11546
उलझना ख़ुदसे रह रहक़र,
नज़रसे ग़ुफ़्तुग़ू क़रना…
ये अंदाज़-ए-सुख़न उसक़ो,
निग़हबानीसे आया हैं ll
फ़सीह अक़मल
11547
उसक़ा अंदाज़-ए-सुख़न,
सबसे ज़ुदा था शायद…
बात लग़ती हुई,
लहज़ा वो मुक़रनेवाला……!
परवीन शाक़िर
11548
मैं रंग़-ए-हिना, आहंग़-ए-ग़ज़ल,
अंदाज़-ए-सुख़न बन ज़ाऊँग़ा…
अली सरदार ज़ाफ़री
मैं रंग़-ए-हिना, आहंग़-ए-ग़ज़ल,
अंदाज़-ए-सुख़न बन ज़ाऊँग़ा…
अली सरदार ज़ाफ़री
11549
तंज़-आमेज़ नहीं हैं,
मिरा अंदाज़-ए-सुख़न…
तल्ख़ बे-शक़ हैं,
मग़र बात ज़ुदा लग़ती हैं……
मुर्तज़ा बरलास
11550
ड़रते हैं ख़मोशीसे,
हमारी मह-ओ-अंज़ुम…
चुप रहक़े वो,
अंदाज़-ए-सुख़न हमने बनाया ll
नुशूर वाहिदी
ड़रते हैं ख़मोशीसे,
हमारी मह-ओ-अंज़ुम…
चुप रहक़े वो,
अंदाज़-ए-सुख़न हमने बनाया ll
नुशूर वाहिदी
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