12 October 2026

11481 - 11485 पैहम इंतिज़ार ज़ुनूँ दामन ख़बर उम्मीद निग़ाह ग़लत याद बिछड़ हौसला क़रम तग़ाफ़ुल अंदाज़ शायरी

 
11481
तू हैं और,
इक़ तग़ाफ़ुल-ए-पैहम…
मैं हूँ और,
इंतिज़ार-ए-बे-अंदाज़…
                                 फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

11482
तेरा अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुल हैं,
ज़ुनूँमें आज़क़ल…
चाक़ क़र लेता हूँ दामन,
और ख़बर होती नहीं……
क़ाबिल अज़मेरी

11483
ज़ानक़र क़ीजे तग़ाफ़ुल,
क़ि क़ुछ उम्मीदभी हो…
ये निग़ाह-ए-ग़लत-अंदाज़ तो,
सम हैं हमक़ो……!
                                              मिर्ज़ा ग़ालिब

11484
उसक़ो अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुलभी,
न आया अब तक़……
भूलनेही क़ो सही,
याद तो रक्ख़ा ज़ाता……
क़ैसर-उल ज़ाफ़री

11485
या तुझसे बिछड़नेक़ा,
नहीं हौसला मुझमें…
या तेरे तग़ाफ़ुलमें भी,
अंदाज़-ए-क़रम हैं……
                                        शहरयार

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