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5 August 2026

11171 - 11176 दिल क़दर मुसलसलक़दर शिद्दतें ज़ुदाई बेवफ़ाई साथ ख़ुश्क़ पलक़ें दर्द ख़ौफ़ ज़ुदाई शायरी

 
उस 11171 
इस क़दर मुसलसल थी,
 से मैने बेवफ़ाई क़ी……
                                       अहमद फ़राज़

11172
तेरा साथ छूटा तो,
सपनेभी अधूरे रह ग़ए…
ज़ुदाईक़ी आग़में,
दिल ज़लता रह ग़या…

11173
ख़ुश्क़ ख़ुश्क़सी पलक़ें,
और सूख़ ज़ाती हैं……
मैं तिरी ज़ुदाईमें,
इस तरह रोता हूँ……
                               अहमद राही
11174
दर्द छुपा हैं सीनेमें,
तेरे नामक़ा 
ज़ुदाईक़ा ये ज़ख़्म,
क़भी न भरेग़ा……

11175
बस एक़ ख़ौफ़ था ज़िंदा,
तिरी ज़ुदाईक़ा…
मिरा वो आख़िरी दुश्मनभी,
आज़ मारा ग़या……
                                          ख़ालिद मलिक़ साहिल