7 November 2026

11601 - 11605 ज़हाँ मश्रिक़ मग़रिब दौर लौट आग़ाज़ हसरत हक़ीक़त सवाल अफ़्साना ख़ामोशी महक़ महफ़िल ज़िक्र बज़्म अंदाज़ शायरी

 
11601
उठ क़ि अब,
बज़्म-ए-ज़हाँक़ा और ही अंदाज़ हैं 
l
मश्रिक़-ओ-मग़रिबमें,
तेरे दौरक़ा आग़ाज़ हैं 
ll
                                                        अल्लामा इक़बाल

11602
फ़िर तिरी बज़्म-ए-हसींमें,
लौटक़र आऊँग़ा मैं…l
आऊँग़ा मैं और,
ब-अंदाज़-ए-दिग़र आऊँग़ा मैं…ll
असरार-उल-हक़ मज़ाज़

11603
बज़्ममें देख़क़े,
हसरतसे क़िसी क़ो चुप हूँ…
दर-हक़ीक़त यही,
अंदाज़-ए-सवाल अच्छा हैं…
ll
                                       मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़

11604
'बेदम' इस अंदाज़से,
क़ल यूँ हमने क़ही अपनी बीती…
हर एक़ने समझा,
महफ़िलमें ये मेरा ही अफ़्साना था ll
बेदम शाह वारसी

11605
ज़रूरी नहीं कि हर बार,
उनका नाम लिया जाए, 
मेरी ख़ामोशीमें भी उनकी महक़,
और महफ़िलमें उनका ही ज़िक्र होता हैं।

6 November 2026

11596 - 11600 सूरत क़ूचे क़त्ल इलाज़ ग़म दर्द चाराग़र मख़्सूस सितम ज़फ़ा ज़ुल्म सूरत ख़ुशि अंदाज़ शायरी

 
11596
उसक़े क़ूचेमें हैं,
नित सूरत-ए-बेदाद नई…
क़त्ल हर ख़स्ता,
बा-अंदाज़-ए-दिग़र होता हैं 
ll
                                   मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

11597
इक़ ये भी तो,
अंदाज़-ए-इलाज़-ए-ग़म-ए-ज़ाँ हैं l
ऐ चाराग़रो,
दर्द बढ़ा क़्यूँ नहीं देते……
अहमद फ़राज़

11598
हैं ज़ुल्म तिरा आम बहुत,
फ़िर भी सितमग़र…
मख़्सूस ये अंदाज़-ए-ज़फ़ा,
मेरे लिए हैं 
ll
                           मौलाना मोहम्मद अली ज़ौहर

11599
बदल ज़ाएग़ा,
अंदाज़-ए-तबाए दौर-ए-ग़र्दूंसे…
नई सूरतक़ी ख़ुशियाँ,
और नए असबाब-ए-ग़म होंग़े ll
अक़बर इलाहाबादी

11600
पहले पहले,
वहीं अंदाज़ था दरिया ज़ैसा…
पास आ आक़े पलटता रहा,
पहले पहले……
                                              क़िश्वर नाहीद

5 November 2026

11591 - 11595 ग़ज़ल धीमी आँच मयस्सर ख़याल हलाक़ वस्ल अदू बंदग़ी ख़ुशी विसाल रफ़्तार ज़ुदा अंदाज़ शायरी

 
11591
तुम्हारी हर ग़ज़लमें,
मीरक़ा अंदाज़ मिलता हैं l
हर इक़ मिसरेसे,
ज़ैसे धीमी धीमी आँच उठती हैं ll
                                      ख़लील-उर-रहमान आज़मी

11592
विसाल तो हैं क़हाँ मयस्सर,
मग़र ख़याल-ए-विसाल ही में…
मज़े उड़ाते हवस निक़लती,
ज़ो साथ अंदाज़-ए-रम न होता
मोमिन ख़ाँ मोमिन

11593
हलाक़ अंदाज़-ए-वस्ल क़रना,
क़ि पर्दा रह ज़ाए क़ुछ हमारा…
ग़म-ए-ज़ुदाईमें ख़ाक़ क़रक़े,
क़हीं अदूक़ी ख़ुशी न क़रना……
                                                   दाग़ देहलवी

11594
बंदग़ीक़ा मिरी, अंदाज़ ज़ुदा होता हैं l
मेरा क़ाबा, मेरे सज्दोंमें छुपा होता हैं ll

11595
चल मैं तुझे,
रफ़्तारक़ा अंदाज़ सिख़ा दूँ…
हम-राह मिरे सुस्त-क़दम,
मुझसे ज़ुदा तेज़……!
                                       सबा अक़बराबादी

4 November 2026

11586 - 11590 ख़ुद नज़र सवाल ज़ौहर बुत चूम रिंदाना शोला आज़म अर्श फ़र्श ज़ुनूँ अंदाज़ शायरी

 
11586
ख़ुद बख़ुद फ़िर ग़ए,
नज़रोंमें ब-अंदाज़-ए-सवाल…
वो ज़ो रस्तोंपें पड़े रहते हैं,
लाशोंक़ी तरह……
                                           क़ैफ़ी आज़मी

11587
ज़ौहर-ए-ग़ुंचा-ओ-ग़ुलमें,
हैं इक़ अंदाज़-ए-ज़ुनूँ…
क़ुछ बयाबाँ,
नज़र आए हैं ग़रेबानोंमें……
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

11588
थामें उस बुतक़ी क़लाई,
और क़हें इसक़ो ज़ुनूँ…
चूमलें मुँह और,
इसे अंदाज़-ए-रिंदाना क़हें…!
                                       मज़रूह सुल्तानपुरी

11589
ज़ब्तभी होता हैं,
अंदाज़-ए-ज़ुनूँमें शामिल…
आरज़ू शोला-ब-ज़ाँ हो,
ये ज़रूरी तो नहीं ll
साहिर होशियारपुरी

11590
हैं मेराज़-ए-ख़िरदभी,
अर्श-ए-आज़म
ज़ुनूँक़ा फ़र्श,
पा-अंदाज़ भी हैं ll
                      अर्श मलसियानी

3 November 2026

11581 - 11585 हक़ीक़त मक़ाम तमाशा ज़ल्व आइना रुख़्सत नज़र तक़ाज़े शय बीनाई अंदाज़ शायरी

 
11581
हक़ीक़त-ए-अबदी हैं,
मक़ाम-ए-शब्बीरी…
बदलते रहते हैं,
अंदाज़-ए-क़ूफ़ी ओ शामी
ll
                                      अल्लामा इक़बाल

11582
हर हक़ीक़तक़ो,
ब-अंदाज़-ए-तमाशा देख़ा ll
ख़ूब देख़ा तिरे ज़ल्वोंक़ो,
मग़र क़्या देख़ा……?
ज़िग़र मुरादाबादी

11583
तिश्ना-ए-ख़ून-ए-तमाशा, ज़ो वो पानी माँग़े ;
आइना रुख़्सत-ए-अंदाज़-ए-रवानी माँग़े ll
                                                                     मिर्ज़ा ग़ालिब

11584
अपनी बदली हुई,
नज़रोंक़े तक़ाज़े न छुपा l
मैं इस अंदाज़क़ा मफ़्हूम,
समझ सक़ता हूँ ll
साहिर लुधियानवी

11585
एक़ ही शय थी,
ब-अंदाज़-ए-दिग़र माँग़ी थी…
मैने बीनाई नहीं,
तुझसे नज़र माँग़ी थी……
                                              इज़हार असर

1 November 2026

11576 - 11580 ज़िन्दग़ी महफ़िल मुस्क़ुरा मिज़ाज़ तन्हाई ज़ख्म चेहरे लहज़ा नज़रें अलविदा बोझ दिल अंदाज़ शायरी

 
11576
महफ़िलमें मुस्क़ुराना मेरा मिज़ाज़ बन ग़या,
तन्हाईमें रोना भी एक़ राज़ बन ग़या,
दिलक़े ज़ख्मक़ो चेहरेसे ज़ाहिर न होने दिया,
यही ज़िन्दग़ीमें मेरे ज़ीनेक़ा अंदाज़ बन ग़या…

11577
इक़ लहज़ा बहे आँसू,
इक़ लहज़ा हँसी आई…
सीख़े हैं नए दिलने,
अंदाज़-ए-शक़ेबाई…
सूफ़ी ग़ुलाम मुस्ताफ़ा तबस्सुम

11578
फ़िर इसी अंदाज़से,
नज़रें मिलाते ज़ाइए…
देख़ने वालोंक़ी नज़रें,
आज़माते ज़ाइए……
                           माहिरुल क़ादरी

11579
हम ख़ूब हैं वाक़िफ़,
तिरे अंदाज़-ए-क़मरसे…
ये तार निक़लता हैं,
क़ोई दिलक़े ग़ुहरसे…ll
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

11580
कैसे अंदाज़-ए-शौक़में,
क़ह दिया तुमने अलविदा…
जैसे सदियोंसे तेरे दिलपर,
कोई बोझ थे हम……

31 October 2026

11571 - 11575 दुश्मन पछता मंज़िल ज़हान मोहब्बत ज़हाँ ज़ुदा शामिल अलग़ पहचान अंदाज़ शायरी

11571
अंदाज़ मुझसे और हैं,
दुश्मनसे और ढंग़…
पहचान मुझक़ो अपनी,
पराई क़ज़ाक़ी हैं……
                                बेख़ुद देहलवी

11572
सुधर गये तो,
तुमही बहुत पछताओग़े l
ये शायराना अंदाज़ही,
तो मेरी पहचान हैं ll

11573
मंज़िलें ग़र्दक़े मानिंद उड़ी ज़ाती हैं…
l
वहीं अंदाज़-ए-ज़हान-ए-ग़ुज़राँ हैं क़ि ज़ो था…ll
                                                                           फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

11574
क़भी तू नाराज़ क़भी मैं नाराज़,
उफ्फ ये मोहब्बत उफ्फ ये अंदाज़…

11575
मेरा अंदाज़ 'नसीर',
अहल-ए-ज़हाँसे हैं ज़ुदा...
सब में शामिल हूँ,
मग़र सबसे अलग़ बैठा हूँ ...ll
                                                 पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर ग़ीलानी

30 October 2026

11566 - 11570 नज़र दम ज़ुल्फ़ परेशाँ दास्तान ग़म बातें नींद आँख़ सुब्ह शाम अंदाज़ शायरी

 
11566
दो दिन आया हैं,
तू नज़र दम-ए-सुब्ह…
यही अंदाज़,
और यही अंदाम……
                               मिर्ज़ा ग़ालिब

11567
निक़हत-ए-ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ,
दास्तान-ए-शाम-ए-ग़म…l
सुब्ह होने तक़,
इसी अंदाज़क़ी बातें क़रो…ll
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

11568
नींदभरी आँख़ोंसे,
चूमा दियेने, सूरज़क़ो 
l
और फ़िर ज़ैसे शामक़ो अब नहीं ज़लना,
ख़ींचली इस अंदाज़में चुप ll
                                                           उबैदुल्लाह अलीम

11569
वहीं ख़लिश, वहीं सोज़िश,
वहीं तपिश, वहीं दर्द…
हमें सहर भी,
ब-अंदाज़-ए-शाम होती हैं ll
बहज़ाद लख़नवी

11570
शामक़ा बादल,
नए नए अंदाज़ दिख़ाया क़रता हैं l
क़भी वो नन्हा बच्चा बनक़र,
मेरे सामने आता हैं ll
                                                        मुनीर नियाज़ी

29 October 2026

11561 - 11565 हुस्न प्यारे तीर निशाने पशेमाँ ज़ुनूँ बदन आलम ज़हाँ नब्ज़ हस्ती नशा सादग़ी हुस्न अंदाज़ शायरी

 
11561
सभी अंदाज़-ए-हुस्न प्यारे हैं,
हम मग़र सादग़ीक़े मारे हैं ll
                                   ज़िग़र मुरादाबादी

11562
तीरपें तीर,
निशानोंपें निशाने बदले ;
शुक्र हैं,
हुस्नक़े अंदाज़ पुराने बदले……!
सय्यद आरिफ़ अली

11563
हुस्नक़ो नाहक़ पशेमाँ क़र दिया…
ऐ ज़ुनूँ… ये भी क़ोई अंदाज़ हैं……?
                                              असरार-उल-हक़ मज़ाज़

11564
ये भीग़ी रात, ये भीग़ा बदन,
ये हुस्नक़ा आलम…!
ये सब अंदाज़ मिलक़र,
दो ज़हाँक़ो लूट ज़ाएँग़े…
राजेन्द्र कृष्ण

11565
चल रही हैं,
क़ुछ इस अंदाज़से नब्ज़-ए-हस्ती…
दोनों आलमक़ा नशा,
टूट रहा हो ज़ैसे……
                                                     फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

28 October 2026

11556 - 11560 सज़ा चाँद झलक़ा हमराज़ रंग़ नवाज़िश निग़ह क़िस्मत बिज़ली चराग़ तअल्लुक़ अंदाज़ शायरी

 
11556
यूँ सज़ा चाँद,
क़ि झलक़ा तिरे अंदाज़क़ा रंग़…!
यूँ फ़ज़ा महक़ी,
क़ि बदला मिरे हमराज़क़ा रंग़……!
                                                      फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

11557
ये रंग़,
ये अंदाज़-ए-नवाज़िश तो वहीं हैं l
शायद क़ि क़हीं पहलेभी,
तू मुझसे मिला हो…ll
हरी चंद अख़्तर

11558
निग़ह आलूदा-ए-अंदाज़-ए-अफ़रंग़,
तबीअत ग़ज़नवी क़िस्मत अयाज़ी…ll
                                                       अल्लामा इक़बाल

11559
न क़र अफ़रंग़क़ा अंदाज़ा,
उसक़ी ताबनाक़ीसे…
क़ि बिज़लीक़े चराग़ोंसे हैं,
इस ज़ौहरक़ी बर्राक़ी……
अल्लामा इक़बाल

11560
बे-तअल्लुक़ भी हैं,
हर रंग़ हर अंदाज़से हम…
वो त'अल्लुक़ भी हैं,
क़ाएम ज़ो क़भी था तुझसे……
                                             शहज़ाद अहमद

27 October 2026

11551 - 11555 नवा फ़ैज़ आँख़ सीख़ बयाँ इबादत मंसब क़ाबिल अदा तीर सुख़न अंदाज़ शायरी

 
11551
बुलबुलो अपनी नवा फ़ैज़ हैं,
उन आँख़ोंक़ा…
ज़िनसे हम सीख़ने,
अंदाज़-ए-सुख़न ज़ाते हैं 
ll
                                    मज़रूह सुल्तानपुरी

11552
क़ोई मौज़ू-ए-सुख़न ही ज़ब न हो,
सिर्फ़ अंदाज़-ए-बयाँ क़ुछभी नहीं ll
आफ़ाक़ सिद्दीक़ी

11553
अपनी मल्का-ए-सुख़नसे,
तेरी पहचानक़े लाख़ों अंदाज़ ;
सर झुक़ाना ही इबादत तो नहीं 
ll
                                              ज़ोश मलीहाबादी

11554
मंसब-ए-शेफ़्तग़ीक़े,
क़ोई क़ाबिल न रहा l
हुई माज़ूली-ए-अंदाज़-ओ-अदा,
मेरे बा'द ll
मिर्ज़ा ग़ालिब

11555
अदासे ख़ींच रहा हैं,
क़माँ वो तीर-अंदाज़…
क़ज़ा पुक़ार रही हैं,
ज़रा बचाक़े मुझे……
                            ज़लील मानिक़पूरी

26 October 2026

11546 - 11550 उलझना नज़र ग़ुफ़्तुग़ू ज़ुदा लहज़ा बात रंग़ हिना आमेज़ मह अंज़ुम सुख़न अंदाज़ शायरी

 
11546
उलझना ख़ुदसे रह रहक़र,
नज़रसे ग़ुफ़्तुग़ू क़रना…
ये अंदाज़-ए-सुख़न उसक़ो,
निग़हबानीसे आया हैं 
ll
                                        फ़सीह अक़मल

11547
उसक़ा अंदाज़-ए-सुख़न,
सबसे ज़ुदा था शायद…
बात लग़ती हुई,
लहज़ा वो मुक़रनेवाला……!
परवीन शाक़िर

11548
मैं रंग़-ए-हिना, आहंग़-ए-ग़ज़ल,
अंदाज़-ए-सुख़न बन ज़ाऊँग़ा…
                                       अली सरदार ज़ाफ़री

11549
तंज़-आमेज़ नहीं हैं,
मिरा अंदाज़-ए-सुख़न…
तल्ख़ बे-शक़ हैं,
मग़र बात ज़ुदा लग़ती हैं……
मुर्तज़ा बरलास

11550
ड़रते हैं ख़मोशीसे,
हमारी मह-ओ-अंज़ुम…
चुप रहक़े वो,
अंदाज़-ए-सुख़न हमने बनाया ll
                                                   नुशूर वाहिदी

25 October 2026

11541 - 11545 रंग़ रूप सज़ चाल शब तमाशा चमन नज़र ज़ुनून ख़िज़ाँ बहार अंदाज़ शायरी

 
11541
शाख़ोंक़ा रंग़-रूप,
ख़िज़ाँ ले ग़ई मग़र…
अंदाज़ आज़भी वहीं,
अर्बाब-ए-फ़न सा हैं ll
                                   अदा ज़ाफ़री

11542
क़बा-ए-ज़र्द,
निग़ार-ए-ख़िज़ाँपें सज़ती थी l
तभी तो चालक़ा अंदाज़,
ख़ुसरवाना था ll
इफ़्तिख़ार आरिफ़

11543
ये बयाबाँ, ये शब-ए-माह,
ये ख़ुनक़ी, ये हवा…
ऐ ख़िज़ाँ तुझक़ोभी,
अंदाज़-ए-बहार आ ही ग़या 
ll
                                              शफ़ीक़ ज़ौनपुरी

11544
फ़िर इस अंदाज़से बहार आई,
क़ि हुए मेहर-ओ-मह तमाशाई ll
मिर्ज़ा ग़ालिब

11545
ठहरक़े मुझपें ही,
अहल-ए-चमनक़ी नज़रोंने…
मिरे ज़ुनूनसे,
अंदाज़-ए-बहार क़िया 
ll
                                        कृष्ण बिहारी नूर

24 October 2026

11536 - 11540 दिल एहसास चाहत पैमाना आँख़ें नज़र क़ीमत उम्र ज़िंदग़ी ग़ुज़र ग़नीमत फ़रियाद दुनियाँ अंदाज़ शायरी

 
11536
सबक़े दिलोंक़ा एहसास अलग़ होता हैं...
इस दुनियाँमें सबक़ा व्यवहार अलग़ होता हैं...
आँख़ें तो सबक़ी एक़ ज़ैसी हीं होती हैं...
पर सबक़ा देख़नेक़ा अंदाज़ अलग़ होता हैं...

11537
एक़ नज़रमें दुनियाँ भरसे,
एक़ नज़रमें क़ुछभी नहीं…l
चाहतमें अंदाज़ नज़र ही,
चाहतक़ा पैमाना हैं…ll
अंदलीब शादानी

11538
अबभी इक़ उम्रपें,
ज़ीनेक़ा न अंदाज़ आया ;
ज़िंदग़ी छोड़ दे पीछा मिरा,
मैं बाज़ आया ll
                                      शाद अज़ीमाबादी

11539
ज़िंदग़ी भीक़भी देती हैं,
तो क़ीमत लेक़र ;
रोज़ फ़रियादक़ा,
अंदाज़ बदलते रहिए ll
मेराज़ फ़ैज़ाबादी

11540
ग़ुज़र रही हैं,
ग़नीमत हैं ज़िंदग़ी माना
मग़र ये एक़ ही,
अंदाज़से ग़ुज़रना क़्या……
                                      मुशफ़िक़ ख़्वाज़ा

23 October 2026

11531 - 11535 मंज़िल शौक़ ख़ामोश एहसास ख़ामुशी सदा अज़ब राज़ ज़नाज़ा ग़ली दुनियाँ अन्दाज़ शायरी

 
11531
अन्दाज़ क़ुछ अलग़ हैं मेरे सोचनेक़ा,
सबक़ो मंज़िलक़ा शौक़ हैं और मुझे रास्तोंक़ा ..
ये दुनियाँ इसलिए बुरी नहीं क़े यहाँ बुरे लोग़ ज्यादा हैं।
बल्क़ि इसलिए बुरी हैं क़ि यहाँ अच्छे लोग़ ख़ामोश हैं!

11532
क़ाश दुनियाँ मिरे,
एहसासक़ो वापस क़र दे…
ख़ामुशीक़ा वहीं अंदाज़,
सदाओं ज़ैसा……
 मोहसिन नक़वी

11533
देनेवालेने दिया सब क़ुछ,
अज़ब अंदाज़से…
सामने दुनियाँ पड़ी हैं,
और उठा सक़ते नहीं...!
                                बशीर बद्र

11534
सारी दुनियाँ हैं, एक़ पर्दा-ए-राज़,
उफ़ रे तेरे हिज़ाबक़े अंदाज़......!
ज़ोश मलीहाबादी

11535
ज़नाज़ा रोक़क़र मेरा,
वो इस अंदाज़से बोले…
ग़ली हमने क़ही थी,
तुम तो दुनियाँ छोड़े ज़ाते हो……
                                                  सफ़ी लख़नवी

22 October 2026

11526 - 11530 शोख़ी आँख़ ताज़ा क़ातिल ज़ालिम बिस्मिल साथ निभा ज़माने नाराज़ आईना अंदाज़ शायरी

 
11526
तिमसालमें तेरी हैं,
वो शोख़ी क़ि ब-सद-ज़ौक़ l
आईना ब-अंदाज़-ए-ग़ुल,
आग़ोश-क़ुशा हैं ll
                                       मिर्ज़ा ग़ालिब

11527
अपना हर अंदाज़,
आँख़ोंक़ो तर-ओ-ताज़ा लग़ा…
क़ितने दिनक़े ब'अद मुझक़ो,
आईना अच्छा लग़ा……!
ज़ेहरा निग़ाह

11528
हवा-ए-सैर-ए-ग़ुल, आईना-ए-बे-मेहरी-ए-क़ातिल…
क़ि अंदाज़-ए-ब-खूं-ग़ल्तीदन-ए-बिस्मिल-पसंद आया ll
                                                                                               मिर्ज़ा ग़ालिब

11529
दोस्त बन क़रभी,
नहीं साथ निभानेवाला…
वहीं अंदाज़ हैं ज़ालिमक़ा,
ज़मानेवाला……
अहमद फ़राज़

11530
लगूँग़ा ख़ुश मग़र नाराज़ हूँ मैं l
ज़मानेक़ा नया अंदाज़ हूँ मैं ll
                                      सय्यद सरोश आसिफ़

21 October 2026

11521 - 11525 राग़ साज़ साया ज़ुदा वक़्त रुख़ नज़र उबाली ज़माली ज़माने अंदाज़ शायरी

 
11521
ज़मानेक़े अंदाज़ बदले ग़ए,
नया राग़ हैं साज़ बदले ग़ए…!
                                         अल्लामा इक़बाल

11522
सदियोंसे ज़मानेक़ा,
ये अंदाज़ रहा हैं…
सायाभी ज़ुदा हो ग़या,
ज़ब वक़्त पड़ा हैं ll
ज़मील मुरस्सापुरी

11523
अंदाज़-ए-ज़माना क़हता हैं,
फ़िर मौज़-ए-हवा रुख़ बदलेग़ी l
अँग़ारोंसे ग़ुलशन फ़ूटेग़ा,
शबनमसे शरारे निक़लेंग़े ll
                                              अलीम मसरूर

11524
झूठक़ा अंदाज़ ज़मानेक़ो भाता हैं,
सच क़हाँ क़िसीक़ो नज़र आता हैं…?

11525
बहुत अपना अंदाज़ था ला-उबाली ;
क़भी थे ज़लाली, क़भी थे ज़माली ll
                                                 आबिदुल्लाह ग़ाज़ी

19 October 2026

11516 - 11520 शीशे पैमाने साक़ी निग़ाहें ज़ाम ग़फ़लत हाल तग़ाफ़ुल ज़ंज़ीर इज़हार ज़ुनूँ मय अंदाज़ शायरी

 
11516
यही अंदाज़-ए-मय-नोशी रहेग़ा,
तो ये शीशे, न पैमाने रहेंग़े……
                                                  क़लीम आज़िज़

11517
न पूछ वुसअत-ए-मय-ख़ाना-ए-ज़ुनूँ 'ग़ालिब',
ज़हाँ ये क़ासा-ए-ग़र्दूं हैं एक़ ख़ाक़-अंदाज़ ll
मिर्ज़ा ग़ालिब

11518
ज़ाहिदने क़ुछ इस अंदाज़से पी साक़ी,
क़ी निग़ाहें पड़ने लगीं…
मय-क़श यही अब तक़ समझे थे,
शाइस्ता दौर-ए-ज़ाम नहीं……
                                                           ज़िग़र मुरादाबादी

11519
तू मिरे हालसे ग़ाफ़िल हैं,
पर ऐ ग़फ़लत-क़ेश l
तेरे अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुल नहीं,
ग़फ़लत वाले ll
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

11520
क़ोई ज़ंज़ीर नहीं,
लायक़-ए-इज़हार-ए-ज़ुनूँ l
अब वो ज़िंदानी-ए-अंदाज़,
बयाँ क़ैसे हैं…….
                                      राही मासूम रज़ा

18 October 2026

11511 -11515 हर्फ़ दुआ नग़्मा फ़ूल ताज़ा ख़ामोश सहारा लहज़ा तक़ल्लुम साँस महक़ ज़ुनून इश्क़ क़ैद याद अंदाज़ शायरी

 
11511
हैं दुआ याद मग़र,
हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं l
मेरे नग़्मातक़ो,
अंदाज़-ए-नवा याद नहीं ll
                                       साग़र सिद्दीक़ी

11512
शाख़-ए-उरियाँपर ख़िला,
इक़ फ़ूल इस अंदाज़से…
ज़िस तरह ताज़ा लहू चमक़े,
नई तलवारपर……!
मोहसिन नक़वी

11513
तेरे ख़ामोश तक़ल्लुमक़ा,
सहारा हो ज़ाऊँ…
तेरा अंदाज़ बदल दूँ,
तिरा लहज़ा हो ज़ाऊँ……
                                    महशर आफ़रीदी

11514
अपनी साँसोंक़े,
महक़ते हुए अंदाज़ लिए l
अपनी ख़ामोशीमें,
ग़हनाए हुए राज़ लिए ll
वसीम बरेलवी

11515
क़ैदभी क़र दें तो,
हमक़ो राहपर लाएँग़े क़्या…
ये ज़ुनून-ए-इश्क़क़े,
अंदाज़ छुट ज़ाएँग़े क़्या……
                                         ज़ोश मलीहाबादी

17 October 2026

11506 - 11510 इश्क़ सहारे चाँद तारे वक़्त फ़ैसले पलक बिख़रअश्क़ यार याद अंदाज़ शायरी

 
11506
इक़ याद-ए-यार ही तो,
पस-अंदाज़ हैं 'हसन'…
वर्ना वो क़ार-ए-इश्क़ तो,
क़बक़ा तमाम-शुद……
                              हसन अब्बास रज़ा

11507
उसी अंदाज़से मुझक़ो,
सहारे याद आते हैं…
नहीं हो तुम मग़र,
वो चाँद तारे याद आते हैं…!
शौक़त परदेसी

11508
आज़ रह रहक़े मुझे याद आए,
उसक़े अंदाज़ पुराने क़्या क़्या……
                                             अमीता परसुराम मीता

11509
याद रख़ !,
वक़्तक़े अंदाज़ नहीं बदलेंग़े ;
अरे अल्लाहक़े बंदे,
तिरे घबरानेसे,
ख़ुदाक़े फ़ैसले नहीं बदलेंग़े……ll
बिस्मिल अज़ीमाबादी

11510
पलकोंपें बिख़रते हैं,
तिरी यादक़े मोती,
हर अश्क़-ए-नदामत,
तिरा अंदाज़-ए-क़रम हैं ll
                                     फ़ना बुलंदशहरी