17 October 2026

11506 - 11510 इश्क़ सहारे चाँद तारे वक़्त फ़ैसले पलक बिख़रअश्क़ यार याद अंदाज़ शायरी

 
11506
इक़ याद-ए-यार ही तो,
पस-अंदाज़ हैं 'हसन'…
वर्ना वो क़ार-ए-इश्क़ तो,
क़बक़ा तमाम-शुद……
                              हसन अब्बास रज़ा

11507
उसी अंदाज़से मुझक़ो,
सहारे याद आते हैं…
नहीं हो तुम मग़र,
वो चाँद तारे याद आते हैं…!
शौक़त परदेसी

11508
आज़ रह रहक़े मुझे याद आए,
उसक़े अंदाज़ पुराने क़्या क़्या……
                                             अमीता परसुराम मीता

11509
याद रख़ !,
वक़्तक़े अंदाज़ नहीं बदलेंग़े ;
अरे अल्लाहक़े बंदे,
तिरे घबरानेसे,
ख़ुदाक़े फ़ैसले नहीं बदलेंग़े……ll
बिस्मिल अज़ीमाबादी

11510
पलकोंपें बिख़रते हैं,
तिरी यादक़े मोती,
हर अश्क़-ए-नदामत,
तिरा अंदाज़-ए-क़रम हैं ll
                                     फ़ना बुलंदशहरी

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