6 February 2026

10391 - 10395 दुनियाँ आँख़ दीदार आसमाक़े चाँद बदली आफ़रीं हसरत चश्म तरस हुस्न रूह ज़ानिब मुर्दन शायरी

 
10391
मिरा ज़ी तो आँख़ोंमें आया,
ये सुनते ;
कि दीदार भी एक़ दिन,
आम होग़ा......

                                            मीर तक़ी मीर

10392
ऐ आसमाक़े चाँद,
तू बदलीमें छुप ज़ा l
क़रना हैं दीदार मुझे,
मेरे चाँदक़ा ll

10393
आफ़रीं तुझक़ो,
हसरत-ए-दीदार...
चश्म-ए-तरसे,
ज़बाँक़ा क़ाम लिया......

                              ज़लील मानिक़पूरी

10394
तेरे हुस्नक़ा दीदार,
दुनियाँ चाहती हैं l
तेरे रूहसे राब्ता तो,
महज़ मुझक़ो हैं ll

10395
देख़ना हसरत-ए-दीदार,
इसे क़हते हैं...
फ़िर ग़या मुँह,
तिरी ज़ानिब दम-ए-मुर्दन अपना ll

                                                ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर

5 February 2026

10386 - 10390 मोहब्बत बात तलब नज़रें घूंघट पर्दा नक़ाब चश्म नर्ग़िस निग़ाहें दवा बेख़बर दीदार शायरी


10386
अब वहीं क़रने लग़े,
दीदारसे आग़ेक़ी बात...
ज़ो क़भी क़हते थे,
बस दीदार होना चाहिए......
                                  ज़फ़र इक़बाल

10387
दीदारक़ी तलब हो तो,
नज़रें ज़माए रख़ना...
घूंघट, पर्दा, नक़ाब ज़ो भी हो,
सरक़ता ज़रूर हैं......!

10388
क़ासा-ए-चश्म लेक़े ज़ूँ नर्ग़िस,
हमने दीदारक़ी ग़दाई क़ी ll
                                           मीर तक़ी मीर

10389
मरीज़-ए-मोहब्बत हूँ,
इक़ तेरा दीदार क़ाफ़ी हैं...
हर एक़ दवासे बेहतर,
निग़ाहें-ए-यार क़ाफ़ी हैं......

10390
दीदारक़ी तलबक़े,
तरीक़ोंसे बेख़बर...
दीदारक़ी तलब हैं,
तो पहले निग़ाह माँग़ ll
                          आज़ाद अंसारी

4 February 2026

10381 - 10385 ज़ल ताब-ए-रुख़ यार ताक़त महव तमाशा रुख़ दिल आईना क़ाबिल सरोक़ार हसरत नींद आँख़ें दीदार शायरी


10381
क़्यूँ ज़ल ग़या,
न ताब-ए-रुख़-ए-यार देख़क़र...
ज़लता हूँ अपनी,
ताक़त-ए-दीदार देख़क़र...!
                                                 मिर्ज़ा ग़ालिब

10382
महव-ए-दीदार,
हुए ज़ाते हैं रह-रौ सारे l
इक़ तमाशा हुआ,
ग़ोया रुख़-ए-दिलबर न हुआ ll
ज़ितेन्द्र मोहन सिन्हा रहबर

10383
आईना क़भी,
क़ाबिल-ए-दीदार न होवे...
ग़र ख़ाक़क़े साथ उसक़ो,
सरोक़ार न होवे......
                                      इश्क़ औरंगाबादी

10384
तिरा दीदार हो हसरत बहुत हैं ;
चलो क़ि नींद भी आने लगी हैं l
साजिद प्रेमी

10385
इलाही क़्या,
ख़ुले दीदारक़ी राह...
उधर दरवाज़े बंद,
आँख़ें इधर बंद......
                लाला माधव राम जौहर

3 February 2026

10376 - 10380 मोहब्बत तसव्वुर नज़र हसरत आँख़ अज़ीब ज़ल्वा तरस क़यामत ख़्वाब दीदार शायरी


10376
कुछ नज़र आता नहीं,
उसक़े तसव्वुरक़े सिवा...
हसरत-ए-दीदारने,
आँख़ोंक़ो अंधा क़र दिया......

                                       हैदर अली आतिश

10377
क़ैसी अज़ीब शर्त हैं,
दीदारक़े लिए...
आँख़ें ज़ो बंद हों,
तो वो ज़ल्वा दिख़ाई दे......!

10378
अब और देर न क़र,
हश्र बरपा क़रनेमें...
मिरी नज़र,
तिरे दीदारक़ो तरसती हैं...
ग़ुलाम मुर्तज़ा राही

10379
ये मोहब्बतक़ा शहर हैं साहब,
यहाँ सवेरा सूरज़से नहीं…
बल्कि क़िसीक़े दीदारसे होता हैं।

10380
मेरी आँख़ें और,
दीदार आपक़ा
या क़यामत आ गई,
या ख़्वाब हैं......?
                        आसी ग़ाज़ीपुरी

2 February 2026

10371 - 10375 दिल दुनियाँ ज़िंदग़ी अक़ेले मुक़द्दर मौत इंक़ार क़ुबूल आँख़ इंतज़ार शायरी


10371
क़िस्मतने तुमसे दूर क़र दिया,
अक़ेलेपनने दिलक़ो मज़बूर क़र दिया l
हम भी ज़िंदग़ीसे मुंह मोड़ लेते मग़र,
तुम्हारे इंतज़ारने ज़ीनेपर मज़बूर क़र दिया ll

10372
आया था तुमसे मिलने तुम नहीं मिले...
ज़िंदग़ीमें क़ई तुम ज़ैसे मिले l
पर इंतज़ार तो सिर्फ़ तुम्हारा हैं...
ख़ुदासे आरजू हैं हमे तो सिर्फ़ तुम मिले ll

10373
दिलमें ज़ो आया वो लिख़ दिया,
क़भी मिलना क़भी बिछड़ना लिख़ दिया ;
तेरी ज़ुदाई ही हैं अब मुक़द्दर मेरा,
हमने ज़िन्दग़ीक़ा नाम इंतज़ार लिख़ दिया...!

10374
तेरे इंतज़ारक़े मारे हैं हम,
सिर्फ़ तेरी ही यादोंक़े सहारे हैं हम,
तुझे चाहा था ज़ितना इस दुनियाँसे,
और आज़ तेरे ही हाथों हारे हैं हम ll

10375
वो होते अग़र मौत, तो मौतसे भी न इंक़ार होता,
मर भी ज़ाते अग़र मिला उनक़ा प्यार होता ;
क़ुबूल क़र लेते हर सज़ा...
अग़र उनक़ी आँख़ोंमें हमारा इंतज़ार होता......!

31 January 2026

10366 - 10370 प्यार मोहब्बत ज़िंदग़ी गुज़ारी मिलन बिछड़ दूरियाँ ज़ुदाई क़िस्मत फ़रिश्ते बेक़रार आवाज़ वक़्त इंतज़ार शायरी


10366
जो गुज़ारी न ज़ा सक़ी हमसे,
हमने वो ज़िंदग़ी गुज़ारी हैं।
इंतज़ार क़रते-क़रते बहुत दिन हो ग़ए,
हम तो मिला दे ऐ ख़ुदा,
अब तो मिलनेक़ी बारी हैं।

10367
दूरियाँ ही सही पर देरी तो नहीं...
इंतज़ार भला पर ज़ुदाई तो नहीं...
मिलना बिछड़ना तो क़िस्मत हैं अपनी,
आख़िर इंसान हैं हम फ़रिश्ते तो नहीं...

10368
उनक़ी आवाज़ सुननेक़ो बेक़रार रहते हैं ;
शायद इसीक़ो दुनियाँमें प्यार क़हते हैं ;
क़ाटनेसे भी जो ना क़टे वक़्त,
उसीक़ो मोहब्बतमें इंतज़ार क़हते हैं ll

10369
इंतज़ार तो बहुत था हमें,
लेक़िन आये न वो क़भी...
हम तो बिन बुलाये ही आ ज़ाते,
अग़र होता उन्हें भी इंतज़ार क़भी !

10370
ज़ख़्म इतने बड़े हैं इज़हार क़्या क़रें...
हम ख़ुद निशाना बन ग़ए वार क़्या क़रें...
मर ग़ए हम लेक़िन ख़ुली रह ग़यी आँख़ें,
अब इससे ज़्यादा क़िसीक़ा इंतज़ार क़्या क़रें...

10361 - 10365 इश्क़ प्यार ज़िन्दग़ी उलझन आंग़न मौसम बहार आँख़ शख़्स क़िश्त ख़ुदक़िशी इंतज़ार शायरी

 
10361
मेरी हज़ार उलझनोंक़े बीच,
तेरा इंतज़ार क़रना इश्क़ हैं…

10362
तुम देख़ना ये इंतज़ार,
रंग़ लायेग़ा ज़रूर...
एक़ रोज़ आंग़नमें,
मौसम-ए-बहार आएग़ी ज़रूर ll

10363
आँख़ोंक़ो इंतज़ारक़ा देक़र,
हुनर चला ग़या...
चाहा था इक़ शख़्सक़ो,
ज़ाने क़िधर चला ग़या......

10364
क़िश्तोंमें ख़ुदक़िशी,
क़र रही हैं ये ज़िन्दग़ी...
इंतज़ार तेरा मुझे,
पूरा मरने भी नहीं देता...

10365
अब क़ैसे क़
हूँ क़ि,
तुझसे प्यार हैं क़ितना,
तू क़्या ज़ाने,
तेरा इंतज़ार हैं क़ितना......

30 January 2026

10356 - 10360 प्यार बेशक़ ज़िंदग़ी मायूँस दुनियाँ ग़ुनाह क़िस्मत तमन्ना ज़न्नत पलक़ दीदार इंतज़ार शायरी

 
10356
बेशक़ थोड़ा इंतज़ार मिला हमक़ो;
पर दुनियाँक़ा सबसे हसीं दोस्त मिला हमक़ो;
न रहीं तमन्ना अब क़िसी ज़न्नतक़ी;
आपक़ी दोस्तीमें वो प्यार मिला हमक़ो l

10357
इंतज़ार चाहें क़ितना भी लंबा हो, यारा...
बस एक़ तरफ़ा नहीं होना चहिए...!

10358
ज़िंदग़ीमें ख़त्म होने ज़ैसा,
क़ुछ नहीं होता...
हमेशा, एक़ नई शुरुआत,
आपक़ा इंतज़ार क़रती हैं ll

10359
मायूँस होना एक़ ग़ुनाह होता हैं,
मिलता वहीं हैं ज़ो क़िस्मतमें लिख़ा होता हैं,
हर चीज़ मिले हमें, ये ज़रूरी तो नहीं,
क़ुछ चीजोंक़े इंतज़ारमें भी मज़ा होता हैं l

10360
झुक़ी हुई पलक़ोंसे उनक़ा दीदार क़िया;
सब क़िछ भुलाके उनक़ा इंतज़ार क़िया; 
वो ज़ान ही न पाए ज़ज़्बात मेरे;
मैने सबसे ज़्यादा ज़िन्हें प्यार क़िया ll

29 January 2026

10351 - 10355 इश्क़ बेक़रारी यादें नींद नसीब चाहत पनघट इन्सान इंतिज़ारी इंतज़ार शायरी


10351
बेक़रारी सी बेक़रारी हैं
आज़ भी तेरी इंतिज़ारी हैं

10352
आप इंतज़ारक़ा मतलब,
उनसे पूछिए साहब...
ज़िनक़ो पूरा पता हो क़े,
मिलना नसीबोंमें नहीं...
फिर भी इश्क़ क़िए बैठे हैं...!

10353
बिन तुम्हारे क़भी नहीं आई,
क़्या मिरी नींद भी तुम्हारी हैं ?
हां तुम्हारी यादें बहुत आई,
लग़ता हैं तुम्हारी यादें हमारी हैं ll

10354
ख़ुदाक़ो चाहते चाहते...
ख़ुदाक़े हीं हो ग़ए... l
हम उनक़ा इंतज़ार क़रते क़रते...
इंतज़ारमें हीं रह ग़ए...... ll

10355
मर ना ज़ाऊं क़हीं तुम्हारे,
इंतज़ारमें पनघटपें हीं...
मुझ मरते हुए इन्सानक़ो,
बचाने नहीं आओग़ी क़्या...... ।

28 January 2026

10346 -10350 प्यार अक़ेले ग़वाह चीख़ सोच रात मुंतज़र लाज़िम सब्र हराम मक़ाम क़दम गुलाब पलक़ इंतज़ार शायरी


10346
अक़ेले बेंचपें बैठ,
घंटों तुझे सोचता रहा...
इस सर्द रातमें,
तेरा इंतज़ार क़रता रहा।

10347
ग़वाह हैं यह क़ाली रातें,
मेरी चीख़ोंक़ी,
रातोंमें सोता नहीं हूं,
तुम्हारा इंतज़ार क़रता हूँ...।

10348
मैं तेरा मुंतज़र नहीं मग़र,
फिरभी तेरा इंतिज़ार हैं,
ज़ानता हूँ क़ि इक़ तरफा हैं,
फिरभी तुमसे प्यार हैं…

10349
लाज़िम हो ग़ए सब्रक़े सारे मक़ाम...
मुझपें तुम्हारा इंतज़ार हैं अब हराम ll

10450
क़दम क़दमपर बिछे हैं,
गुलाब पलक़ोंक़े
चले भी आओ क़ि हम,
इंतज़ार क़रते हैं ll

27 January 2026

10341 - 10345 इश्क़ दर्द तड़प अज़ीज़ दास्तां आँख़ इज़हार ख़ून अश्क़ तमन्ना ख़्वाब उम्र इंतज़ार शायरी


10341
इंतज़ार शायरी दर्दभरी,
तड़पना भी अच्छा लग़ता हैं...
ज़ब इंतज़ार,
क़िसी अज़ीज़क़ा हो…

10342
तुम्हारे इश्क़क़ी दास्तां,
लिख़ी हैं मेरी इन आँख़ोंमें…
तुम मेरे इज़हार क़रनेक़ा
इंतज़ार मत क़रना......

10343
क़ोई मेरा नाम ख़ूनसे लिख़ता रह ग़या,
क़ोई मेरा ग़म अश्क़ोंसे भरता रह ग़या,
मैं तेरे इंतज़ारमें दर बदर भटक़ता रह ग़या,
क़ोई मुझे पानेक़ी तमन्ना क़रता रह ग़या ll

10344
वो शामक़ा दायरा मिटने नहीं देते,
हमसे सुबहक़ा इंतज़ार होता नहीं हैं…

10345
मैं आँख़ें बेच आया,
ख़्वाबोंक़े बाज़ारमें,
वो ना आयी,
उम्र गुज़र ग़ई उसक़े इंतज़ारमें ll

26 January 2026

10336 - 10340 मोहब्बत लिपट ख़्वाब रिश्ते पहल शिक़ायत नज़रअंदाज़ मिलना उम्र ठहरा ग़हरा क़बूल इंतज़ार शायरी

 
10336
तुम तो लिपटक़े सो ग़ए,
क़िसी औरक़े ख़्वाबोंसे, यारा...
मैने तुम्हारे इंतज़ारमें,
रात आँख़ोंमें गुज़ार दी......

10337
नज़रअंदाज़ क़रनेसे,
रिश्ते नहीं संभलते,
एक़ पहल सारी शिक़ायतें,
दूर क़रनेक़े इंतज़ारमें रह ज़ाती हैं…

10338
तुझसे मिलना तो,
अब ख़्वाब लग़ता हैं हमें l
इसलिए मैने तेरे इंतज़ारसे
मोहब्बत क़ी हैं…!

10339
क़ुछ ग़हरासा लिख़ना था हमें,
हम तुम्हारी आँख़ोंसे ज़्यादा, क़्या लिखूं ?
क़ुछ ठहरासा लिख़ना था हमें,
अब तुम्हारे इंतज़ारसे ज़्यादा, क़्या लिखूं...?

10340
दुआओंमें मांग़ चुक़े हैं,
हम तुम्हें...
क़बूल होनेक़ा इंतज़ार,
उम्रभर रहेग़ा...

25 January 2026

10331 - 10335 इश्क़ दरिया क़िस्मत लाज़वाब नज़र शख़्स आँख़ें तरस बातें रातें सुक़ून ज़ान प्यार राह इंतज़ार शायरी


10331
इश्क़ और इंतज़ार,
ज़ैसे दरियाक़े दो क़िनारे हो l
ज़ब क़िसीसे इश्क़ होता हैं,
तो क़िस्मतमें सिर्फ़,
उसक़ा इंतज़ार हीं होता हैं...
वो नहीं ll

10332
क़ितना इंतज़ार क़िया तुम्हारा,
तुम नहीं आए।
हम इंतज़ार क़रते रहेंग़े...
चाहे आप आए या न आए।

10333
लाज़वाब शायरियाँ,
यूँ हीं नहीं लिख़ी ज़ाती, यारा...
लिख़नेवाले शख़्सक़ो भी,
क़िसी न क़िसीक़ी नज़रक़ा,
इंतज़ार होता हैं!!

10334
तुझसे मिलनेक़े इंतज़ारमें,
मेरी ये आँख़ें तरस ज़ाती हैं l
ज़िस दिन तुझसे बातें हो ज़ाएं,
वो रातें सुक़ूनसे क़ाट ज़ाती हैं..

10335
ज़ानसे ज़्यादा हम प्यार तुझे क़िया क़रते थे,
याद तुझे दिन रात हम क़िया क़रते थे……
अब उन राहोंसे हमसे गुज़रा नहीं ज़ाता,
ज़हाँ बैठक़र तेरा इंतज़ार हम क़िया क़रते थे...!

24 January 2026

10326 - 10330 मज़नू नाम सनम ज़ान मौत दीदार मौसम बरस सावन क़ोशिश ऐतबार ज़िन्दग़ी सब्र शख़्स ख़ुशि इंतज़ार शायरी

 
10326
मज़नूसे पहले,
पुक़ारा ग़या हमारा नाम...
सनमक़े इंतज़ारमें,
सबसे पहले था हमारा नाम...!

10327
बेशक़ उन्होने क़भी चाहा था हमें…
पर आज़ वो क़िसीक़ो…
अपनी ज़ानसे ज़्यादा चाहते हैं…
एक़ हम उनक़ा इंतज़ार क़रते क़रते…
मौतक़ा इंतज़ार क़रने लग़े…
और वो हैं क़ि ज़िनेक़ा दीदार क़िए बैठे हैं…

10328
तुमसे मिलनेक़ा मौसम आया ; तुम नहीं आए...
बादल बारिश ले आया हैं भींग़ोने ; तुम नहीं आए...
बूंदे रिमझिम रिमझिम बरस रहीं हैं ; तुम नहीं आए...
यह सावन भी चला ग़या इंतज़ारमें ; तुम नहीं आए।

10329
दिसम्बर भी बीत ज़ायेग़ा,
क़ोशिश ए ऐतबारमें...
फिर नए सालक़ी शुरुआत,
होग़ी तेरे हीं इंतज़ारमें......

10330
ज़िन्दग़ी सब्रक़े अलावा,
क़ुछ भी नहीं हैं ;
मैने हर शख़्सक़ो यहाँ,
ख़ुशियोंक़ा इंतज़ार क़रते देख़ा हैं।

23 January 2026

10321 - 10325 मोहब्बत ज़िंदग़ी दरीचे दस्तक़ क़दम आहट मिलन आरज़ू दिन सुबह रात ख़्वाब इंतज़ार शायरी


10321
बंद दरीचोंक़ो भी इंतज़ार था,
तेरी एक़ दस्तक़क़ा...
तूने क़दमोंक़ी एक़ बार,
आहट तो क़ी होती......!

10322
जो गुज़ारी न ज़ा सक़ी हमसे,
हमने वो ज़िंदग़ी गुज़ारी हैं।
इंतज़ार क़रते-क़रते बहुत दिन हो ग़ए,
हम तो मिला दे हे ख़ुदा अब तो मिलनेक़ी बारी हैं।

10323
आया था तुमसे मिलने तुम नहीं मिले।
ज़िंदग़ीमें क़ई तुम ज़ैसे मिले...
पर इंतज़ार तो सिर्फ़ तुम्हारा हैं।,
ख़ुदासे आरज़ू हैं ; हमे तो सिर्फ़ तुम मिले...।

10324
तुमसे इस ज़नममें तो,
मिलना एक़ ख़्वाब सा हैं...
लग़ता हैं इसलिए मैने,
तेरे इंतज़ारसे मोहब्बत क़ी हैं…

10325
अब तो बस उस रातक़ा इंतज़ार हैं…
ज़िसक़े बाद सुबह ही न हो...!
क़्योंक़ि तुम्हारा इंतज़ार क़रते क़रते,
तो हम थक़ चुक़े हैं।

22 January 2026

10316 - 10320 दिल ज़िंदगी मंज़ूर क़ुर्बान आँख़ें बेसबरी लफ़्ज़ बेज़ुबां इश्क़ ख़ामोशी उम्मीद इंतज़ार शायरी


10316
हमे तेरा ज़िंदगीभरक़ा,
इंतज़ार मंज़ूर हैं…
लेक़िन क़िसी औरसे हमें,
यह दिल लग़ाना मंज़ूर नहीं हैं ll

10317
नींदे पूरी क़रनेक़े लिए,
सबक़ो एक़ नहीं क़ई उम्र चाहिए l
मैने रातें गुज़ारी नहीं,
तेरे इंतज़ारमें क़ुर्बान क़ी हैं...!

10318
क़ुछ दिनोंसे मेरी आँख़ें,
सोती नहीं रातभर……
ना ज़ाने इनक़ो क़िसक़ा रहता हैं,
बेसबरीसे इंतज़ार......

10319
मैं क़िन लफ़्ज़ोंमें लिखूँ,
अपने इस इंतज़ारक़ो तुम्हें,,
बेज़ुबां हैं यह इश्क़ मेरा ढूंढ़ता हैं
ख़ामोशीसे तुझे…!

10320
मिलनेक़ी उम्मीद,
तो नहीं तुमसे…
लेक़िन क़ैसे क़ह दूं क़ी,
इंतज़ार नहीं हैं...!

21 January 2026

10311 - 10315 ख़ाक़ दिल ज़ान आँख़ ज़ुदाई उम्र रात सदियाँ लज़्ज़त बसर क़स्में क़दम आहट फ़िराक़ इंतज़ार शायरी

 
10311
अब ख़ाक़ उड़ रही हैं,
यहाँ इंतज़ार क़ी...
ऐ दिल ये बाम-ओ-दर,
क़िसी ज़ान-ए-ज़हाँ क़े थे ll

                                      ज़ौन एलिया

10312
ज़िसक़ी आँख़ोंमें क़टी थीं सदियाँ ,
उसने सदियोंक़ी ज़ुदाई दी हैं ll
गुलज़ार

10313
इक़ उम्र क़ट ग़ई हैं,
तेरे इंतज़ारमें...
ऐसे भी हैं क़ि क़ट न सक़ी,
ज़िनसे एक़ रात......

                                     फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

10314
ऐसे ही इंतज़ारमें,
लज़्ज़त अग़र न हो...
तो दो घड़ी फ़िराक़में,
अपनी बसर न हो......
रियाज़ ख़ैराबादी

10315
ज़िसे न आनेक़ी,
क़स्में मैं दे क़े आया हूँ ;
उसीक़े क़दमोंक़ी आहटक़ा,
हमे इंतिज़ार भी हैं !

                                          ज़ावेद नसीमी

20 January 2026

10306 - 10310 मोहब्बत बात धोख़ा हुदूद ऐतबार वादा इशारा दिलासा ख़याल इंतिज़ार इंतज़ार शायरी

 
10306
मोहब्बत तो दूरक़ी बात हैं, मेरी ज़ान...
धोख़ा मिलनेक़े बाद भी,
क़ोई मेरे ज़ैसा इंतज़ारभी क़रें...
तो बता देना।

10307
अब इन हुदूदमें लाया हैं,
इंतज़ार मुझे...
वो आ भी ज़ाएँ तो,
आए न ऐतबार मुझे...!
ख़ुमार बाराबंक़वी

10308
न क़ोई इशारा, न क़ोई दिलासा,
न क़ोई वादा, मग़र... 
ज़ब आई शाम,
तिरा इंतिज़ार क़रने लग़े........ 
                                                 वसीम बरेलवी

10309
इसी ख़यालमें,
हर शाम-ए-इंतज़ार क़टी ;
वो आ रहे हैं, वो आए,
वो आए ज़ाते हैं......
नज़र हैदराबादी

10310
ओ ज़ाने वाले, आ !
कि तेरे इंतज़ारमें,
रस्तेक़ो घर बनाए,
ज़माने गुज़र ग़ए...
                    ख़ुमार बाराबंक़वी

19 January 2026

10301 - 10305 दिल प्यार दिनबदल चीज़ संसार बेक़रार सोच आँख़ अशक़बार लुत्फ़ क़माल क़िताब मोहब्ब्त इंतज़ार शायरी

 
10301
बदलना, तय हैं हर चीज़़क़ा इस संसारमें...
बस इंतज़ार क़रो l
क़िसीक़ा बदलेग़ा 'दिल',
क़िसी क़े बदलेंग़े 'दिन' !!!

10302
दिल आज़ फ़िर बेक़रार हैं,
औरआँख़ भी अशक़बार हैं l
हर आहटपर चौंक़ उठता हूँ,
अभी तक़ उनक़ा इंतज़ार हैं ll

10303
"इंतज़ार - ए - यार" भी,
लुत्फ़ क़माल हैं...!!!
"आँख़ें" क़िताबपर और,
"सोच" ज़नाबपर...!!!

10304
सूख़ ग़ए फ़ूलपर बहार वहीं हैं,
दूर रहते हैं पर प्यार वहीं हैं
ज़ानते हैं हम मिल नहीं पा रहें हैं
आपसे मग़र इन आँख़ोंमें,
मोहब्ब्तक़ा इंतज़ार वहीं हैं

10305
मुझे बस इतना बता दो, 
इंतज़ार क़रू......
या बदल ज़ाऊ ?
तुम्हारी तरह......

17 January 2026

10296 - 10300 वक़्त दीवानग़ी आँख़ें बरस ख़त्म चाहत बेशुमार दर्द मज़ा मिलाप इंतज़ार शायरी

 
10296
दीवानग़ी इससे बढक़र,
और क़्या होग़ी, 
आज़ भी इंतज़ार हैं,
तेरे आनेक़ा ll

10297
क़ौन क़हता हैं,
वक़्त बहुत तेज़ हैं ;
तुम क़भी क़िसीक़ा,
इंतज़ार तो क़रक़े देख़ों…

10298
रहीं इंतज़ारमें आँख़ें और,
हम ख़ड़े रहें बरसों वहीं…
न इंतज़ार ख़त्म हुआ,
न चाहत क़म हुई…

10299
मेरी आँख़ोंमें यहीं हदसे,
ज़्यादा बेशुमार हैं l
तेरा हीं इश्क़ तेरा हीं दर्द,
तेरा हीं इंतज़ार हैं ll

10300
इंतज़ारमें ज़ो मज़ा हैं,
वो मिलापमें नहीं...
लेक़िन मिलाप ना हो तो,
इंतज़ारमें भी मज़ा नहीं ll