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बरसोंक़ी ज़ुदाई भी,
क़म नहीं क़र पायी मोहब्बत l
वक़्त ग़ुज़रा मग़र,
मोहब्बत आज़भी हैं ज़िंदा ll
जितनी लंबी ज़ुदाई,
उतना ग़हरा इंतज़ार l
शायद य हैं,
सच्चे प्यारक़ा असली इज़हार ll
दूरियाँ बढ़ीं तो बढ़ीं,
पर दिल तो अभी पास हैं l
तेरे बिना ये ज़िंदग़ी,
बस एक़ उदास साँस हैं ll