15 October 2026

11496 -11500 तरीक़ा रूह नाराज़ फ़ूल शोला राज़ ज़ख्म ख़ामोशी आवाज़ अन्दाज़ अंदाज़ शायरी

 
11496
क़ि ये ज़ीनेक़ा,
तरीक़ाभी हैं अंदाज़भी हैं…
तेरी आवाज़भी हैं,
मेरी आवाज़भी हैं…!
                                  क़ैफ़ी आज़मी
11497
मेरी रूहमें नाराज़ग़ी…
तेरी आवाज़में चुप्पी…
तू अपने अन्दाज़में चुप…
मैं अपने अंज़ामपें चुप……

11498

तू बिग़ड़ता भी हैं,
ख़ास अपने ही अंदाज़क़े साथ ;
फ़ूल ख़िलते हैं,
तिरे शोला-ए-आवाज़क़े साथ ll
                                          अहमद नदीम क़ासमी
11499
इस शहरमें,
ज़ीनेक़े अंदाज़ निराले हैं…
होंठोंपें लतीफ़े हैं,
आवाज़में छाले हैं …ll
ज़ावेद अख़्तर

11500
ख़ामोशी एक़ ग़हरा ज़ख्म हैं,
ख़ुला हुआ राज़ हैं ;
एक़ छुपी आवाज़क़ा,
बेहतरीन अंदाज़ हैं ll

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