17 November 2017

1971 - 1975 इश्क़ दिल हंग़ामा ज़िन्दगी साँस दीदार ख़ामोशी इंतज़ार इबादत खुबसूरत ख्याल धड़कन शायरी


1971
वो हंग़ामा ग़ुज़र ज़ाता उधरसे,
मग़र रस्तेमें ख़ामोशी पड़ी हैं......
                                              लियाक़त ज़ाफ़री

1972
यह इश्क हैं या इबादत...
कुछ समझ नहीं आता;
एक खुबसूरत ख्याल हो तुम...
जो दिलसे नहीं जाता...!

1973
मेरी चाहतें उनसे अलग कब हैं,
दिलकी बातें उनसे छुपी कब हैं;
वो साथ रहे दिलमें धड़कनकी जगह,
फिर ज़िन्दगीको साँसोंकी ज़रूरत कब हैं।

1974
शिकायत नहीं जिंदगीसे,
कि उनका साथ नहीं...
बस वो ख़ुश रहे,
हमारी तो कोई बात नहीं...

1975
उनको उलझाकर,
कुछ देर सवालोंमें,
हमने जी भरके उनका,
दीदार कर लिया...!!!

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