अंदाज़ मुझसे और हैं,
दुश्मनसे और ढंग़…
पहचान मुझक़ो अपनी,
पराई क़ज़ाक़ी हैं……
बेख़ुद देहलवी
11572
सुधर गये तो,
तुमही बहुत पछताओग़े l
ये शायराना अंदाज़ही,
तो मेरी पहचान हैं ll
11573
मंज़िलें ग़र्दक़े मानिंद उड़ी ज़ाती हैं…l
मंज़िलें ग़र्दक़े मानिंद उड़ी ज़ाती हैं…l
वहीं अंदाज़-ए-ज़हान-ए-ग़ुज़राँ हैं क़ि ज़ो था…ll
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी
11574
क़भी तू नाराज़ क़भी मैं नाराज़,
उफ्फ ये मोहब्बत उफ्फ ये अंदाज़…
11575
मेरा अंदाज़ 'नसीर',
मेरा अंदाज़ 'नसीर',
अहल-ए-ज़हाँसे हैं ज़ुदा...
सब में शामिल हूँ,
सब में शामिल हूँ,
मग़र सबसे अलग़ बैठा हूँ ...ll
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर ग़ीलानी
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर ग़ीलानी