22 February 2026

10471 - 10475 शाम इज़ाफ़ा बेचैनी ख़याल महफ़ूज़ महसूस सुक़ून मुस्क़ुरा इश्क़ प्यार तोहफ़ा आँख़ तन्हाई शायरी


10471
शाम-ए-तन्हाईमें इज़ाफ़ा बेचैनी,
एक़, तेरा ख़याल न ज़ाना...
एक़ दूसरा, तेरा ज़वाब न आना...

10472
इस तरह हम सुक़ूनक़ो,
महफ़ूज़ क़र लेते हैं l
ज़बभी तन्हा होते हैं,
तुम्हे महसूस क़र लेते हैं ll

10473
तन्हाईमें मुस्क़ुरानाभी इश्क़ हैं l
और इस बातक़ो सबसे छुपानाभी,
इश्क़ होता हैं ll

10474
मेरी तन्हाईक़ो,
मेरा शौक़ न समझना...
बहुत प्यारसे दिया हैं,
ये तोहफ़ा फ़ासीने......

10475
तुझपें खुल ज़ाती,
मेरे रूहक़ी तन्हाई l
मेरी आँख़ोंमें क़भी,
आँख़ोंक़े भी देख़ा होता...

21 February 2026

10466 - 14470 यादें बचपन ख़िलौने चराग़ आलम हंग़ामा आदमी शक्ल मेले भेस हवा क़ोहराम तन्हा शायरी

 
10466
तेरी यादेंभी ना,
मेरे बचपनक़े ख़िलौने ज़ैसी हैं;
तन्हा होता हूँ तो,
इन्हें लेक़र बैठ ज़ाता हूँ।

10467
घरसे क़िस तरह मैं निक़लूँ,
क़ि ये मद्धमसा चराग़ l
मैं नहीं हुँग़ा तो,
तन्हाईमें बुझ ज़ाएग़ा ll

10468
हमक़ो छोड़ो न क़भी,
आलममें तन्हाईमें...
हम तो लुट ज़ायेंग़े,
बस एक़ हीं तन्हाईमें... 

10469
ज़ितना हंग़ामा ज़ियादा होग़ा;
आदमी उतना हीं तन्हा होग़ा ll
बेदिल हैंदरी

10470
लाख़ों शक्लोंक़े मेलेमें,
तन्हा रहना मेरा क़ाम ;
भेस बदलक़र देख़ते रहना,
तेज़ हवाओंक़ा क़ोहराम ll

20 February 2026

10461 - 10465 बज़्म दिल पासबान महफ़िल आईना बारिश चेहरे आँख़ बरस तन्हा शायरी

 
10461
बज़्ममें रहता हूँ तन्हा...
और तन्हाई बज़्म लग़ती हैं...!

10462
अच्छा हैं दिलक़े पास,
रहें पासबाने-अक़्ल,
लेक़िन क़भी-क़भी,
इसे तन्हा भी छोड़ दें।
मोहम्मद इक़बाल

10463
बस एक़ चेहरेने,
तन्हा क़र दिया हमें, वरना...
हम ख़ुदमें एक़,
महफ़िल हुआ क़रते थे...!

10464
ज़ब भी तन्हाई मिले,
आईना हैं या मैं हूँ 
उसने क़िस आनसे,
क़िस आनमें देख़ा था मुझे ?

10465
क़ोई तो बारिश ऐसी हो,
ज़ो तेरे साथ बरसे, मोसिन,
तन्हा तो मेरी आँख़ें,
हर रोज़ बरसाती हैं।

19 February 2026

10456 - 10460 दिल ज़माने महफ़िल काँच टूट तोड़ तेज़ बात साया याद मुसाफ़िर शख़्स क़रीब तन्हा शायरी

 
10456
क़ुछ लोग़ ज़मानेमें,
ऐसे भी होते हैं l
महफ़िलमें ज़ो हंसते हैं,
तन्हाईमें रोते हैं।l
                                     साग़र

10457
काँच ज़ैसे होते हैं,
हम ज़ैसे तन्हा लोग़ोंक़े दिल ;
क़भी टूट ज़ाते हैं,
क़भी तोड़ दिए ज़ाते हैं......

10458
तेज़ इतना हीं अग़र चलना हैं,
तन्हा ज़ाओ तुम l
बात पूरी भी न होग़ी,
और घर आ ज़ाएग़ा ll
                                             आसिम वास्ती

10459
तन्हाईयोंमें आती रहीं,
ज़बभी उसक़ी याद...
सायासा इक़ क़रीब,
मिरे डोलता रहा......!!
ज़हींर क़ाश्मीरी

10460
मुसाफ़िर हीं मुसाफ़िर,
हर तरफ़ हैं ;
मग़र हर शख़्स,
तन्हा ज़ा रहा हैं ll
                       अहमद नदीम क़ासमी

18 February 2026

10451 - 10455 साहिल इंतिज़ार लहर याद आँख़ें दिल धड़क़न आवाज़ सफ़ीना समुंदर तन्हा शायरी


10451
साहिल-ए-इंतिज़ारमें तन्हा,
याद वो लहर लहर आए मुझे ll
                                              आसिफ़ रज़ा

10452
ज़रा देर बैठे थे तन्हाईमें,
तिरी याद आँख़ें दुख़ाने लग़ी ll
 आदिल मंसूरी

10453
दिलक़ी धड़क़न भी,
बड़ी चीज़़ हैं...
तन्हाईमें तेरी ख़ोई हुई,
आवाज़ सुना क़रते हैं ll
                                शबनम नक़वी

10454
इक़ सफ़ीना हैं,
तिरी याद अग़र...
इक़ समुंदर हैं,
मिरी तन्हाई......!
अहमद नदीम क़ासमी

10455
अब तो उनक़ी,
यादभी आती नहीं...
क़ितनी तन्हा हो ग़ई,
तन्हाईयाँ......
                     फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

17 February 2026

10446 - 10450 मोहब्बत ज़रूरत बिछड़ आरज़ू क़ाबिल शौक़ इंतिज़ार नाम मज़ा चाँद नौज़वानी मौसम दीद शायरी

 
10446
अब उसक़ी दीद,
मोहब्बत नहीं ज़रूरत हैं...
क़ि उससे मिलक़े,
बिछड़नेक़ी आरज़ू हैं बहुत......
                                                  ज़फ़र इक़बाल

10447
माना क़ि तेरी दीदक़े,
क़ाबिल नहीं हूँ मैं...!
तू मेरा शौक़ देख़,
मिरा इंतिज़ार देख़......!!
अल्लामा इक़बाल

10448
ईद आई, तुम न आए...
क़्या मज़ा हैं ईदक़ा ?
ईद ही तो नाम हैं,
इक़ दूसरेक़ी दीदक़ा...ll

10449
वहाँ ईद क़्या... वहाँ दीद क़्या...?
ज़हाँ चाँद रात न आई हो......
शारिक़ क़ैफ़ी

10450
नौज़वानीक़ी दीद क़र लीजे;
अपने मौसमक़ी ईद क़र लीजे ll
                                                    मीर हसन

16 February 2026

10441 - 10445 वहम ज़माल क़ाबिल मयस्सर फ़ुर्सत आँख़ शौक़ ज़ल्वा हुस्न बेपनाह नज़र दीदार वज़ू अश्क़ शायरी


10441
वहम ये तुझक़ो अज़ब हैं,
ऐ ज़माल-ए-क़म-नुमा...
ज़ैसे सब क़ुछ हो मगर,
तू दीदक़े क़ाबिल न हो......
                                     मुनीर नियाज़ी

10442
शायद तुम्हारी दीद,
मयस्सर न हो क़भी...
आओ क़ि तुमक़ो देख़लें,
फ़ुर्सतसे आज़ हम......!!

10443
आँख़ चुरा रहा हूँ मैं,
अपने ही शौक़-ए-दीदसे...
ज़ल्वा-ए-हुस्न-ए-बेपनाह,
तूने ये क़्या दिख़ा दिया......
                                      फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

10444
दीदक़े क़ाबिल हसीं,
तो हैं बहुत...
हर नज़र दीदारक़े,
क़ाबिल नहीं......
ज़लील मानिक़पूरी

10445 
मुद्दतों आँख़ें,
वज़ू क़रती रहीं अश्क़ोंसे l
तब क़हीं ज़ाक़े,
तिरी दीदक़े क़ाबिल हुआ मैं ll
                                   इरशाद ख़ान सिकंदर

15 February 2026

10436 - 10440 ज़नाब रुख़ सियाह नसीब रौशन हासिल मयस्सर अज़ीज़ ज़मीन हिज़्र मुबारक सुब्ह ईद राग मय चमन दिलरुबा दीद शायरी


10436
ज़नाबक़े रुख़-ए-रौशनक़ी,
दीद हो ज़ाती...
तो हम सियाह-नसीबोंक़ी,
ईद हो ज़ाती ll
                                        अनवर शऊर

10437
हासिल उस मह-लक़ाक़ी दीद नहीं...
ईद हैं और हमक़ो ईद नहीं...
बेख़ुद बदायुनी

10438
क़हते हैं, ईद हैं,
आज़ अपनी भी ईद होती l
हमक़ो अग़र मयस्सर,
ज़ानाँक़ी दीद होती ll
                                       ग़ुलाम भीक़ नैरंग़

10439
जहाँ न अपने अज़ीज़ोंक़ी दीद होती हैं,
ज़मीन-ए-हिज़्रपें भी क़ोई ईद होती हैं !
ऐन ताबिश

10440
आज यारोंक़ो मुबारक हो,
क़ि सुब्ह-ए-ईद हैं...!
राग हैं, मय हैं, चमन हैं...
दिलरुबा हैं !! दीद हैं !!!
                               आबरू शाह मुबारक़

14 February 2026

10431 - 10435 समझ ताक़त तक़ाज़ा ज़ुल्फ़ सौदा आँख़ें दहर बादल तूफ़ां क़ामयाब महरूम हैराँ शौक़ दीद शायरी


10431
उड़ बैठे क़्या समझक़े,
भला तूर पर क़लीम ;
ताक़त हो दीदक़ी तो,
तक़ाज़ा क़रे क़ोई...

10432
टूटें वो सर ज़िसमें,
तेरी ज़ुल्फ़क़ा सौदा नहीं...
फ़ूटें वो आँख़ें क़ि ज़िनक़ो,
दीदक़ा लपक़ा नहीं.....
हक़ीर

10433
दहरक़ो देते हैं,
मुए दीद-ए-ग़िरियाँ हम ;
आख़िरी बादल हैं,
एक़ ग़ुज़रे हुए तूफ़ांक़े हम...!!

10434
मैं क़ामयाब-ए-दीद भी,
महरूम-ए-दीद भी...
ज़ल्वोंक़े इज़दिहामने,
हैराँ बना दिया......!!!
असग़र गोंडवी

10435
हो दीदक़ा ज़ो शौक़,
तो आँख़ोंक़ो बंद क़र l
हैं देखना यही क़ि,
न देख़ा क़रे क़ोई ll

13 February 2026

10426 - 10430 अरमान ज़ल्वा परवरदिग़ार चाँद तारे क़हक़शाँ आँख़ शाम फ़ुसूँ दर्द मंज़ूर ख़्वाहिश ज़न्नत हराम दीद शायरी


10426
क़िया क़लीमक़ो,
अरमान-ए-दीदने रुस्वा ;
दिख़ाक़े ज़ल्वा-ए-परवरदिग़ार,
थोड़ासा ll
                                  शब्बर ज़ीलानी क़मरी

10427
तुम अपने चाँद, तारे, क़हक़शाँ,
चाहे ज़िसे देना…
मेरी आँख़ोंपें अपनी दीदक़ी.
इक़ शाम लिख़ देना......
ज़ुबैर रिज़वी

10428
तिरी पहली दीदक़े साथ ही,
वो फ़ुसूँ भी था l
तुझे देख़क़र तुझे देख़ना,
मुझे आ ग़या......!!
                                     इक़बाल क़ौसर

10429
दर्दक़े मिलनेसे,
ऐ यार बुरा क़्यूँ माना...
उसक़ो क़ुछ और,
सिवा दीदक़े मंज़ूर न था......
ख़्वाज़ा मीर दर्द

10430
ज़ो और क़ुछ हो,
तेरी दीदक़े सिवा मंज़ूर l
तो मुझपें ख़्वाहिश-ए-ज़न्नत,
हराम हो ज़ाए ll
                                       हसरत मोहानी

12 February 2026

10421 - 10425 दिल चेहरे भुक़ंप बर्बाद क़रीब आईना दुआ बाज़ार तड़प दीदार शायरी


10421
ज़ो चेहरे दिख़ते नहीं थे,
मोहल्लेमें...
भुक़ंपने सबक़ा,
दीदार क़रा दिया ll

10422
क़ुछ लोग़ तो बस,
इसलिए अपने बने हैं अभी l
क़ि क़भी मेरी बर्बादियाँ हों,
तो दीदार क़रीबसे हो ll

10423
हमसे अच्छा तो,
आपक़े घरक़ा आईना हैं l
ज़ो हर रोज़ आपक़ा,
दीदार तो क़रता हैं  !!!

10424
हम तड़प ग़ये,
आपक़े दीदारक़ो,
दिल फ़िरभी आपक़े लिए,
दुआ क़रता हैं ll

10425
हम क़ुछ ऐसे,
तेरे दीदारमें ख़ो ज़ाते हैं...
ज़ैसे बच्चे भरे बाज़ारमें,
ख़ो ज़ाते हैं...!

11 February 2026

10416 - 10420 मुक़दमा सनम पेशी दिल ख़्वाहिश फ़ुरसत ख़्वाब चेहरे इज़हार मुहब्बत डर खुदखुशी ज़िंदग़ी बंदग़ी शायरी


10416
क़ोई मुक़दमा ही क़र दो,
हमारे सनमपर...
क़मसे क़म हर पेशीपर,
दीदार तो हो ज़ायेग़ा l

10417
दिलने आज़ फ़िर तेरे,
दीदारक़ी ख़्वाहिश रख़ी हैं l
अग़र फ़ुरसत मिले तो,
ख़्वाबोंमें आ ज़ाना ll

10418
दीदार तुम्हारे हसीं चेहरेक़ा,
हम हरपल क़रने लगे हैं l
इज़हार-ए-मुहब्बत क़रनेसे,
अब क़ितना डरने लगे हैं ll

10419
क़ि एक़ बार आज़ फ़िर,
खुदखुशी क़ी हमने l
क़ि तेरी ग़लीसे निक़ले,
और तेरा दीदार हो ग़या ll

10420
मुझक़ो तेरा दीदार हो,
तुम ज़िंदग़ी हो,
तुम बंदग़ी हो,
और ज़्यादा क़्या क़हूँ......

10 February 2026

10411 - 10415 प्यार महबूब यार निख़ार आँख़ें निग़ह मुश्क़िल ज़िद चाँद आईना तमन्ना ख़्वाब दीदार शायरी


10411
क़ितनी भी हल्दी,
चन्दन क़ेसर लग़ा लो...
दीदार-ए-यारक़े बिना,
निख़ार आता ही नहीं !!!

10412
उल्टे चलते हैं ये,
प्यार क़रनेवाले,
आँख़ें बंद क़रते हैं वो,
दीदारक़े लिए......!

10413
दीदार महबूबक़ा,
जो निग़हों ने क़र ली ;
धड़क़नोंक़ो सम्भालना,
मुश्क़िल हो ग़या...

10414
ज़िद उसक़ी थी,
चाँदक़ा दीदार क़रनेक़ी ;
होना क़्या था,
मैने उसक़े सामने आईना रख़ दिया ll

10415
दीदारक़ी तमन्ना,
क़ल रात रख़ रही थी...
ख़्वाबोंक़ी रह-गुज़रमें,
माएँ ज़ला ज़लाक़े......

9 February 2026

10406 - 10410 मुश्ताक़ ज़माल हसरत आँख़ नज़र याद दिल बेचैन साँसे क़र्ज़ दवा हक़ीम हुस्न दीदार शायरी


10406
देख़ लेते हैं सभी क़ुछ,
तिरे मुश्ताक़-ए-ज़माल...
ख़ैर, दीदार न हो,
हसरत-ए-दीदार तो हैं...!

10407
ज़रूरी तो नहीं हैं क़ि,
तुझे आँख़ोंसे ही देख़ूँ,
तेरी यादक़ा आना भी,
तेरे दीदारसे क़म नहीं.

10408
दिल बेचैन हैं,
साँसे थमसी ग़यी हैं,
बिन दीदार तेरे शायरी भी,
ज़मसी ग़यी हैं......

10409
क़र्ज़दार रहेंगे हम,
उस हक़ीमके...
ज़िसने दवामें उनक़ा,
दीदार लिख़ दिया...!

10410
क़्या हुस्न था क़ि,
आँख़से देख़ा हजार बार l
फ़िरभी नज़रक़ो,
हसरत-ए-दीदार रह ग़यी...!

8 February 2026

10401 - 10405 मोहब्बत दीदार निग़ाहे आँख़ें ख़्वाब यार क़यामत ख़्वाब मुलाक़ात नज़रअंदाज़ हसरत शायरी


10401
मरीज़-ए-मोहब्बत हुँ,
इक़ तेरा दीदार क़ाफ़ी हैं ;
हर एक़ दवासे बेहतर,
निग़ाहे-ए-यार क़ाफ़ी हैं ll

10402
मेरी आँख़ें और दीदार आपक़ा,
या क़यामत आ ग़ई, या ख़्वाब हैं...

10403
न होती हैं मुलाक़ातें...
न ही दीदार होता हैं l
नज़रअंदाज़ क़रनेक़ा,
ग़ज़ब अंदाज़ हैं उसक़ा......ll

10404
बाक़ी सबक़ुछ तो हो ग़या,
इक़ तेरा दीदार बाक़ि हैं......

10405
सोने लग़ा हूँ तुझे ख़्वाबमें,
देख़नेक़ी हसरत लेक़र,
दुआ क़रना क़ोई ज़ग़ा ना दे,
तेरे दीदार से पहले l

7 February 2026

10396 - 10400 ऐतबार एहतियात बेहिसाब ज़ज़्बा इख़्तियार निसार चमन आँख़ें ज़लवा ख़्वाहिश ज़ुदाई दीदार शायरी

 
10396
ऐतबार क़र दीदारमें,
एहतियात नहीं होता...
बेहिसाब ज़ज़्बा हैं,
इसमें हिसाब नहीं होता।

10397
तेरे दीदारपर अग़र,
मेरा इख़्तियार होता,
ये रोज़-रोज़ होता,
और बार बार होता।

10398
तुझपर सबकुछ निसार क़रना हैं
मुझक़ो हर पल तेरा दीदार क़रना हैं

10399
चमनमें इस क़दर,
तू आम क़रदे अपने ज़लवोंक़ो...
क़ि आँख़ें ज़िस तरफ़ उठें,
तेरा दीदार हो ज़ाये......!

10400
इक़ सख्सक़ी ख़्वाहिश,
ए दीदारक़ी तलब ज़ाती नहीं...
उसक़ी इक़ नज़रक़ी ख़्वाहिश,
उससे ज़ुदाई अब सही ज़ाती नहीं......

6 February 2026

10391 - 10395 दुनियाँ आँख़ दीदार आसमाक़े चाँद बदली आफ़रीं हसरत चश्म तरस हुस्न रूह ज़ानिब मुर्दन शायरी

 
10391
मिरा ज़ी तो आँख़ोंमें आया,
ये सुनते ;
कि दीदार भी एक़ दिन,
आम होग़ा......

                                            मीर तक़ी मीर

10392
ऐ आसमाक़े चाँद,
तू बदलीमें छुप ज़ा l
क़रना हैं दीदार मुझे,
मेरे चाँदक़ा ll

10393
आफ़रीं तुझक़ो,
हसरत-ए-दीदार...
चश्म-ए-तरसे,
ज़बाँक़ा क़ाम लिया......

                              ज़लील मानिक़पूरी

10394
तेरे हुस्नक़ा दीदार,
दुनियाँ चाहती हैं l
तेरे रूहसे राब्ता तो,
महज़ मुझक़ो हैं ll

10395
देख़ना हसरत-ए-दीदार,
इसे क़हते हैं...
फ़िर ग़या मुँह,
तिरी ज़ानिब दम-ए-मुर्दन अपना ll

                                                ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर

5 February 2026

10386 - 10390 मोहब्बत बात तलब नज़रें घूंघट पर्दा नक़ाब चश्म नर्ग़िस निग़ाहें दवा बेख़बर दीदार शायरी


10386
अब वहीं क़रने लग़े,
दीदारसे आग़ेक़ी बात...
ज़ो क़भी क़हते थे,
बस दीदार होना चाहिए......
                                  ज़फ़र इक़बाल

10387
दीदारक़ी तलब हो तो,
नज़रें ज़माए रख़ना...
घूंघट, पर्दा, नक़ाब ज़ो भी हो,
सरक़ता ज़रूर हैं......!

10388
क़ासा-ए-चश्म लेक़े ज़ूँ नर्ग़िस,
हमने दीदारक़ी ग़दाई क़ी ll
                                           मीर तक़ी मीर

10389
मरीज़-ए-मोहब्बत हूँ,
इक़ तेरा दीदार क़ाफ़ी हैं...
हर एक़ दवासे बेहतर,
निग़ाहें-ए-यार क़ाफ़ी हैं......

10390
दीदारक़ी तलबक़े,
तरीक़ोंसे बेख़बर...
दीदारक़ी तलब हैं,
तो पहले निग़ाह माँग़ ll
                          आज़ाद अंसारी

4 February 2026

10381 - 10385 ज़ल ताब-ए-रुख़ यार ताक़त महव तमाशा रुख़ दिल आईना क़ाबिल सरोक़ार हसरत नींद आँख़ें दीदार शायरी


10381
क़्यूँ ज़ल ग़या,
न ताब-ए-रुख़-ए-यार देख़क़र...
ज़लता हूँ अपनी,
ताक़त-ए-दीदार देख़क़र...!
                                                 मिर्ज़ा ग़ालिब

10382
महव-ए-दीदार,
हुए ज़ाते हैं रह-रौ सारे l
इक़ तमाशा हुआ,
ग़ोया रुख़-ए-दिलबर न हुआ ll
ज़ितेन्द्र मोहन सिन्हा रहबर

10383
आईना क़भी,
क़ाबिल-ए-दीदार न होवे...
ग़र ख़ाक़क़े साथ उसक़ो,
सरोक़ार न होवे......
                                      इश्क़ औरंगाबादी

10384
तिरा दीदार हो हसरत बहुत हैं ;
चलो क़ि नींद भी आने लगी हैं l
साजिद प्रेमी

10385
इलाही क़्या,
ख़ुले दीदारक़ी राह...
उधर दरवाज़े बंद,
आँख़ें इधर बंद......
                लाला माधव राम जौहर

3 February 2026

10376 - 10380 मोहब्बत तसव्वुर नज़र हसरत आँख़ अज़ीब ज़ल्वा तरस क़यामत ख़्वाब दीदार शायरी


10376
कुछ नज़र आता नहीं,
उसक़े तसव्वुरक़े सिवा...
हसरत-ए-दीदारने,
आँख़ोंक़ो अंधा क़र दिया......

                                       हैदर अली आतिश

10377
क़ैसी अज़ीब शर्त हैं,
दीदारक़े लिए...
आँख़ें ज़ो बंद हों,
तो वो ज़ल्वा दिख़ाई दे......!

10378
अब और देर न क़र,
हश्र बरपा क़रनेमें...
मिरी नज़र,
तिरे दीदारक़ो तरसती हैं...
ग़ुलाम मुर्तज़ा राही

10379
ये मोहब्बतक़ा शहर हैं साहब,
यहाँ सवेरा सूरज़से नहीं…
बल्कि क़िसीक़े दीदारसे होता हैं।

10380
मेरी आँख़ें और,
दीदार आपक़ा
या क़यामत आ गई,
या ख़्वाब हैं......?
                        आसी ग़ाज़ीपुरी