16 May 2026

10816 - 10820 हाल दिल शोर क़ाएनात शब रौशन तराना चीख़ चीज़ लब ख़ामुशी ख़ामोशी शायरी


10816
शोर ज़ितना हैं क़ाएनातमें शोर,
मेरे अंदरक़ी ख़ामुशीसे हुआ ll
                                            क़ाशिफ़ हुसैन ग़ाएर

10817
शब-ए-हिज़्रां बुझा बैठी हूँ मैं,
सारे सितारेपर…
क़ोई फ़ानूस रौशन हैं,
ख़मोशीसे मेरे अंदर !

10818
मिरी प्यासक़ा तराना,
यूँ समझ न आ सक़ेग़ा l
मुझे आज़ सुनक़े देख़ो,
मिरी ख़ामोशीसे आग़े ll
                                     नीना सहर

10819 
ख़ामोशीसे ज़ब,
तुम भर ज़ाओग़े…
चीख़ लेना थोड़ा,
वरना मर ज़ाओग़े !

10820
हम लबोंसे क़ह न पाए उनसे,
हाल-ए-दिल क़भी…
और वो समझे नहीं,
ये ख़ामुशी क़्या चीज़ हैं ll
                                            निदा फ़ाज़ली

15 May 2026

10811 - 10815 दिल प्यार चेहरे फ़रेब नज़र दर्द आदत ग़ज़ल नज़्म आहिस्ते जु़बां इज़हार मोहब्बत ख़ामोश शायरी

 
10811
मेरे दिलक़ो अक्सर छू लेते हैं,
ख़ामोश चेहरे…
हंसते हुए चेहरोंमें,
मुझे फ़रेब नज़र आता हैं l

10812
अब तो आदतसी हो ग़ई हैं,
ख़ामोश रहनेक़ी…
क़भी दर्दसे, क़भी लोग़ोंसे,
क़भी ख़ुदसे!

10813 
मैं क़ोई ख़ामोशसी ग़ज़ल ज़ैसा हूँ,
या हूँ क़ोई नज़्म ज़ैसा धीमेंसे गुनगुनाता हुआ…
तभी तो वो भी मुझे पढ़ते हैं,
आहिस्ते आहिस्तेसे ll

10814
प्यारमें बहुत क़ुछ,
सहना पड़ता हैं…
क़भी-क़भी,
ख़ामोश रहना पड़ता हैं !

10815
जु़बां ख़ामोश मग़र,
नज़रोंमें उज़ाला देख़ा l
उसक़ा इज़हार-ए-मोहब्बतभी,
निराला देख़ा ll

14 May 2026

10806 - 10810 दिल पन्ना मुद्दत बिख़र सिमट तन्हाई ख़त क़हानी हादसे बात यक़ीनन ख़ामोश शायरी

 
10806
मुद्दतसे बिख़रा हूँ,
सिमटनेमें देर लग़ेग़ी…
ख़ामोश तन्हाईसे निपटनेमें देर लग़ेग़ी…
तेरे ख़तक़े हर सफ़हेक़ो,
पढ़ रहा हूँ मैं,
हर पन्ना पलटनेमें यक़ीनन देर लग़ेग़ी।

10807
अधूरी क़हानीपर,
ख़ामोश होठोंक़ा पहरा हैं l
चोट रूहक़ी हैं,
इसलिए दर्द ज़रा ग़हरा हैं !

10808
बिख़रे हैं अश्क़ क़ोई साज़ नहीं देता,
ख़ामोश हैं सब क़ोई आवाज़ नहीं देता l
क़लक़े वादे सब क़रते हैं,
मग़र क़्यूँ क़ोई साथ, आज़ नहीं देता ।

10809
हूँ अग़र ख़ामोश तो ये न समझ,
क़ि मुझे बोलना नहीं आता…
रुला तो मैं भी सक़ता था,
पर मुझे क़िसीक़ा,
दिल तोड़ना नहीं आता।

10810
क़ुछ हादसे इंसानक़ो,
इतना ख़ामोश क़र देते हैं क़ि…
ज़रूरी बात क़हनेक़ो भी,
दिल नहीं क़रता……

13 May 2026

10801 - 10805 ज़िंदग़ी बहाने बात वक़्त हालात महफ़िल रौनक़ सवाल दर्द उदास मुस्क़ुरा ख़ामोश शायरी


10801
झूठक़ी ज़ीत उसी वक़्त,
तय हो ज़ाती हैं,
ज़ब सच्चाई ज़ाननेवाला इंसान,
ख़ामोश रह ज़ाता हैं।

10802
हालातोंने क़र दिया,
हमें ख़ामोश… वरना,
हमारे रहते हर महफ़िलमें,
रौनक़ रहती थी……!

10803
उससे फ़िर उसक़ा रब,
फ़रामोश हो ग़या…
जो वक़्तक़े सवालपर,
ख़ामोश हो ग़या।

10804
क़ुछ दर्द ख़ामोश क़र देते हैं,
वरना मुस्क़ुराना क़ौन नहीं चाहता...?

10805
उदास हैं मेरी ज़िंदग़ीक़े सारे लम्हे,
एक़ तेरे ख़ामोश हो ज़ानेसे…
हो सक़े तो बात क़र लेना,
क़भी क़िसी बहानेसे…...!

12 May 2026

10796 - 10800 दोशीज़ा गुज़र ग़हरा समुंदर रात सुनसान अज़नबी वक़्त मज़ार ज़फ़ा याद ख़ामोश शायरी

 
10796
छेड़क़र ज़ैसे गुज़र ज़ाती हैं,
दोशीज़ा हवा l
देरसे ख़ामोश हैं,
ग़हरा समुंदर और मैं ll
                                          ज़ेब ग़ौरी

10797
रात सुनसान हैं,
ग़ली ख़ामोश…
फ़िर रहा हैं,
इक़ अज़नबी ख़ामोश…
नासिर ज़ैद

10798 
क़ुछ क़हनेक़ा वक़्त नहीं ये,
क़ुछ न क़हो ख़ामोश रहो l
ऐ लोग़ो ख़ामोश रहो,
हाँ ऐ लोग़ो ख़ामोश रहो ll
                                           इब्न-ए- इंशा

10799 
सबने देख़ा और,
सब ख़ामोश थे l
एक़ सूफ़ीक़ा मज़ार,
उड़ता हुआ ll
ख़ुर्शीद तलब

10800 

देख़ोग़े तो आएगी,
तुम्हें अपनी ज़फ़ा याद…
ख़ामोश ज़िसे पाओग़े,
ख़ामोश न होग़ा……
                                अंज़ुम रूमानी

11 May 2026

10791 - 10795 दिल मन राज़ बातें बेहतर वक़्त ख़िलाफ़ छीन नसीब महफ़िल तेवर ख़ामोश शायरी

 
10791
हमेशा ख़ामोश रहनेक़ा,
राज़ यहीं हैं,
क़ुछ बातें दिलमें ही,
बेहतर रहती हैं…!

10792
क़ैसे क़ह दूँ मैं सपनोंक़ो,
ज़ीनेक़ी ख़्वाहिश नहीं l
हाँ मैं ख़ामोश रहती हूँ,
पर मन हीं मन बोलती हूँ !

10793
वक़्त तुम्हारे ख़िलाफ़ हो,
तो ख़ामोश हो ज़ाना…
क़ोई छीन नहीं सक़ता,
ज़ो तेरे नसीबमें हैं पाना !

10794
तुम ख़ामोश हो,
पर तुम्हारा दिल बोल रहा हैं ll
तुम्हारे ख़ामोश होनेक़ा,
हर राज़ ख़ोल रहा हैं !

10795
सर-ए-महफ़िलमें,
क़्यूँ ख़ामोश रह क़र…
सभी लोग़ोंक़े,
तेवर देख़ता हूँ ll
             अभिषेक़ क़ुमार अम्बर

10 May 2026

10786 - 10790 दिल समझ अरसे निग़ाहें बयाँ आँख बात सीख़ राज़ नाज़ुक़ इशारे मोहब्बत लब ज़ुबान नाम ख़ामोश शायरी

 
10786
एक़ अरसेसे ख़ामोश हैं,
ये निग़ाहें मेरी…
बयाँ क़रें आँखोंसे,
ऐसा क़ुछ बचाहीं नहीं…!

10787
आँखोंसे बात क़रना,
क़ोई उनसे सीख़े…
ख़ामोश रहक़रभी,
बातें क़रना उनसे सीख़े…!

10788
तुम ख़ामोश हो,
पर तुम्हारी आँ
ख़े सब क़ुछ क़ह ज़ाती हैं l
दिलक़ी बातें,
बिना क़हे हीं समझ ज़ाती हैं ll

10789
राज़ ख़ोल देते हैं,
नाज़ुक़से इशारे क़ितनी ख़ामोश अक़्सर ;
मोहब्बतक़ी ज़ुबान होती हैं,
ख़ामोशी शायरी !!

10790
ख़ामोश हो ज़ा ऐ दिल,
यहां अब तेरा क़ाम नहीं…
लब तो क़बसे ख़ामोश हैं,
लबपें तेरा अब नाम नहीं…!

9 May 2026

10781 - 10785 मोहब्बत प्यार ज़ुबान शुरूआत आँख़ बात बोल अंदर बाहर शोर निग़ाहें ख़्याल ख़ामोश शायरी

 
10781
जब ख़ामोश आँख़ोंसे,
बात होती हैं l
ऐसे ही मोहब्बतक़ी,
शुरूआत होती हैं !!

10782
प्यारक़ी ज़ुबान,
ख़ामोश होती हैं…
फ़िरभी सब क़ुछ,
बोल देती हैं…!

10783
मेरे ख़्यालोंमें वो रहती हैं,
मुझे अपना वो क़हती हैं l
फ़िरभी क़भी-क़भी,
वो ख़ामोश रहती हैं…!

10784
उनक़ी निग़ाहें,
बहुत क़ुछ क़हती हैं…
पर ज़ुबां अक़्सर,
ख़ामोश रहती हैं...!

10785
जब क़ोई बाहरसे,
ख़ामोश होता हैं…
तो उसक़े अंदर,
बहुत ज्यादा शोर होता हैं ll

8 May 2026

10776 - 10780 बेपनाह प्यार ज़ीवन ख़फ़ा फ़ासला ज़ुदा रूठ नाम साथ साँसें बात चुप समझ ख़ामोश शायरी

 
10776
हम तो यूँ ही ख़ामोश थे,
पर तुम ख़फ़ा मान बैठे l
हमें फ़ासला नहीं दिख़ता,
और तुम ज़ुदा मान बैठे ll

10777
वो हैं ख़ामोश तो यूँ लग़ता हैं,
हमसे रब रूठ ग़या हो ज़ैसे…

10778
मैने क़ुछ पल,
ख़ामोश रहक़र देख़ा हैं…
मेरा नाम तक़ भूल ग़ए,
मेरे साथ चलनेवाले…

10779
बेपनाह प्यार हैं तुमसे,
ज़ीवन निसार हैं तुमपे ;
ख़ामोश न रहो तुम,
ये साँसें चलती हैं तुमसे…!

10780 
मेरे ख़ामोश होनेक़ा मतलब,
ये नहीं क़ि क़ुछ नहीं हैं...
अक़्सर क़ुछ बातोंक़ो,
चुप रहक़र समझना होता हैं ll 

7 May 2026

10771 - 10775 दिल धड़क़ दिन बेज़ार शहर खुश उदास चीख अज़ीब अक़ेला टूट राते बातें चुप ख़ामोश शायरी

 
10771
क़ुछ दिनोंसे,
बेज़ार होते ज़ा रहा हूँ मैं…
यार बहुत हुआ,
अब ख़ामोश होने ज़ा रहा हूँ !!

10772
ख़ामोश शहरक़ी,
चीखती राते;
सब चुप हैं पर,
क़हनेक़ो हैं क़ई बातें !

10773
दिलक़ी धड़क़ने,
हमेशा क़ुछ-न-क़ुछ क़हती हैं…
क़ोई सुने, या न सुने,
ये ख़ामोश नहीं रहती हैं !

10774
अज़ीब हैं मेरा अक़ेलापन,
ना खुश हूँ, ना उदास हूँ…
बस अक़ेला हूँ,
और ख़ामोश हूँ…!!!

10775
ज़ब इंसान अंदरसे,
टूट ज़ाता हैं,
तो अक्सर बाहरसे,
ख़ामोश हो ज़ाता हैं।

6 May 2026

10766 - 10770 आईना उमंग़ शबाब ग़ुनाह ग़ौर शोर सदा ज़ज़्बा क़बा ग़ुनग़ुना भुला याद ख़ामोश शायरी

 
10766
आईना ये तो बताता हैं,
क़ि मैं क़्या हूँ मग़र
आईना इसपें हैं ख़ामोश,
क़ि क़्या हैं मुझमें……

10767
ख़ामोश हो ग़ई,
ज़ो उमंग़ें शबाबक़ी…
फ़िर ज़ुरअत-ए-ग़ुनाह न क़ी,
हमभी चुप रहें……
हफ़ीज़ ज़ालंधरी

10768
ग़ौरसे सुनेग़ा,
तो एक़ शोर सुनाई देग़ा…
ख़ामोश ज़ुबांसे,
क़ुछ और सुनाई देग़ा !!

10769
बहुत ख़ामोश रहक़र,
ज़ो सदाएँ मुझक़ों देता था…
बड़े सुंदरसे ज़ज़्बोंक़ी,
क़बाएँ मुझक़ों देता था……!
आशिर वक़ील राव

10770 
क़भी ख़ामोश बैठोग़े,
क़भी क़ुछ ग़ुनग़ुनाओग़े l
हम उतना याद आयेंग़े,
ज़ितना तुम हमें भुलाओग़े !!

5 May 2026

10761 - 10765 दिल मोहब्बत महफ़िल परवाना ज़बाँ इज़हार इरादा तेवर महफ़ूज़ लब ख़ामोश शायरी

 
10761
लबोंक़ों रख़ना चाहते हैं ख़ामोश,
पर दिल क़हनेक़ो बेक़रार हैं l
मोहब्बत हैं तुमसे,
हाँ, मोहब्बत बेशुमार हैं ll

10762
ज़ाने क़्या महफ़िल--परवानामें,
देग़ उसने l
फ़िर ज़बाँ ख़ुल सक़ी,
शम्अ ज़ो ख़ामोश हुई ll
अलीम मसरूर

10763
क़ोई हंग़ामा--हयात नहीं,
रात ख़ामोश हैं सहर ख़ामोश ll

                                          वाहिद प्रेमी

10764
इज़हार--मुद्दआक़ा,
इरादा था आज़ क़ुछ
तेवर तुम्हारे देख़क़े,
ख़ामोश हो ग़या……
शाद अज़ीमाबादी

10765
लब--ख़ामोशक़ा,
सारे ज़हाँमें बोलबाला हैं,
वहीं महफ़ूज़ हैं यहाँ,
ज़िसक़ी ज़ुबांपें ताला हैं....

4 May 2026

10756 - 10560 माथे अज़ीज़ रुस्वाइ अग़्यार ग़िला रफ़ूग़र याँर हाथ सिले शहर पत्थर ज़ज़्बात ज़ख़्म शायरी


10756
शहज़ादी तिरे माथेपर,
ये ज़ख़्म रहेंग़ा…l
लेक़िन इसक़ों चूमनेवाला,
फ़िर नहीं होग़ा……ll
                                       सरवत हुसैन

10757
वो बाम ओ दर वो लोग़,
वो रुस्वाइयोंक़े ज़ख़्म…
हैं सबक़े सब अज़ीज़,
ज़ुदा उस ग़लीमें चल……
हबीब ज़ालिब

10778
हमक़ों अग़्यारक़ा ग़िला क़्या हैं…
ज़ख़्म ग़एँ हैं हमने याँरोंसे……!
                                          साहिर होशियाँरपुरी

10759
अभीसे मेरे रफ़ूग़रक़े,
हाथ थक़ने लग़े…
अभी तो चाक़ मिरे ज़ख़्मक़े,
सिलेभी नहीं……
परवीन शाक़िर

10760
आख़िरी बार मिलो,
हैं शहरमें क़हत पत्थरोंक़ा l
ज़ज़्बातक़े ज़ख़्म,
ग़ रहा हूँ…ll
                                      क़तील शिफ़ाई

3 May 2026

10751 - 10755 मोहब्बत दूरी मज़बूरी बेदारी तन्हा रातें सपने बातें फ़िक्र रफ़ू निग़ाह दुख़ अदू ज़ख़्म शायरी

 
10751
तुमसे दूरी, ये मज़बूरी,
ज़ख़्म-ए-क़ारी, बेदारी,
तन्हा रातें, सपने क़ातें,
ख़ुदसे बातें, मेरी ख़ू ll
                                ज़ावेद अख़्तर

10752
न क़िसीपें ज़ख़्म अयाँ,
क़ोंई न क़िसीक़ों फ़िक्र रफ़ू क़ी हैं…
न क़रम हैं हमपें हबीबक़ा,
न निग़ाह हमपें अदूक़ी हैं ll
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

10753
मोहब्बत एक़दम दुख़क़ा,
मुदावा क़र नहीं देती…
ये तितली बैठती हैं,
ज़ख़्मपर आहिस्ता आहिस्ता……
                                                    अब्बास ताबिश

10754
क़ैसा हिसाब, क़्या हिसाब…
हालत-ए-हाल हैं अज़ाब l
ज़ख़्म नफ़स नफ़समें हैं,
ज़हर ज़माँ ज़माँमें हैं……ll
ज़ौन एलियाँ

10755 
"वक़्तसे पहले हर क़ली,
ज़ख़्मक़ी सूरतही ज़ुदा होती हैं,
तुमने समझ लिया ज़िसे महक़,
वो दर्दक़ी इब्तिदा होती हैं।"
                                            निदा फ़ाज़ली

2 May 2026

10746 - 10750 बख़्श दुहाई तीर ख़याल ख़्याल शख़्स छुपा नज़र शिक़वा नादान ज़ाइक़े ज़बाँ ऊँग़लि पत्थर नाम ज़ख़्म शायरी

 
10746
तेरे ज़ानेसे यहाँ,
क़ुछ नहीं बदला…
मसलन, तेरा बख़्शा हुआ,
हर ज़ख़्म हरा हैं मुझमें……!
                                        इरफ़ान सत्तार

10747
ज़ख़्म हो तो क़ोंई दुहाई दे,
तीर हो तो क़ोंई उठा ले ज़ाए ll
रसा चुग़ताई

10748
हैं ज़ो पुर-ख़ूँ तुम्हारा,
अक़्स-ए-ख़याल ख़्याल…
ज़ख़्म आए,
क़हाँ क़हाँ ज़ानाँ……
                                      ज़ौन एलियाँ

10749
उसक़े ज़ख़्म छुपाक़र रख़िए,
ख़ुद उस शख़्सक़ी नज़रोंसे…
उससे क़ैसा शिक़वा क़ीज़े,
वो तो अभी नादान हुआ……ll
मोहसिन नक़वी

10750
चलो छोड़ो, वो सारे ज़ाइक़े,
मेरी ज़बाँपर ज़ख़्म बनक़र ज़म ग़ए होंग़े…
तुम्हारी ऊँग़लियोंक़ी नरम पोरें,
पत्थरोंपर नाम लिख़ती थीं मिरा……
                                                               मोहसिन नक़वी

1 May 2026

10741 - 10745 ज़ादा ख़ुर्रम सब्ज़ा ज़ावेदाना मुस्कुरा हौसला आज़मा आग़ महबूब नश्तर सुब्ह शह्र साँप तहख़ाने ज़ख़्म शायरी


10741
क़हाँ अब ज़ादा-ए-ख़ुर्रममें,
सर-सब्ज़ाना ज़ाना हैं l
क़हूँ तो क़्या क़हूँ
मेरा ये ज़ख़्म-ए-ज़ावेदाना हैं!

                                                 ज़ौन एलियाँ

10742
ज़ख़्म ग़ते हैं,
और मुस्कुराते हैं हम l
हौसला अपना,
ख़ुद आज़माते हैं हम ll
ए ज़ी ज़ोश

10743
आग़ही ज़ख़्म-ए-नज़ारा,
न बनी थी ज़ब तक़
मैने हर शख़्सक़ो,
महबूब-ए-नज़र ज़ाना था

                                         नसीर तुराबी

10744
क़हाँ ज़ाओग़े और क़ुछ देर ठहर ज़ाओ,
क़ि फ़िर नश्तर-ए-सुब्ह
ज़ख़्मक़ी तरह हर इक़,
आँख़क़ो बेदार क़रे ll
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

10745
शह्रमें क़रता था,
ज़ो साँपक़े क़ाटेक़ा इलाज़ …
उसक़े तहख़ानेसे,
साँपोंक़े ठिक़ाने निक़ले ……

                                         शक़ील आज़मी

30 April 2026

10736 - 10740 तीर सितम सीने ज़िग़र इंसाफ़ तलब ज़ब्त हँसी भूल मुंदमिल दरीचा लश्क़र ज़ख़्म शायरी


10736
क़्या तीर-ए-सितम,
उसक़े सीनेमें भी टूटे थे…
ज़िस ज़ख़्मक़ों चीरूँ हूँ,
पैक़ान निक़लते हैं……
                                       मीर तक़ी मीर

10737
हर ज़ख़्म-ए-ज़िग़र,
दावर-ए-महशरसे हमारा…
इंसाफ़-तलब हैं,
तिरी बेदाद-ग़रीक़ा……
मीर तक़ी मीर

10738
ज़ब्त क़रक़े,
हँसीक़ों भूल ग़या…
मैं तो उस ज़ख़्महीक़ो,
भूल ग़याँ……
                             ज़ौन एलियाँ

10739
ज़ख़्म सब मुंदमिल हो ग़ए…
इक़ दरीचा ख़ुला रह ग़याँ……
अज़मल सिराज़

10740
हमेंशा ज़ख़्म पहुँचे हैं मुझीक़ों,
हमेंशा मैं पस-ए-लश्क़र रहा हूँ ll
                                                   ज़ौन एलियाँ

29 April 2026

10731 - 10735 इश्क़ ग़ाफ़िल हुस्न तलवार फ़ेरी पुश्त मुबारक़ दम मसाफ़ हज़ार सूरत नज़र आईना तहज़ीब मक़्तल बिस्मिल क़ातिल नासूर ज़ख़्म शायरी

 
10731
फ़ेरी न थी ज़ो,
पुश्त-ए-मुबारक़ दम-ए-मसाफ़…
थे दो हज़ार ज़ख़्म,
फ़क़त सरसे ता-ब-नाफ़……
                                                      मीर अनीस

10732
ज़ख़्मक़ी सूरत नज़र आते हैं,
हरोंक़े नुक़ूश…
हमने आईनोंक़ों,
तहज़ीबोंक़ा मक़्तल क़र दियाँ ll
राहत इंदौरी

10733
उसने नासूर क़र लिया होग़ा,
ज़ख़्मक़ों शायरी बनाते हुए…ll
                                              अम्मार इक़बाल

10734 
इक़ ज़ख़्मभी,
यारा-ए-बिस्मिल नहीं आनेक़ा
मक़्तलमें पड़े रहिए,
क़ातिल नहीं आनेक़ा
ज़ौन एलियाँ

10735
इश्क़ ग़ाफ़िल ज़ख़्म ग़ता ज़ाएग़ा…
हुस्नक़ी तलवार चलती ज़ाएग़ी……
                                                           नुशूर वाहिदी

28 April 2026

10726 - 10730 ग़ुज़र क़ाफ़िले बहार रंग़ चेहरे महक़ आन ज़ुदाई नस वस्ल हिज़्र ज़ख़्म शायरी

 
10726
इस तरफ़से ग़ुज़रे थे,
क़ाफ़िले बहारोंक़े…
आज़ तक़ सुलग़ते हैं,
ज़ख़्म रहग़ुज़ारोंक़े
                   साहिर लुधियाँनवी

10727
क़ोंई रंग़ तो दो,
मिरे चेहरेक़ो…
फ़िर ज़ख़्म अग़र,
महक़ाओ तो क़्या……?
उबैदुल्लाह अलीम महक़

10728
हर आन इक़ ज़ुदाई हैं,
ख़ुद अपने आपसे,
हर आनक़ा हैं ज़ख़्म,
ज़ो हर आन ग़इए……
                                  ज़ौन एलियाँ

10729
सौ ज़ख़्म थे नस नसमें,
घायल थे रग़-ओ-रेशा…
अहमद फ़राज़

10730
एक़ मलालक़ी ग़र्द समेटे,
मैने ख़ुदक़ों पार क़िया…
क़ैसे क़ैसे वस्ल ग़ुज़ारे,
हिज़्रक़ा ज़ख़्म छुपानेमें……
                                        अज़्म बहज़ाद

27 April 2026

10721 - 10725 दीवान हुनर क़ातिल रस्म फ़ूल ग़ैर बात आज़मा ज़बाँ रूह हवस सिलसिला ज़हर ज़ख़्म शायरी


10721
अपने दीवानक़ों,
ग़लियोंमें लिए फ़िरता हूँ;
हैं क़ोंई ज़ो,
हुनर-ए-ज़ख़्म-नुमाई ले ले…
                                           अहमद फ़राज़


10722
ज़ब लग़ें ज़ख़्म तो,
क़ातिलक़ों दुआ दी ज़ाए…
हैं यहीं रस्म तो,
ये रस्म उठा दी ज़ाए ll
ज़ाँ निसार अख़्तर

10723
लोग़ क़ाँटोंसे बचक़े चलते हैं,
हमने फ़ूलोंसे ज़ख़्म ख़ाए हैं l
तुम तो ग़ैरोंक़ी बात क़रते हो,
हमने अपने भी आज़माए हैं ll
                                              अहमद फ़राज़

10724
चलो क़ि आज़,
सभी पाएमाल रूहोंसे…
क़हें क़ि अपने,
हर इक़ ज़ख़्मक़ों ज़बाँ क़र लें ll
साहिर लुधियाँनवी

10725
अब क़ौन ज़ख़्म ओ ज़हरसे,
रक़्ख़ेग़ा सिलसिला…l
ज़ीनेक़ी अब हवस हैं,
हमें हम तो मर ग़ए……ll