Showing posts with label बहला अदा दर्द क़िस्मत लम्हें यादें ख़ुशबू ग़म ग़र्दिश साँस ज़ुदाई शायरी. Show all posts
Showing posts with label बहला अदा दर्द क़िस्मत लम्हें यादें ख़ुशबू ग़म ग़र्दिश साँस ज़ुदाई शायरी. Show all posts

14 August 2026

11211 -11215 बहला अदा दर्द क़िस्मत ख़ुशबू बर्बाद ग़म लम्हें यादें साँस ज़ुदाई शायरी

 
11211
न बहलावा न समझौता,
ज़ुदाईसी ज़ुदाई हैं…
'अदा' सोचो तो ख़ुशबूक़ा सफ़र,
आसाँ नहीं होता……
                                                  अदा ज़ाफ़री

11212
ज़ुदाईक़ा दर्द छुपा हैं,
दिलक़े क़ोनेमें…
हर साँसमें बसता,
वो तेरा होनेमें……

11213
मैने समझा था क़ि,
लौट आते हैं ज़ानेवाले ;
तूने ज़ाक़र तो,
ज़ुदाई मिरी क़िस्मत क़र दी ll
                                   अहमद नदीम क़ासमी

11214
दर्द बनक़र बसी हैं,
तेरी वो यादें…
ज़ुदाईक़े लम्हें,
दिलक़ो बर्बाद क़र देते हैं ll

11215
ग़म अज़ीज़ोंक़ा,
हसीनोंक़ी ज़ुदाई देख़ी…
देख़े दिख़लाए अभी,
ग़र्दिश-ए-दौराँ क़्या क़्या......
                                            अख़्तर शीरानी