11511
हैं दुआ याद मग़र,
हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं l
मेरे नग़्मातक़ो,
अंदाज़-ए-नवा याद नहीं ll
साग़र सिद्दीक़ी
11512
शाख़-ए-उरियाँपर ख़िला,
इक़ फ़ूल इस अंदाज़से…
ज़िस तरह ताज़ा लहू चमक़े,
नई तलवारपर……!
मोहसिन नक़वी
11513
तेरे ख़ामोश तक़ल्लुमक़ा,
सहारा हो ज़ाऊँ…
तेरा अंदाज़ बदल दूँ,
तिरा लहज़ा हो ज़ाऊँ……
महशर आफ़रीदी
तेरे ख़ामोश तक़ल्लुमक़ा,
सहारा हो ज़ाऊँ…
तेरा अंदाज़ बदल दूँ,
तिरा लहज़ा हो ज़ाऊँ……
महशर आफ़रीदी
11514
अपनी साँसोंक़े,
महक़ते हुए अंदाज़ लिए l
अपनी ख़ामोशीमें,
ग़हनाए हुए राज़ लिए ll
वसीम बरेलवी
11515
क़ैदभी क़र दें तो,
हमक़ो राहपर लाएँग़े क़्या…
ये ज़ुनून-ए-इश्क़क़े,
अंदाज़ छुट ज़ाएँग़े क़्या……
ज़ोश मलीहाबादी
क़ैदभी क़र दें तो,
हमक़ो राहपर लाएँग़े क़्या…
ये ज़ुनून-ए-इश्क़क़े,
अंदाज़ छुट ज़ाएँग़े क़्या……
ज़ोश मलीहाबादी
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