10 September 2017

1726 -1730 दिल जिंदगी दुनियाँ आँख आँसू साथ दर्द ठोकर याद जुल्फ उलझन बात शायरी


1726
आँखोंसे आँसू न निकले,
तो दर्द बढ़ जाता हैं,
उसके साथ बिताया हुआ,
हरपल याद आता हैं.......

1727
मुझे रहने दो अब,
अपनी जुल्फोमें;
इनकी उलझने,
जिंदगीसे बहोत कम हैं...!
1728
न कहा करो हर बार,
की हम छोड़ देंगे तुमको...
न हम इतने आम हैं,
न ये तेरे बसकी बात हैं…!!!

1729
तुम्हीं बताओ,
तुम्हारा हैं इंतिज़ार क़िसे…
तुम्हारी याद,
सताती हैं बार बार क़िसे…?
असद रिज़वी

1730
दुनियाँकी हर चीज…
ठोकर लगनेसे टूट जाया करती हैं;
एक कामयाबी ही हैं,
जो ठोकर खाके ही मिलती हैं . . . !

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