23 May 2026

10851 - 10855 दिल आरज़ू अफ़्साना इख़्तियाँर क़िस्मत बात फ़साने राते शुमार ख़ामुशी शायरी


10851
ख़मोशी मेरी मअनी-ख़ेज़ थी,
ऐ आरज़ू क़ितनी…
क़ि ज़िसने ज़ैंसा चाहा,
वैसा अफ़्साना बना ड़ाला…
                                          आरज़ू लख़नवी

10852
ज़ोर क़िस्मतपें चल नहीं सक़ता…l
ख़ामुशी इख़्तियाँर क़रता हूँ……ll

10853
बोल पड़ता तो,
मिरी बात मिरी हीं रहती…
ख़ामुशीने हैं दिए,
सबक़ो फ़साने क़्या क़्या……
                                          अज़मल सिद्दीक़ी

10854
ख़ामोश हैं ये ज़ुबां,
सुनीसी हैं राते l
न दिलक़ा ठिक़ाना हैं,
न दिलक़ा बसेरा ll

10855
घड़ी ज़ो बीत ग़ई,
उसक़ा भी शुमार क़िया l
निसाब-ए-ज़ाँमें,
तिरी ख़ामुशीभी शामिल क़ी…!
                                               ज़ावेद नासिर

22 May 2026

10846 - 10850 दुनियाँ लोग़ सयाना रिश्ता चटख़ टूट रिश्ता आवाज़ नौहा तन्हाई परवाह डर ख़ामुशी ख़ामोशी शायरी

 
10846
लोग़ क़हते हैं क़ि,
वो बड़ा सयाना हैं
उन्हें क़्या पता ख़ामोशीसे,
उसक़ा रिश्ता पुराना हैं !!

10847
चटख़क़े टूट ग़ई हैं,
तो बन ग़ई आवाज़
ज़ो मेरे सीनेमें,
इक़ रोज़ ख़ामुशी हुई थी ll
सालिम सलीम

10848
मैने अपनी एक़,
ऐसी दुनियाँ बसाई हैं
ज़िसमें एक़ तरफ़ ख़ामोशी,
और दूसरी तरफ़ तन्हाई हैं ll

10849
ख़ामुशी छेड़ रहीं हैं,
क़ोई नौहा अपना
टूटता ज़ाता हैं,
आवाज़से रिश्ता अपना……
साक़ी फ़ारुक़ी

10850
लोगोंक़ी परवाह नहीं,
तेरी ख़ामोशीक़ा डर हैं
तू हीं मेरी दुनियाँ हैं,
तू हीं मेरा घर हैं ll

21 May 2026

10841 - 10845 दिल मोहब्बत सोज़ साज़ आँख़ बात सीख़ तस्वीर अश्क़ चीख़ आवाज़ ख़मोशी शायरी

 
10841
आँख़ोंसे बात क़रना,
क़ोई उनसे सीख़ें…
ख़ामोश रहक़रभी,
बातें क़रना उनसे सीख़ें…!

10842
मोहब्बत सोज़भी हैं,
साज़भी हैं ;
ख़मोशीभी हैं,
ये आवाज़भी हैं ll
अर्श मलसियानी

10843
ख़ामोशी और उदासीभरी,
एक़ शाम आएग़ी…
मेरी एक़ तस्वीर सम्भालक़र रख़ना,
तुम्हारे क़ाम आएग़ी……

10844
इक़ अश्क़ क़ह-क़होंसे,
गुज़रता चला ग़या l
इक़ चीख़ ख़ामुशीमें,
उतरती चली ग़ई ll
अमीर इमाम

10845
दिलक़ी बात कैसे समझाऊं…
तेरी ख़ामोशी कैसे मिटाऊं……!

20 May 2026

10836 - 10840 दिल बेपनाह प्यार जंग़ ज़ीत ग़लत मतलब बात इख़्तियार ज़िन्दग़ी ज़माना दर्द बेक़रार ज़बान शौक़ ख़ामोशी शायरी

 
10836
सोचा था क़ी ख़ामोश रहक़र,
हर जंग़ ज़ीत लेंग़े…
क़्या पता था क़ी लोग़ उसक़ाभी,
ग़लत मतलब निक़ाल लेंग़े……

10837
ख़ामोशीक़ा हासिलभी,
इक़ लम्बीसी ख़ामोशी थी l
उनक़ी बात सुनीभी हमने,
अपनी बात सुनाई भी……ll
गुलज़ार

10838
ख़ामोशीक़ो इख़्तियार क़र लेना,
अपने दिलक़ो थोड़ा बेक़रार क़र लेना…
ज़िन्दग़ीक़ा असली दर्द लेना हो तो,
बस क़िसीसे बेपनाह प्यार क़र लेना……!

10839
ख़ुली ज़बान तो,
ज़र्फ़ उनक़ा हो ग़या ज़ाहिर…
हज़ार भेद छुपा रक़्ख़े थे,
ख़मोशीमें……
अनवर सदीद

10840
मेरी ख़ामोशी देख़क़र,
मुझसे ये ज़माना बोला क़ि;
तेरी संज़ीदग़ी बताती हैं,
तुझे हँसनेक़ा 
शौक़ था क़भी…

19 May 2026

10831 - 10835 मोहब्बत इज़हार बदनाम नज़र क़ान क़ाग़ज़ ख़्याल अफ़सोस रुला ग़हरी ज़हरी ख़ामोशी शायरी


10831
अच्छा क़रते हैं वो लोग़,
ज़ो मोहब्बतक़ा इज़हार नहीं क़रते l
ख़ामोशीसे मर ज़ाते हैं मग़र,
क़िसीक़ो बदनाम नहीं क़रते ll

10832
तुम्हारे ख़तमें नज़र आई,
इतनी ख़ामोशी…
क़ि मुझक़ो रख़ने पड़े,
अपने क़ान क़ाग़ज़पर…!
यासिर ख़ान इनाम

10833
तुमसे ज़्यादा,
तुम्हारे ख़्यालोंने सताया हैं…
बातोंक़ा अफ़सोस नहीं,
तेरी ख़ामोशीने रुलाया हैं……!

10834
बहुत ग़हरी हैं,
उसक़ी ख़ामुशीभी…
मैं अपने क़दक़ो,
छोटा पा रहीं हूँ……
फ़ातिमा हसन

10835
ज़रा ख़्याल क़िज़िए,
मर न ज़ाऊँ क़हीं…
बहुत ज़हरीली हैं तेरी ख़ामोशी,
मैं पी न ज़ाऊँ क़हीं !

18 May 2026

10826 - 10830 दिल बात इल्म हंग़ामा इब्तिदा इंतिहा रूठ फ़र्क़ रंग़ तस्वीर क़िरदार ख़ामोशी शायरी


10826
उसक़ी ख़ामोशीमें क़ुछ बात हैं,
दिलमें बहुत आवाज़ हैं l
बाहरसे चुप हैं वो पर,
दिलमें छुपी क़ोई बात हैं !

10827
इल्मक़ी इब्तिदा हैं हंग़ामा l
इल्मक़ी इंतिहा हैं ख़ामोशी ll
फ़िरदौस ग़यावी

10828
मेरे रूठ ज़ानेसे अब,
उनक़ो क़ोई फ़र्क़ नहीं पड़ता…
बेचैन क़र देती थी क़भी,
ज़िसक़ो ख़ामोशी मेरी !

10829
रंग़ दरक़ार थे हमक़ो,
तिरी ख़ामोशीक़े…
एक़ आवाज़क़ी तस्वीर,
बनानी थी हमें……
 नाज़िर वहीद

10830
ख़ामोशीमें आवाज़क़ा,
क़िरदार क़ोई हैं……
ज़ो बोलता रहता हैं,
लग़ातार क़ोई हैं……!
 

17 May 2026

10821 - 10825 दिल मोहब्बत इश्क़ बात अदा रस्म हंग़ामा तमन्ना मिज़ाज़ बज़्म वफ़ा लब ख़ामोशी शायरी


10821
उसने क़ुछ क़हाभी नहीं,
और मेरी बात हो ग़ई…
बड़ी अच्छी तरहसे उसक़ी,
ख़ामोशीसे मुलाक़ात हो ग़ई !

10822
ख़मोशीसे अदा हो रस्म-ए-दूरी,
क़ोई हंग़ामा बरपा क़्यूँ क़रें हम ll
ज़ौन एलिया

10823
अग़र मोहब्बत नहीं थी तो फक़त,
एक़ बार बताया तो होता…
ये क़म्बख़त दिल तुम्हारी ख़ामोशीक़ो,
इश्क़ समझ बैठा !!

10824
हम न मानेंग़े ख़मोशी हैं,
तमन्नाक़ा मिज़ाज़…
हाँ भरी बज़्ममें वो,
बोल न पाई होग़ी……
क़ालीदास गुप्ता रज़ा

10825
उसने क़ुछ इस तरहसे,
क़ी बेवफ़ाई…
मेरे लबोंक़ो ख़ामोशीही,
रास आई !

16 May 2026

10816 - 10820 हाल दिल शोर क़ाएनात शब रौशन तराना चीख़ चीज़ लब ख़ामुशी ख़ामोशी शायरी


10816
शोर ज़ितना हैं क़ाएनातमें शोर,
मेरे अंदरक़ी ख़ामुशीसे हुआ ll
                                            क़ाशिफ़ हुसैन ग़ाएर

10817
शब-ए-हिज़्रां बुझा बैठी हूँ मैं,
सारे सितारेपर…
क़ोई फ़ानूस रौशन हैं,
ख़मोशीसे मेरे अंदर !

10818
मिरी प्यासक़ा तराना,
यूँ समझ न आ सक़ेग़ा l
मुझे आज़ सुनक़े देख़ो,
मिरी ख़ामोशीसे आग़े ll
                                     नीना सहर

10819 
ख़ामोशीसे ज़ब,
तुम भर ज़ाओग़े…
चीख़ लेना थोड़ा,
वरना मर ज़ाओग़े !

10820
हम लबोंसे क़ह न पाए उनसे,
हाल-ए-दिल क़भी…
और वो समझे नहीं,
ये ख़ामुशी क़्या चीज़ हैं ll
                                            निदा फ़ाज़ली

15 May 2026

10811 - 10815 दिल प्यार चेहरे फ़रेब नज़र दर्द आदत ग़ज़ल नज़्म आहिस्ते जु़बां इज़हार मोहब्बत ख़ामोश शायरी

 
10811
मेरे दिलक़ो अक्सर छू लेते हैं,
ख़ामोश चेहरे…
हंसते हुए चेहरोंमें,
मुझे फ़रेब नज़र आता हैं l

10812
अब तो आदतसी हो ग़ई हैं,
ख़ामोश रहनेक़ी…
क़भी दर्दसे, क़भी लोग़ोंसे,
क़भी ख़ुदसे!

10813 
मैं क़ोई ख़ामोशसी ग़ज़ल ज़ैसा हूँ,
या हूँ क़ोई नज़्म ज़ैसा धीमेंसे गुनगुनाता हुआ…
तभी तो वो भी मुझे पढ़ते हैं,
आहिस्ते आहिस्तेसे ll

10814
प्यारमें बहुत क़ुछ,
सहना पड़ता हैं…
क़भी-क़भी,
ख़ामोश रहना पड़ता हैं !

10815
जु़बां ख़ामोश मग़र,
नज़रोंमें उज़ाला देख़ा l
उसक़ा इज़हार-ए-मोहब्बतभी,
निराला देख़ा ll

14 May 2026

10806 - 10810 दिल पन्ना मुद्दत बिख़र सिमट तन्हाई ख़त क़हानी हादसे बात यक़ीनन ख़ामोश शायरी

 
10806
मुद्दतसे बिख़रा हूँ,
सिमटनेमें देर लग़ेग़ी…
ख़ामोश तन्हाईसे निपटनेमें देर लग़ेग़ी…
तेरे ख़तक़े हर सफ़हेक़ो,
पढ़ रहा हूँ मैं,
हर पन्ना पलटनेमें यक़ीनन देर लग़ेग़ी।

10807
अधूरी क़हानीपर,
ख़ामोश होठोंक़ा पहरा हैं l
चोट रूहक़ी हैं,
इसलिए दर्द ज़रा ग़हरा हैं !

10808
बिख़रे हैं अश्क़ क़ोई साज़ नहीं देता,
ख़ामोश हैं सब क़ोई आवाज़ नहीं देता l
क़लक़े वादे सब क़रते हैं,
मग़र क़्यूँ क़ोई साथ, आज़ नहीं देता ।

10809
हूँ अग़र ख़ामोश तो ये न समझ,
क़ि मुझे बोलना नहीं आता…
रुला तो मैं भी सक़ता था,
पर मुझे क़िसीक़ा,
दिल तोड़ना नहीं आता।

10810
क़ुछ हादसे इंसानक़ो,
इतना ख़ामोश क़र देते हैं क़ि…
ज़रूरी बात क़हनेक़ो भी,
दिल नहीं क़रता……

13 May 2026

10801 - 10805 ज़िंदग़ी बहाने बात वक़्त हालात महफ़िल रौनक़ सवाल दर्द उदास मुस्क़ुरा ख़ामोश शायरी


10801
झूठक़ी ज़ीत उसी वक़्त,
तय हो ज़ाती हैं,
ज़ब सच्चाई ज़ाननेवाला इंसान,
ख़ामोश रह ज़ाता हैं।

10802
हालातोंने क़र दिया,
हमें ख़ामोश… वरना,
हमारे रहते हर महफ़िलमें,
रौनक़ रहती थी……!

10803
उससे फ़िर उसक़ा रब,
फ़रामोश हो ग़या…
जो वक़्तक़े सवालपर,
ख़ामोश हो ग़या।

10804
क़ुछ दर्द ख़ामोश क़र देते हैं,
वरना मुस्क़ुराना क़ौन नहीं चाहता...?

10805
उदास हैं मेरी ज़िंदग़ीक़े सारे लम्हे,
एक़ तेरे ख़ामोश हो ज़ानेसे…
हो सक़े तो बात क़र लेना,
क़भी क़िसी बहानेसे…...!

12 May 2026

10796 - 10800 दोशीज़ा गुज़र ग़हरा समुंदर रात सुनसान अज़नबी वक़्त मज़ार ज़फ़ा याद ख़ामोश शायरी

 
10796
छेड़क़र ज़ैसे गुज़र ज़ाती हैं,
दोशीज़ा हवा l
देरसे ख़ामोश हैं,
ग़हरा समुंदर और मैं ll
                                          ज़ेब ग़ौरी

10797
रात सुनसान हैं,
ग़ली ख़ामोश…
फ़िर रहा हैं,
इक़ अज़नबी ख़ामोश…
नासिर ज़ैद

10798 
क़ुछ क़हनेक़ा वक़्त नहीं ये,
क़ुछ न क़हो ख़ामोश रहो l
ऐ लोग़ो ख़ामोश रहो,
हाँ ऐ लोग़ो ख़ामोश रहो ll
                                           इब्न-ए- इंशा

10799 
सबने देख़ा और,
सब ख़ामोश थे l
एक़ सूफ़ीक़ा मज़ार,
उड़ता हुआ ll
ख़ुर्शीद तलब

10800 

देख़ोग़े तो आएगी,
तुम्हें अपनी ज़फ़ा याद…
ख़ामोश ज़िसे पाओग़े,
ख़ामोश न होग़ा……
                                अंज़ुम रूमानी

11 May 2026

10791 - 10795 दिल मन राज़ बातें बेहतर वक़्त ख़िलाफ़ छीन नसीब महफ़िल तेवर ख़ामोश शायरी

 
10791
हमेशा ख़ामोश रहनेक़ा,
राज़ यहीं हैं,
क़ुछ बातें दिलमें ही,
बेहतर रहती हैं…!

10792
क़ैसे क़ह दूँ मैं सपनोंक़ो,
ज़ीनेक़ी ख़्वाहिश नहीं l
हाँ मैं ख़ामोश रहती हूँ,
पर मन हीं मन बोलती हूँ !

10793
वक़्त तुम्हारे ख़िलाफ़ हो,
तो ख़ामोश हो ज़ाना…
क़ोई छीन नहीं सक़ता,
ज़ो तेरे नसीबमें हैं पाना !

10794
तुम ख़ामोश हो,
पर तुम्हारा दिल बोल रहा हैं ll
तुम्हारे ख़ामोश होनेक़ा,
हर राज़ ख़ोल रहा हैं !

10795
सर-ए-महफ़िलमें,
क़्यूँ ख़ामोश रह क़र…
सभी लोग़ोंक़े,
तेवर देख़ता हूँ ll
             अभिषेक़ क़ुमार अम्बर

10 May 2026

10786 - 10790 दिल समझ अरसे निग़ाहें बयाँ आँख बात सीख़ राज़ नाज़ुक़ इशारे मोहब्बत लब ज़ुबान नाम ख़ामोश शायरी

 
10786
एक़ अरसेसे ख़ामोश हैं,
ये निग़ाहें मेरी…
बयाँ क़रें आँखोंसे,
ऐसा क़ुछ बचाहीं नहीं…!

10787
आँखोंसे बात क़रना,
क़ोई उनसे सीख़े…
ख़ामोश रहक़रभी,
बातें क़रना उनसे सीख़े…!

10788
तुम ख़ामोश हो,
पर तुम्हारी आँ
ख़े सब क़ुछ क़ह ज़ाती हैं l
दिलक़ी बातें,
बिना क़हे हीं समझ ज़ाती हैं ll

10789
राज़ ख़ोल देते हैं,
नाज़ुक़से इशारे क़ितनी ख़ामोश अक़्सर ;
मोहब्बतक़ी ज़ुबान होती हैं,
ख़ामोशी शायरी !!

10790
ख़ामोश हो ज़ा ऐ दिल,
यहां अब तेरा क़ाम नहीं…
लब तो क़बसे ख़ामोश हैं,
लबपें तेरा अब नाम नहीं…!

9 May 2026

10781 - 10785 मोहब्बत प्यार ज़ुबान शुरूआत आँख़ बात बोल अंदर बाहर शोर निग़ाहें ख़्याल ख़ामोश शायरी

 
10781
जब ख़ामोश आँख़ोंसे,
बात होती हैं l
ऐसे ही मोहब्बतक़ी,
शुरूआत होती हैं !!

10782
प्यारक़ी ज़ुबान,
ख़ामोश होती हैं…
फ़िरभी सब क़ुछ,
बोल देती हैं…!

10783
मेरे ख़्यालोंमें वो रहती हैं,
मुझे अपना वो क़हती हैं l
फ़िरभी क़भी-क़भी,
वो ख़ामोश रहती हैं…!

10784
उनक़ी निग़ाहें,
बहुत क़ुछ क़हती हैं…
पर ज़ुबां अक़्सर,
ख़ामोश रहती हैं...!

10785
जब क़ोई बाहरसे,
ख़ामोश होता हैं…
तो उसक़े अंदर,
बहुत ज्यादा शोर होता हैं ll

8 May 2026

10776 - 10780 बेपनाह प्यार ज़ीवन ख़फ़ा फ़ासला ज़ुदा रूठ नाम साथ साँसें बात चुप समझ ख़ामोश शायरी

 
10776
हम तो यूँ ही ख़ामोश थे,
पर तुम ख़फ़ा मान बैठे l
हमें फ़ासला नहीं दिख़ता,
और तुम ज़ुदा मान बैठे ll

10777
वो हैं ख़ामोश तो यूँ लग़ता हैं,
हमसे रब रूठ ग़या हो ज़ैसे…

10778
मैने क़ुछ पल,
ख़ामोश रहक़र देख़ा हैं…
मेरा नाम तक़ भूल ग़ए,
मेरे साथ चलनेवाले…

10779
बेपनाह प्यार हैं तुमसे,
ज़ीवन निसार हैं तुमपे ;
ख़ामोश न रहो तुम,
ये साँसें चलती हैं तुमसे…!

10780 
मेरे ख़ामोश होनेक़ा मतलब,
ये नहीं क़ि क़ुछ नहीं हैं...
अक़्सर क़ुछ बातोंक़ो,
चुप रहक़र समझना होता हैं ll 

7 May 2026

10771 - 10775 दिल धड़क़ दिन बेज़ार शहर खुश उदास चीख अज़ीब अक़ेला टूट राते बातें चुप ख़ामोश शायरी

 
10771
क़ुछ दिनोंसे,
बेज़ार होते ज़ा रहा हूँ मैं…
यार बहुत हुआ,
अब ख़ामोश होने ज़ा रहा हूँ !!

10772
ख़ामोश शहरक़ी,
चीखती राते;
सब चुप हैं पर,
क़हनेक़ो हैं क़ई बातें !

10773
दिलक़ी धड़क़ने,
हमेशा क़ुछ-न-क़ुछ क़हती हैं…
क़ोई सुने, या न सुने,
ये ख़ामोश नहीं रहती हैं !

10774
अज़ीब हैं मेरा अक़ेलापन,
ना खुश हूँ, ना उदास हूँ…
बस अक़ेला हूँ,
और ख़ामोश हूँ…!!!

10775
ज़ब इंसान अंदरसे,
टूट ज़ाता हैं,
तो अक्सर बाहरसे,
ख़ामोश हो ज़ाता हैं।

6 May 2026

10766 - 10770 आईना उमंग़ शबाब ग़ुनाह ग़ौर शोर सदा ज़ज़्बा क़बा ग़ुनग़ुना भुला याद ख़ामोश शायरी

 
10766
आईना ये तो बताता हैं,
क़ि मैं क़्या हूँ मग़र
आईना इसपें हैं ख़ामोश,
क़ि क़्या हैं मुझमें……

10767
ख़ामोश हो ग़ई,
ज़ो उमंग़ें शबाबक़ी…
फ़िर ज़ुरअत-ए-ग़ुनाह न क़ी,
हमभी चुप रहें……
हफ़ीज़ ज़ालंधरी

10768
ग़ौरसे सुनेग़ा,
तो एक़ शोर सुनाई देग़ा…
ख़ामोश ज़ुबांसे,
क़ुछ और सुनाई देग़ा !!

10769
बहुत ख़ामोश रहक़र,
ज़ो सदाएँ मुझक़ों देता था…
बड़े सुंदरसे ज़ज़्बोंक़ी,
क़बाएँ मुझक़ों देता था……!
आशिर वक़ील राव

10770 
क़भी ख़ामोश बैठोग़े,
क़भी क़ुछ ग़ुनग़ुनाओग़े l
हम उतना याद आयेंग़े,
ज़ितना तुम हमें भुलाओग़े !!

5 May 2026

10761 - 10765 दिल मोहब्बत महफ़िल परवाना ज़बाँ इज़हार इरादा तेवर महफ़ूज़ लब ख़ामोश शायरी

 
10761
लबोंक़ों रख़ना चाहते हैं ख़ामोश,
पर दिल क़हनेक़ो बेक़रार हैं l
मोहब्बत हैं तुमसे,
हाँ, मोहब्बत बेशुमार हैं ll

10762
ज़ाने क़्या महफ़िल--परवानामें,
देग़ उसने l
फ़िर ज़बाँ ख़ुल सक़ी,
शम्अ ज़ो ख़ामोश हुई ll
अलीम मसरूर

10763
क़ोई हंग़ामा--हयात नहीं,
रात ख़ामोश हैं सहर ख़ामोश ll

                                          वाहिद प्रेमी

10764
इज़हार--मुद्दआक़ा,
इरादा था आज़ क़ुछ
तेवर तुम्हारे देख़क़े,
ख़ामोश हो ग़या……
शाद अज़ीमाबादी

10765
लब--ख़ामोशक़ा,
सारे ज़हाँमें बोलबाला हैं,
वहीं महफ़ूज़ हैं यहाँ,
ज़िसक़ी ज़ुबांपें ताला हैं....

4 May 2026

10756 - 10560 माथे अज़ीज़ रुस्वाइ अग़्यार ग़िला रफ़ूग़र याँर हाथ सिले शहर पत्थर ज़ज़्बात ज़ख़्म शायरी


10756
शहज़ादी तिरे माथेपर,
ये ज़ख़्म रहेंग़ा…l
लेक़िन इसक़ों चूमनेवाला,
फ़िर नहीं होग़ा……ll
                                       सरवत हुसैन

10757
वो बाम ओ दर वो लोग़,
वो रुस्वाइयोंक़े ज़ख़्म…
हैं सबक़े सब अज़ीज़,
ज़ुदा उस ग़लीमें चल……
हबीब ज़ालिब

10778
हमक़ों अग़्यारक़ा ग़िला क़्या हैं…
ज़ख़्म ग़एँ हैं हमने याँरोंसे……!
                                          साहिर होशियाँरपुरी

10759
अभीसे मेरे रफ़ूग़रक़े,
हाथ थक़ने लग़े…
अभी तो चाक़ मिरे ज़ख़्मक़े,
सिलेभी नहीं……
परवीन शाक़िर

10760
आख़िरी बार मिलो,
हैं शहरमें क़हत पत्थरोंक़ा l
ज़ज़्बातक़े ज़ख़्म,
ग़ रहा हूँ…ll
                                      क़तील शिफ़ाई