10816
शोर ज़ितना हैं क़ाएनातमें शोर,
मेरे अंदरक़ी ख़ामुशीसे हुआ ll
क़ाशिफ़ हुसैन ग़ाएर
मिरी प्यासक़ा तराना,
यूँ समझ न आ सक़ेग़ा l
मुझे आज़ सुनक़े देख़ो,
मिरी ख़ामोशीसे आग़े ll
नीना सहर
हम लबोंसे क़ह न पाए उनसे,
हाल-ए-दिल क़भी…
और वो समझे नहीं,
ये ख़ामुशी क़्या चीज़ हैं ll
निदा फ़ाज़ली