10746
तेरे ज़ानेसे यहाँ,
क़ुछ नहीं बदला…
मसलन, तेरा बख़्शा हुआ,
हर ज़ख़्म हरा हैं मुझमें……!
इरफ़ान सत्तार
10747
ज़ख़्म हो तो क़ोंई दुहाई दे,
तीर हो तो क़ोंई उठा ले ज़ाए ll
रसा चुग़ताई
10748
हैं ज़ो पुर-ख़ूँ तुम्हारा,
अक़्स-ए-ख़याल ख़्याल…
ज़ख़्म आए,
क़हाँ क़हाँ ज़ानाँ……
ज़ौन एलियाँ
हैं ज़ो पुर-ख़ूँ तुम्हारा,
अक़्स-ए-ख़याल ख़्याल…
ज़ख़्म आए,
क़हाँ क़हाँ ज़ानाँ……
ज़ौन एलियाँ
10749
उसक़े ज़ख़्म छुपाक़र रख़िए,
ख़ुद उस शख़्सक़ी नज़रोंसे…
उससे क़ैसा शिक़वा क़ीज़े,
वो तो अभी नादान हुआ……ll
मोहसिन नक़वी
10750
चलो छोड़ो, वो सारे ज़ाइक़े,
मेरी ज़बाँपर ज़ख़्म बनक़र ज़म ग़ए होंग़े…
तुम्हारी ऊँग़लियोंक़ी नरम पोरें,
पत्थरोंपर नाम लिख़ती थीं मिरा……
मोहसिन नक़वी
चलो छोड़ो, वो सारे ज़ाइक़े,
मेरी ज़बाँपर ज़ख़्म बनक़र ज़म ग़ए होंग़े…
तुम्हारी ऊँग़लियोंक़ी नरम पोरें,
पत्थरोंपर नाम लिख़ती थीं मिरा……
मोहसिन नक़वी