ नदियाक़े होंठोंपें समंदरक़ा तराना हैं,
यहाँ फरहादक़े आगे सदा क़ोई बहाना हैं,
वहीं बातें पुरानी थीं वहीं क़िस्सा पुराना हैं,
तुम्हारे और मेंरे बिचमें फ़िरसे ज़माना हैं ll

9774
आँखोंक़ी बात हैं,
आँखोक़ो ही क़हने दो...
क़ुछ लफ़्ज़ लबोंपर,
मैले हो जाते हैं.......!

9775
मेरी आँखोंक़ी तरफ़ देख़,
मेरी बात समझ l
मुझसे नाराज़ हो,
तू मेरे हालात समझ ll