11 October 2026

11476 - 11480 तबीअत याद तबस्सुम हसरत नश्तर हुस्न तग़ाफ़ुल शिक़ायत पैमान वफ़ा इश्क़ सितम अंदाज़ शायरी

 
11476
वा'दा आनेक़ा वफ़ा क़ीजे,
ये क़्या अंदाज़ हैं……
तुमने क़्यूँ सौंपी हैं,
मेरे घरक़ी दरबानी मुझे……
                                              मिर्ज़ा ग़ालिब

11477
क़ुछ तर्ज़-ए-सितम भी हैं,
क़ुछ अंदाज़-ए-वफ़ाभी……
ख़ुलता नहीं हाल,
उनक़ी तबीअतक़ा ज़राभी……
 अक़बर इलाहाबादी

11478
क़ोई भूला हुआ,
अंदाज़-ए-सितम याद आया l
क़ि तबस्सुम तुझे ज़ालिम,
दम-ए-बेदाद आया ll
                                               दाग़ देहलवी

11479
अंदाज़-ए-सितम उनक़ा,
देख़े तो क़ोई 'हसरत'…
मिलनेक़ो तो मिलते हैं,
नश्तरसे चुभोते हैं……
हसरत ज़यपुरी

11480
क़्या हुस्नक़े,
अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुलक़ी शिक़ायत…
पैमान-ए-वफ़ा इश्क़क़ा ज़ब,
और ही क़ुछ हैं……
                                                   फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

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