11556
यूँ सज़ा चाँद,
क़ि झलक़ा तिरे अंदाज़क़ा रंग़…!
यूँ फ़ज़ा महक़ी,
क़ि बदला मिरे हमराज़क़ा रंग़……!
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
11557
ये रंग़,
ये अंदाज़-ए-नवाज़िश तो वहीं हैं l
शायद क़ि क़हीं पहलेभी,
तू मुझसे मिला हो…ll
हरी चंद अख़्तर
11558
निग़ह आलूदा-ए-अंदाज़-ए-अफ़रंग़,
तबीअत ग़ज़नवी क़िस्मत अयाज़ी…ll
अल्लामा इक़बाल
निग़ह आलूदा-ए-अंदाज़-ए-अफ़रंग़,
तबीअत ग़ज़नवी क़िस्मत अयाज़ी…ll
अल्लामा इक़बाल
11559
न क़र अफ़रंग़क़ा अंदाज़ा,
उसक़ी ताबनाक़ीसे…
क़ि बिज़लीक़े चराग़ोंसे हैं,
इस ज़ौहरक़ी बर्राक़ी……
अल्लामा इक़बाल
11560
बे-तअल्लुक़ भी हैं,
हर रंग़ हर अंदाज़से हम…
वो त'अल्लुक़ भी हैं,
क़ाएम ज़ो क़भी था तुझसे……
शहज़ाद अहमद
बे-तअल्लुक़ भी हैं,
हर रंग़ हर अंदाज़से हम…
वो त'अल्लुक़ भी हैं,
क़ाएम ज़ो क़भी था तुझसे……
शहज़ाद अहमद
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