11501
अंदाज़ हैं या,
ज़ज़्बा-ए-ग़रदूँ-ज़दनी हैं…
आवाज़ हैं या,
बरबत-ए-ईमाँ-शिक़नी हैं…?
ज़ोश मलीहाबादी
11502
लयमें डूबी हुई,
मस्तीभरी आवाज़क़े साथ…
छेड़ दे क़ोई ग़ज़ल,
इक़ नए अंदाज़क़े साथ……
11503
तुझे ज़ब देख़ता हूँ,
तो ख़ुद अपनी याद आती हैं…
मिरा अंदाज़ हँसनेक़ा,
क़भी तेरे ही ज़ैसा था ll
मनीश शुक्ला
तुझे ज़ब देख़ता हूँ,
तो ख़ुद अपनी याद आती हैं…
मिरा अंदाज़ हँसनेक़ा,
क़भी तेरे ही ज़ैसा था ll
मनीश शुक्ला
11504
रोते रोते मिरे हँसनेपें,
तअज्जुब न क़रो ;
हैं वहीं चीज़ मग़र,
दूसरे अंदाज़में हैं…!
इब्राहीम होश
11505
उसक़े हँसनेमें, रोनेक़ा अंदाज़ हैं ;
ख़ाक़ उड़ानेमें, फ़रियादक़ा राज़ हैं l
उसक़ो छेड़ो न, 'अनवर' ख़ुदाक़े लिए,
वर्ना बीमारक़ा दम निक़ल ज़ाएग़ा ll
अनवर मिर्ज़ापुरी
उसक़े हँसनेमें, रोनेक़ा अंदाज़ हैं ;
ख़ाक़ उड़ानेमें, फ़रियादक़ा राज़ हैं l
उसक़ो छेड़ो न, 'अनवर' ख़ुदाक़े लिए,
वर्ना बीमारक़ा दम निक़ल ज़ाएग़ा ll
अनवर मिर्ज़ापुरी
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