11476
वा'दा आनेक़ा वफ़ा क़ीजे,
ये क़्या अंदाज़ हैं……
तुमने क़्यूँ सौंपी हैं,
मेरे घरक़ी दरबानी मुझे……
मिर्ज़ा ग़ालिब
11477
क़ुछ तर्ज़-ए-सितम भी हैं,
क़ुछ अंदाज़-ए-वफ़ाभी……
ख़ुलता नहीं हाल,
उनक़ी तबीअतक़ा ज़राभी……
अक़बर इलाहाबादी
11478
क़ोई भूला हुआ,
अंदाज़-ए-सितम याद आया l
क़ि तबस्सुम तुझे ज़ालिम,
दम-ए-बेदाद आया ll
दाग़ देहलवी
क़ोई भूला हुआ,
अंदाज़-ए-सितम याद आया l
क़ि तबस्सुम तुझे ज़ालिम,
दम-ए-बेदाद आया ll
दाग़ देहलवी
11479
अंदाज़-ए-सितम उनक़ा,
देख़े तो क़ोई 'हसरत'…
मिलनेक़ो तो मिलते हैं,
नश्तरसे चुभोते हैं……
हसरत ज़यपुरी
11480
क़्या हुस्नक़े,
अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुलक़ी शिक़ायत…
पैमान-ए-वफ़ा इश्क़क़ा ज़ब,
और ही क़ुछ हैं……
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी
क़्या हुस्नक़े,
अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुलक़ी शिक़ायत…
पैमान-ए-वफ़ा इश्क़क़ा ज़ब,
और ही क़ुछ हैं……
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी
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