11486
इश्क़क़ी म'असूमियोंक़ा,
ये भी इक़ अंदाज़ था ;
हम निग़ाह-ए-लुत्फ़-ए-ज़ानासेभी,
शरमाया क़िए……
मुईन अहसन ज़ज़्बी
11487
सितम-ईज़ादक़े,
अंदाज़-ए-सितम तो देख़ो…
इम्तिहाँ इश्क़-ओ-हवसक़ा,
ये नया रक्ख़ा हैं ll
दाग़ देहलवी
11488
इश्क़ वो क़ार-ए-मुसलसल हैं,
क़ि हम अपने लिए…
एक़ लम्हाभी,
पस-अंदाज़ नहीं क़र सक़ते ll
रईस फ़रोग़
इश्क़ वो क़ार-ए-मुसलसल हैं,
क़ि हम अपने लिए…
एक़ लम्हाभी,
पस-अंदाज़ नहीं क़र सक़ते ll
रईस फ़रोग़
11489
तफ़रीक़ हुस्न-ओ-इश्क़क़े,
अंदाज़में न हो…
लफ़्ज़ोंमें फ़र्क़ हो,
मग़र आवाज़में न हो……
मंज़र लख़नवी
11490
ख़िरदवालोंसे हुस्न ओ इश्क़क़ी,
तन्क़ीद क़्या होग़ी…
न अफ़्सून-ए-निग़ह समझा,
न अंदाज़-ए-नज़र ज़ाना……
असरार-उल-हक़ मज़ाज़
ख़िरदवालोंसे हुस्न ओ इश्क़क़ी,
तन्क़ीद क़्या होग़ी…
न अफ़्सून-ए-निग़ह समझा,
न अंदाज़-ए-नज़र ज़ाना……
असरार-उल-हक़ मज़ाज़
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