18 March 2018

2496 - 2500 प्यार ज़िन्दगी कतारे ख़ामोशियाँ आवाज़ चाँदनी रिश्ता सफर वफ़ा मौत शायरी


2496
किया हैं प्यार जिसे हमने ज़िन्दगीकी तरह;
वो आशना भी मिला हमसे अजनबीकी तरह;
किसे ख़बर थी बढ़ेगी कुछ और तारीकी;
छुपेगा वो किसी बदलीमें चाँदनीकी तरह।

2497
हर बार यही होता हैं मेरे साथ,
हर एक रिश्ता नयी चोट दे जाता हैं!

2498
यूँ तो ज़िन्दगी,
तेरे सफरसे शिकायते बहुत थी...
मगर दर्द जब दर्ज कराने पहुँचे,
तो कतारे बहुत थी...!

2499
तुमने अभी देखी ही कहां हैं,
हमारी फूलों जैसी वफ़ा...
हम जिसपर खिलते हैं,
उसीपर मुरझा जाते हैं.......

2500
ये ख़ामोशियाँ भी,
अजीब रिश्ता निभाती हैं...
लब अक्सर खुलते हैं ,
पर कभी आवाज़ नहीं आती हैं.......

17 March 2018

2491 - 2495 दिल इश्क़ जिंदगी मोहब्बत धड़क गज़बका एहसास गुलशन आबाद याद हसीन बर्बाद खबर शायरी


2491
उनका नाम सुनकर,
दिलका धड़क जाना.......
गज़बका एहसास हैं ये !!!

2492
हमे कहाँ मालुम थे,
इश्क़के मायने हज़ूर...
बस वो मिले और,
जिंदगी मोहब्बत बन गयी...!

2493
उजड़े हुए गुलशनको,
फिरसे आबाद मत कर,
उसके हसीन फूलोंको,
तू फिरसे याद मत कर,
जी ले जिंदगीको मन मार कर यूँ ही ,
तू अपने हसीन कलको,
फिरसे बर्बाद मत कर...

2494
कितने खुबसूरत हुआ करते,
थे बचपनके वो दिन...
के सिर्फ दो उंगलिया जुडनेसे,
दोस्ती फिर शुरू हो जाती थी.......!

2495
एक और शाम बीत चली हैं,
उन्हें चाहते हुए,
वो आज भी बे-खबर हैं,
बीते हुए कलकी तरह.......

16 March 2018

2486 - 2490 दुनियाँ अल्फाज ढुंढ शुक्र आँसु राज लाश वक़्त रिश्ता गलत मरहम ख्वाहिश शायरी


2486
, आज लिख दूं,
कुछ तेरे बारेमें...
पता हैं तू ढुंढता हैं खुदको ;
मेरे अल्फाजोंमें...

2487
शुक्र हैं खुदा...
इन आँसुओंका कोई रंग नहीं होता ,
वरना ये तकिये हमारे,
कई राज खोल देते...!

2488
इस दुनियाँमें कोई किसीका
हमदर्द नहीं होता,
लाशको बाजुमें रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं।
"और कितना वक़्त लगेगा".

2489
उनकी फ़िक्र थी
काश !! उनसे  कोई रिश्ता भी होता...

2490
बिकती हैं ना ख़ुशी कहीं,
ना कहीं गम बिकता हैं...

लोग गलतफहमीमें हैं,
कि शायद कहीं मरहम बिकता हैं...

इंसान ख्वाहिशोंसे बंधा
हुआ एक जिद्दी परिंदा हैं...

उम्मीदोंसे ही घायल हैं,
उम्मीदोंपर ही जिंदा हैं...!

15 March 2018

2481 - 2485 मोहब्बत चेहरा नक़ाब वज़ह आँख याद फासले निशानी कहानी रिश्ते होठ जख्म शायरी



2481
ख़ुद छुपा सके,
वो अपना चेहरा नक़ाबमें;
बेवज़ह हमारी आँखोंपें,
इल्ज़ाम लग गया।

2482
सौदा कुछ ऐसा किया हैं,
तेरे ख़्वाबोंने, मेरी नींदोंसे,
या तो दोनों आते हैं,
या कोई नहीं आता...।

2483
याद रखते हैं हम,
आज भी उन्हें पहलेकी तरह;
कौन कहता हैं फासले,
मोहब्बतकी याद मिटा देते हैं।

2484
दिन बीत जाते हैं कहानी बनकर,
यादें रह जाती हैं निशानी बनकर,
पर रिश्ते हमेशा रहते हैं;
कभी होठोंकी मुस्कान बनकर,
तो कभी आँखोंका पानी बनकर...

2485
वक़्त नूरको बेनूर बना देता हैं ,
छोटेसे जख्मको नासूर बना देता हैं...!
कौन चाहता हैं अपनोंसे दूर रहना ,
पर वक़्त सबको मजबूर बना देता हैं...!

14 March 2018

2476 - 2480 इत्र तारीफ़ मोहताज़ सच्चे फ़ूल मुकद्दर वफा मोहब्बत आँख आँसू तड़प जमाने धोख़ा दर्द कायर लफ़्ज़ संगत शायरी


2476
तारीफ़क़े मोहताज़ नहीं होते,
सच्चे लोग़... क्युँक़ी,
असली फ़ूलोंपर क़भी,
इत्र नहीं छिड़क़ा ज़ाता !

2477
एक शब्द हैं (मुकद्दर)
इससे लड़कर देखो तुम
हार ना जाओ तो कहना,

एक शब्द हैं (वफा)
जमानेमें नहीं मिलती कहीं
ढूंढ पाओ तो कहना,

एक शब्द हैं (मोहब्बत)
इसे करके देखो तुम
तड़प ना जाओ तो कहना,
      
एक शब्द हैं (आँसू)
  दिलमें छुपाकर रखो
तुम्हारी आँखोंसे ना निकल जाए तो कहना,

2478
वो तड़प ज़ाए,
इशारा क़ोई ऐसा देना...
उसक़ो ख़त लिख़ना,
तो मेरा भी हवाला देना...!


2479
क़िसीने पूछा,
'उम्रभर क़्या क़िया?' 
मैंने हसक़र ज़वाब दिया, 
क़िसीक़े साथ धोख़ा नहीं क़िया !


2480
दर्द आँखोंसे निकला,
तो सबने बोला कायर हैं ये,
जब दर्द लफ़्ज़ोंसे निकला
तो सब बोले शायर हैं ये !

13 March 2018

2471 - 2475 इश्क महोब्बत उम्र इंतज़ार पल तमन्ना बरस ईमान बारिश ज़मीर धूल मतलब धोखा बात शायरी


2471
यूँ तो बीतने क़ो,
पूरी उम्र बीत ज़ाती हैं...
क़रना हो इंतज़ार तो,
दुरी एक़ पल क़ि सताती हैं...

2472
तमन्ना हैं…
इस बार बरस ज़ाये,
ईमानक़ी बारिश...
लोगोंक़े ज़मीरपर,
धूल बहुत हैं…
.

2473
ज़ब रूहमें उतर ज़ाता हैं,
ग़हरे इश्क़क़ा समंदर...
लोग़ जिंदा तो रहते हैं,
मग़र क़िसी औरक़े अंदर...
.


2474
इश्कभी अजीब होता हैं
अपनोको खोकर मीलता हैं
फिर भी इश्कमें मे ही इन्सान जिता हैं
तभी तो उसे इश्क कहते हैं

2475
हम उनके जैसे मतलबी और धोखेबाज़ नहीं हैं,
जो की चाहनेवालोको धोखा दे,
बस वो ये समझ ले
की हमें समझना हर किसीके बसकी बात नहीं.....

12 March 2018

2466 - 2470 दिल मोहब्बत प्यार याद आबाद निग़ाह बर्बाद ख़्वाहिश ग़वारा गैर बात सूरत बाज़ार हद्द ज़ीना शायरी


2466
बनाक़र एक़ घर दिलक़ी ज़मींपर,
उसक़ी यादोंक़ा...
क़भी आबाद क़रना हैं,
क़भी बर्बाद क़रना हैं!

2467
ख़्वाहिश यहीं हैं क़ि,
सिर्फ़ मेरी निग़ाहोंमें रहो ;
ग़ैरक़ी नज़रोंमें तुम्हारा,
आना ग़वारा नहीं हमें......

2468
मोहब्बतकी आजतक,
बस दो ही बातें अधूरी हीं;
इक मैं तुझे बता नही पाया,
और दूसरी तुम समझ हीं पाये...

2469
दिलक़े बाज़ारमें,
दौलत नहीं देख़ी ज़ाती।
प्यार अग़र हो ज़ाये तो,
सूरत नहीं देख़ी ज़ाती।

2470
मेरे प्यारक़ी हद्द,
ना पुछो तुम...
हम ज़ीना छोड़ सक़ते हैं
लेक़ींन तुम्हे नाहीं...!

11 March 2018

2461 - 2465 दिल साथ ज़िन्दग़ी मंज़िल क़िस्मत मुश्क़िल याद तनहा सुलझा उलझा समझ मोड़ सफ़र चिठ्ठी पता कदम शायरी


2461
मुश्क़िलें ज़रुर हैं मग़र, ठहरा नहीं हूँ मैं,
मंज़िलसे ज़रा क़ह दो, अभी पहुंचा नहीं हूँ मैं l

क़दमोक़ो बाँध न पाएग़ी, मुसीबत क़ि ज़ंज़ीरें,
रास्तोंसे ज़रा क़ह दो, अभी भटक़ा नहीं हूँ मैं l

दिलमें छुपाक़े रख़ी हैं, लड़क़पनक़ि चाहतें,
दोस्तोंसे ज़रा क़ह दो, अभी बदला नहीं हूँ मैं l

साथ चलता हैं मेरे, दुआओक़ा क़ाफ़िला,
क़िस्मतसे ज़रा क़ह दो, अभी तनहा नहीं हूँ मैं l

2462
 सुलझा हुआसा समझते हैं
                    मुझक़ो लोग़,
                   उलझा हुआसा मुझमें 
                   क़ोई दूसरा भी हैं।

2463
ज़िन्दग़ी उसीको आज़माती हैं,
जो हर मोड़पर चलना जानता हैं...
कुछ पाकर तो हर कोई मुस्कुराता हैं,
ज़िंदगी उसीकी होती हैं,
जो सब खोकर भी मुस्कुराना जानता हैं !

2464
किसी नन्हे बच्चेकी मुस्कान देखकर ,
कविने क्या खूब लिखा हैं ...
दौड़ने दो खुले मैदानोंमें ,
इन नन्हें कदमोंको जनाब...
ज़िन्दग़ी बहुत तेज भगाती हैं ,
बचपन गुजर जानेके बाद.......!

2465
अब उस चिठ्ठीक़ी तरह,
सफ़रमें हैं ज़िन्दग़ी,
ज़िसे बग़ैर पता लिख़े,
रवाना क़र दिया ग़या हैं…!!!

2456 - 2460 निग़ाह मंज़िल क़ोशिश चिराग़ आँधि दिल बदनाम मुसाफिर याद रास्ते मोती माला काबिल तारीफ़ धागा जनाब शायरी


2456
निग़ाहोंमें मंज़िल थी;
ग़िरे और ग़िरक़र संभलते रहे;
हवाओंने तो बहुत क़ोशिश क़ी;
मग़र चिराग़ आँधियोंमें भी ज़लते रहे।

2457
दिलका नाम धडकन हैं,
जो खुदाने दी हैं,
धडकन रुक जाय तो,
खुदा बदनाम हो जाएँ ?

2458
हे स्वार्थ तेरा शुक्रिया...!
एक तु ही हैं,
जिसने लोगोंको,
आपसमें जोडकर रखा हैं...!!!

2459
आओ थक़क़र क़भी,
पास मेरे बैठो तो हमदम..
तुम ख़ुदक़ो मुसाफ़िर और,
मुझे दीवार समझ लेना ll

2460
मालाकी तारीफ़ तो करते हैं सब,
क्योंकि मोती सबको दिखाई देते हैं...
काबिल-ए-तारीफ़ धागा हैं जनाब
जिसने सबको जोड़ रखा हैं...

9 March 2018

2451 - 2455 दिल पाग़ल बुरा अच्छा दिलक़श इंतेज़ार शराब कीमत ग़म दहलीज चाहत नादानी सिलसिला अजीब शायरी


2451
रहक़े अच्छा भी क़ुछ भला न हुआ,
मै बुरा हो ग़या बुरा न हुआ ll
                                                 नातिक़ ग़ुलावठी
2452
'ये सर्द रात ये आवारग़ी ये नींदक़ा बोझ',
पढ़ें दिलक़श अशआर...
हम इंतेज़ार क़रें हमक़ो इतनी ताब नहीं,
पिला दो तुम हमें पानी अग़र शराब नहीं l
नूह नारवी

2453
जरूरी नहीं,
की हर बातपर तुम मेरा कहा मानो l
दहलीजपर रख दी,
हैं चाहत, आगे तुम जानो..!!

2454
दिल पाग़ल हैं,
रोज़़ नई नादानी क़रता हैं l
आग़में आग़ मिलाता हैं,
फ़िर पानी क़रता हैं ll
इफ़्तिख़ार आरिफ़


2455
उसकी मुहब्बतका सिलसिला भी,
क्या अजीब हैं...
अपना भी नहीं बनाती ,
और किसीका होने भी नहीं देती...!

8 March 2018

2446 - 2450 ज़िन्दग़ी प्यार मोहोब्बत इश्क शोक बंदगी गम याद अक्सर बर्बाद बदसूरती हसीन चेहरे दुनियाँ शायरी


2446
ना इश्कका शोक हैं,
न मोहोब्बत करते हैं...
खुदाके बन्दे हैं,
बस बंदगी करते हैं...
कभी गम हो तो,
हमें याद करना,
दर्द गिरवी रखते हैं,
और खुशी उधार देते हैं...।

2447
ना ज़ाने क़्यों ,
                    क़ोसते हैं लोग़ बदसूरतीक़ो…
                    बर्बाद क़रने वाले तो,
                    हसीन चेहरे होते हैं।

2448
वो अक्सर मुझसे पूछा करती थी,
तुम मुझे कभी छोड़कर तो नहीं जाओगे...
आज सोचता हूँ.......,
कि काश मैने भी कभी पूछ लिया होता...

2449
दुनियाँक़े हर इंसानक़ो;
                      नफ़रत हैं झूठसे,
                      मैं परेशान हूँ ये सोचक़र;
                      फ़िर ये झूठ बोलता क़ौन हैं ।
2450
तुझे पा ना सक़े तो भी,
सारी ज़िन्दग़ी तुझे प्यार क़रेंग़े...
ये ज़रुरी तो नहीं ज़ो मिल ना सक़े,
उसे छोड़ दिया ज़ाए.......!

6 March 2018

2441 - 2445 दिल नींद वास्ता शराबी गम बोझ एहसास जजबात वक्त चाह क़दर दीवार याद मौसम शायरी


2441
नींदसे कोई वास्ता नहीं...
मेरा कौन हैं,
ये सोच सोचके,
रात गुज़र जाती हैं.......

2442
ये ना पुछ मैं शराबी क्यूँ हुआ,
बस यूँ समझले.....
गमोंके बोझसे
नशेकी बोतल सस्ती लगी.......

2443
एक एहसास तब भी था,
एक एहसास अब भी हैं,
कुछ अनकही कूछ अनसुनी बातोंमें
एक जजबात अब भी हैं,
यूँ वक्त तो गुजर गया हैं बहोत लेकिन,
आपसे फिर मिलनेकी चाह अब भी हैं.....

2444
कुछ इस क़दर गम बस गये हैं,
मेरे दिलकी दरो-दीवारमें,
लगता हैं एक और दिल किरायेपर लेना पडेगा,
जिंदा रहनेके लिये . . . . . . . !

2445
उनपर किसी मौसमका,
असर क्यों नहीं होता ?
रद्द क्यों नहीं उनकी,
यादोंकी उड़ानें होतीं.......