18 August 2026

11231 - 11235 दिल आँसू मुस्क़ुरा दर्द धूप ज़िस्म होंठ क़हानी सदा ग़ुफ़्तुग़ू समझ ज़ुदाई शायरी

 
11231
आँसू छुपाक़र मुस्क़ुराना,
सीख़ लिया हैं,
ज़ुदाईक़े दर्दक़ो,
दिलमें दबा लिया हैं।

11232
ज़ावियाँ धूपने,
क़ुछ ऐसा बनायाँ हैं क़ि…
हम साएक़ों ज़िस्मक़ी,
ज़ुम्बिशसे ज़ुदा देख़ते हैं ll
आसिम वास्ती

11233
क़ुछभी हो वो अब दिलसे,
ज़ुदा हो नहीं सक़ते…
हम मुज़रिम-ए-तौहींन-ए-वफ़ा,
हो नहीं सक़ते……

11234
चुप रहक़े ग़ुफ़्तुग़ूहींसे,
पड़ता हैं तफ़रक़े…
होते हैं दोनो होंठ ज़ुदा,
इक़ सदाक़े साथ…ll
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर

11235
टूटे दिलक़ी क़हानी,
क़ोई नहीं समझता,
ज़ुदाईक़ा दर्द समझता वहीं हैं,
ज़ो सहता हैं

17 August 2026

11226 -11230 दिल साथ पल पल सुनसान उदास शामें बिख़रा सनम दुनियाँ बिछड़ ज़िस्म तन्हाई ज़ुदाई शायरी

 
11226
साथ बिताए वो पल,
अब बस 
 पलहैं,
तेरी ज़ुदाईसे,
घरभी अब सुनसान हैं

11227
उदास शामें ग़िनता हूँ,
तेरी तन्हाईमें l
दिल टूटक़र बिख़रा हैं,
तेरी ज़ुदाईमें ll

11228
तू मिला भी हैं... तू ज़ुदा भी हैं... तेरा क़्या क़हना...
तू सनम भी हैं... तू ख़ुदा भी हैं... तेरा क़्या क़हना…

11229
मेरी दुनियाँ तुझमेंहीं,
रूक़ी हैं क़हीं…
ज़ुदा तो हूँ पर,
बिछड़ न पायाँ क़भी……

11230
ज़िस दिनसे,
वो ज़ुदा हुआ हैं…
मैने,
ज़िस्म नहीं पहना हैं……ll

16 August 2026

11221 - 11225 प्यार मोहब्बत दिल वक़्त सफ़र सब्र एहसास ग़हरा इंतज़ार इज़हार आँसू उदास सुक़ून दास साँस ज़ुदाई शायरी

 
11221
बरसोंक़ी ज़ुदाई भी,
क़म नहीं क़र पायी मोहब्बत 
l
वक़्त ग़ुज़रा मग़र,
मोहब्बत आज़भी हैं ज़िंदा ll

11222
लंबे सफ़रक़ी ज़ुदाईने,
सिख़ाया सब्र क़रना l
पर मोहब्बतक़ा एहसास,
आज़ भी ताज़ा हैं ll

11223
जितनी लंबी ज़ुदाई,
उतना ग़हरा इंतज़ार 
l
शायद य हैं,
सच्चे प्यारक़ा असली इज़हार 
ll

11224
आँसू उदास बहते हैं,
तेरे नामसे l
ज़ुदाईने छीन लिया,
वो सुक़ून अरसेसे…ll

11225
दूरियाँ बढ़ीं तो बढ़ीं,
पर दिल तो अभी पास हैं l
तेरे बिना ये ज़िंदग़ी,
बस एक़ उदास साँस हैं ll

15 August 2026

11216 - 11220 ज़िंदग़ी उदास दर्द आँख क़हानी परछाई क़दम साथ ग़हरा सिलसिला तलाश सुक़ून आँसू ज़ुदाई शायरी

 
11216
दर्द छुपा हैं आँखोंमें, नमीसी रहती हैं 
l
ज़ुदाईने लिख़ी हैं, वो दर्द भरी क़हानी 
ll

11217
दर्दक़ी परछाई, हर क़दम हैं साथ l
ज़ुदाईने बना दी, ज़िंदग़ी उदास ll

111218
दर्दक़ी ग़हराईमें, डूबा रहता हूँ 
l
तेरी ज़ुदाईक़ा सिलसिला, सहता रहता हूँ 
ll

11219
आँख़े नम रहती हैं, तेरी तलाशमें l
ज़ुदाईने छीन लिया सुक़ून, तुम्हारी आसमें ll

11220
आँसू दर्द बनक़र, बहते रहते हैं 
l
ज़ुदाईक़ी रातें, ज़लती रहती हैं ll

14 August 2026

11211 -11215 बहला अदा दर्द क़िस्मत ख़ुशबू बर्बाद ग़म लम्हें यादें साँस ज़ुदाई शायरी

 
11211
न बहलावा न समझौता,
ज़ुदाईसी ज़ुदाई हैं…
'अदा' सोचो तो ख़ुशबूक़ा सफ़र,
आसाँ नहीं होता……
                                                  अदा ज़ाफ़री

11212
ज़ुदाईक़ा दर्द छुपा हैं,
दिलक़े क़ोनेमें…
हर साँसमें बसता,
वो तेरा होनेमें……

11213
मैने समझा था क़ि,
लौट आते हैं ज़ानेवाले ;
तूने ज़ाक़र तो,
ज़ुदाई मिरी क़िस्मत क़र दी ll
                                   अहमद नदीम क़ासमी

11214
दर्द बनक़र बसी हैं,
तेरी वो यादें…
ज़ुदाईक़े लम्हें,
दिलक़ो बर्बाद क़र देते हैं ll

11215
ग़म अज़ीज़ोंक़ा,
हसीनोंक़ी ज़ुदाई देख़ी…
देख़े दिख़लाए अभी,
ग़र्दिश-ए-दौराँ क़्या क़्या......
                                            अख़्तर शीरानी

13 August 2026

11206 - 11210 ज़िंदग़ी बयान आसान दर्द वक़्तनिशानी तलब दाग़ याद वज़ह सज़ा दीवार खुशी बिख़र ज़ुदाई शायरी

 
11206
ज़ुदाईक़ा दर्द,
बयान क़रना आसान नहीं,
पर तेरे बिना रहनाभी,
क़हाँ मुमक़िन हैं।

11207
वक़्त-ए-रुख़्सत निशानी,
ज़ो तलबक़ी तो क़हा…
दाग़ क़ाफ़ी हैं,
ज़ुदाईक़ा अग़र याद रहें ……

11208
इस ज़ुदाईमें,
तुम अंदरसे बिख़र ज़ाओग़े…
क़िसी मा'ज़ूरक़ो देख़ोग़े,
तो याद आऊँग़ा ll
                                           वसी शाह

11209
तू मेरी हर खुशीक़ी,
वज़ह थी क़भी,
अब तेरी ज़ुदाई ही मेरी,
सज़ा बन ग़ई।

11210
घरक़ी हर दीवार,
तेरी यादोंसे भरी हैं,
तेरी ज़ुदाईने,
ज़िंदग़ी अधूरी क़र दी हैं।

12 August 2026

11201 - 11205 दिल ज़िंदग़ी चुपक़े बात याद उदासी दर्द ख़ामोशी परेशान ख़्वाब प्यास ज़हर तलाश ज़ुदाई शायरी


11201
दिल रोता रहता हैं,
चुपक़ेसे हर रात…
ज़ुदाईक़ी उदासी,
बहुत ग़हरी बात  …!


11202
ज़िंदग़ी नाम हैं ज़ुदाईक़ा,
आप आए तो मुझक़ो याद आया…ll
नरेश क़ुमार शाद

11203
रातक़ी ख़ामोशीमें,
उदासी ग़हराती हैं l
दिलक़ो रुलाती हैं,
तेरी ज़ुदाई……ll

11204
अब ज़ुदाईक़े सफ़रक़ो,
मिरे आसान क़रो l
तुम मुझे ख़्वाबमें आक़र,
परेशान न क़रो……ll
मुनव्वर राना

11205
रातें दर्द बन ग़ई,
तेरी तलाशमें…
ज़ुदाईक़ा ये ज़हर,
दिलक़ी प्यास बुझा न पाया ll
 

11 August 2026

11196 - 11200 दिल दर्द साँसें आग़ रात नाम आँसू यादें उदास लम्हे परछाई तन्हाई ज़ुदाई शायरी

 
11196
दिल ज़लता रहता हैं, तेरी ज़ुदाईमें,
दर्दक़ी ये आग़, बुझती नहीं रातमें…

11197
तेरा नाम लेते ही, आँसू बह ज़ाते हैं,
ज़ुदाईक़ी तन्हाई, रातभर ज़ग़ाती हैं ll

11198
तेरी यादें सताती हैं, हर रातक़ो तन्हा क़र,
ज़ुदाईक़ा दर्द, दिलक़ो रुलाता हैं रातभर…

11199
तेरी यादें ग़ले लग़तीं हैं, रातक़ी तन्हाईमें,
दिलक़ो छूती हैं वो, ज़ुदाईक़ी परछाईमें ll

11200
साँसें थमसी ज़ातीं हैं, तेरी याद आते ही…
उदास लम्हे ग़िनता हूँ, रातभर ज़ाग़ते ज़ाग़ते…..

10 August 2026

11191 - 11195 ज़िंदग़ी नींद शब पल मुँह क़समें वादा सबक़ बहार आलम ख़िज़ाँ वस्ल फ़िक़्र ज़ुदाई शायरी

 
11191
थी वस्लमेंभी,
फ़िक़्र-ए-ज़ुदाई तमाम शब…
वो आए तो भी,
नींद न आई तमाम शब……
                                        मोमिन ख़ाँ मोमिन

11192
ग़ुज़रते पलोंने,
बहुत क़ुछ सिख़ा दिया,
ज़ुदाईभी ज़िंदग़ीक़ा,
एक़ सबक़ निक़ली।

11193
वस्लमें रंग़ उड़ ग़या मेरा,
क़्या ज़ुदाईक़ो मुँह दिख़ाऊँग़ा ll
                                                मीर तक़ी मीर

11194
साथ ज़ीने मरनेकी,
क़समें ख़ाई थीं हमने,
अब ज़ुदाईमेंभी,
वो वादा निभाना हैं हमने।

11195
मिरी बहारमें,
आलम ख़िज़ाँक़ा रहता हैं l
हुआ ज़ो वस्ल तो,
ख़टक़ा रहा ज़ुदाईक़ा ll
                                 ज़लील मानिक़पूरी

8 August 2026

11186 - 11190 दिल सूरत शक़्ल मोड़ तन्हा साथ मतलब दाग़ अल्फ़ाज़ मुश्क़िल तलाश फ़ासले ज़ुदाई शायरी

 11186
इक़ शक़्ल हमें फ़िर भाई हैं,
इक़ सूरत दिलमें समाई हैं l
हम आज़ बहुत सरशार सही,
पर अग़ला मोड़ ज़ुदाई हैं ll
                                          अतहर नफ़ीस

11187
ज़ुदाईने सिख़ाया हैं,
तन्हा रहना क़्या हैं,
वरना पहले तो साथक़ा,
मतलबही क़ुछ और था।

11188
ज़ुदा क़िसीसे क़िसीक़ा,
ग़रज़ हबीब न हो…
ये दाग़ वो हैं क़ि,
दुश्मनक़ोभी नसीब न हो ll
                                         नज़ीर अक़बराबादी

11189
अल्फ़ाज़ क़म पड़ ज़ाते हैं,
तुझे बतानेमें,
क़ितना मुश्क़िल हैं,
तेरी ज़ुदाई सहनेमें।

11190
तिरी तलाशमें निक़ले तो,
इतनी दूर ग़ए…
क़ि हमसे तय न हुए,
फ़ासले ज़ुदाईक़े ll
                                 ज़ुनैद हज़ीं लारी

7 August 2026

11181 - 11185 दिल वक़्त इख़्तिलात एहसास ताक़त घड़ि दर्द क़हानी पल तलाश ख़बर ज़ुदाई शायरी


11181
क़्यूँ बढ़ाते हो,
इख़्तिलात बहुत…
हमक़ो ताक़त नहीं,
ज़ुदाई क़ी……
                   अल्ताफ़ हुसैन हाली

11182
दिलने क़हा था,
तू हमेशा रहेग़ा पास,
वक़्तने क़र दिया हैं,
ज़ुदाईक़ा एहसास।

11183
महिने वस्लक़े,
घड़ियोंक़ी सूरत उड़ते ज़ाते हैं…
मग़र घड़ियाँ ज़ुदाईक़ी,
गुज़रती हैं महिनोंमें ll
                                           अल्लामा इक़बाल

11184
ज़ुदाईने लिख़ दी हैं,
दर्दक़ी नई क़हानी…
हर पल तेरी तलाशमें,
क़टती हैं ये ज़िंदग़ानी ll

11185
टुक़ ख़बर ले क़ि,
हर घड़ी हमक़ो...
अब ज़ुदाई,
बहुत सताती हैं l
                   ख़्वाज़ा मीर ‘दर्द’ 

6 August 2026

11176 - 11180 दिल प्यार ख़लल पज़ीर रब्त वक़्त इंतज़ार आसान सवाल सच्चा मयस्सर क़ुर्बते ज़ुदाई शायरी

 
11176
ख़लल-पज़ीर हुआ,
रब्त-ए-मेहर-ओ-माहमें वक़्त l
बता ये तुझसे ज़ुदाईक़ा,
वक़्त हैं क़ि नहीं ll
                                  अज़ीज़ हामिद मदनी

11177
ज़ुदाईने सिख़ाया हैं,
अक़ेला चलना क़्या होता हैं...
पर दिल अभी भी,
तेरा इंतज़ार क़रता हैं।

11178
क़भी क़भी तो ये दिलमें,
सवाल उठता हैं…
क़ि इस ज़ुदाईमें,
क़्या उसने पा लिया होग़ा…?
                                          अनवार अंज़ुम

11179
प्यारमें ज़ुदाई सहना,
आसान नहीं होता l
पर सच्चा प्यार क़भी,
क़म नहीं होता।

11180
ज़ुदा थे हम,
तो मयस्सर थी क़ुर्बतें क़ितनी...
बहम हुए तो पड़ी हैं,
ज़ुदाईयाँ क़्या क़्या ?
                                    फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

5 August 2026

11171 - 11175 दिल क़दर मुसलसलक़दर शिद्दतें ज़ुदाई बेवफ़ाई साथ ख़ुश्क़ पलक़ें दर्द ख़ौफ़ ज़ुदाई शायरी

 
11171 
इस क़दर मुसलसल थी,
शिद्दतें ज़ुदाईक़ी…
आज़ पहली बार,
उससे मैने बेवफ़ाई क़ी……
                                       अहमद फ़राज़

11172
तेरा साथ छूटा तो,
सपनेभी अधूरे रह ग़ए…
ज़ुदाईक़ी आग़में,
दिल ज़लता रह ग़या…

11173
ख़ुश्क़ ख़ुश्क़सी पलक़ें,
और सूख़ ज़ाती हैं……
मैं तिरी ज़ुदाईमें,
इस तरह रोता हूँ……
                               अहमद राही
11174
दर्द छुपा हैं सीनेमें,
तेरे नामक़ा 
ज़ुदाईक़ा ये ज़ख़्म,
क़भी न भरेग़ा……

11175
बस एक़ ख़ौफ़ था ज़िंदा,
तिरी ज़ुदाईक़ा…
मिरा वो आख़िरी दुश्मनभी,
आज़ मारा ग़या……
                                          ख़ालिद मलिक़ साहिल

4 August 2026

11166 - 11170 प्यार मेहरबाँ नज़र शुक़्रिया तोहफ़ा फ़ैसला फ़ासला लहर आधा आँख़ रुख़सत ज़ुदाई शायरी


11166
उस मेहरबाँ नज़रक़ी,
इनायतक़ा शुक़्रिया l
तोहफ़ा दिया हैं,
हमक़ो ज़ुदाईक़ा ll

11167
तुझसे ज़ुदा न होंगे,
ये सोचा था उम्रभर l
ये फ़ैसला तिरा था,
जो ये फ़ासला हुआ ll
रुबीना अया

11168
उदासीक़ी लहरोंमें,
बहता रहता हूँ l
तेरी ज़ुदाईमें,
ख़ोता रहता हूँ ll

11169
तो क़्या सचमुच,
ज़ुदाई मुझसे क़र ली…
तो ख़ुद अपनेक़ो,
आधा क़र लिया क़्या…?
ज़ौन एलिया

11170
ज़ुदाईक़ा हमें क़्या,
वो हसते हसते सह्य लेंग़े… 
आँख़ोमें उनक़े प्यार दिख़ाई दे,
तो मानेसे रुख़सत क़र लेंग़े !

2 August 2026

11161 - 11165 मोहोबत पैरहन ख़ुशबू घबरा भूल ग़ुरूर ज़ंग़ धमक़ि बदमाशि क़दर शिक़वा-ए-ज़ुदाई शायरी

 

11161
ज़ब अपने पैरहनसे,
ख़ुशबू तुम्हारी आई…
घबराक़े भूल बैठे हम,
शिक़वा-ए-ज़ुदाई……!

11162
क़ोई रूठे तो,
उसे ज़ल्दी मना लिया क़रो…l
ग़ुरूरक़ी ज़ंग़में अक़्सर,
ज़ुदाई ज़ीत ज़ायाँ क़रती हैं ll

11163
धमक़ियाँ देता हैं,
और वो भी ज़ुदाईक़ी...
मोहोबतमें भी देख़ो…
बदमाशियाँ मेरे याँरक़ी…...

11164
आँख़ें हैं कि,
ख़ाली नहीं रहती हैं, लहूसे…
और ज़ख़्म-ए-ज़ुदाई हैं,
भरभी नहीं जाता……
अहमद फ़राज़

11165
लाऊँग़ा क़हाँसे,
ज़ुदाईक़ा हौसला…
क़्यों क़ोंई इस क़दर,
मेरे क़रीब आ रहा हैं ?

31 July 2026

11156 - 11160 मोहब्बत ज़िन्दग़ी सुलग़ती इल्म ड़र ईमान ड़र अंत हुक़ूमत ज़ुल्म दाव ज़ुल्म शायरी

 
11156
चाहे दावपें लग़ ज़ाये ज़िन्दग़ी,
दावपें ईमान लग़ न पाए क़भी ;
सुलग़ती रहें दिलमें आग़ इल्मक़ी,
चाहे हमपें हो हुक़ूमत ज़ुल्मक़ी।

11157
ज़ुल्म ज़ालिमक़े क़म नहीं होते,
सर हमारेभी क़म नहीं होते l
ये मोहब्बत हैं और मोहब्बतक़े 
फ़ैसले एक़दम नहीं होते ll

11158
ड़र और ज़ुल्मक़ा यारो,
क़ोई अंत नहीं…
ख़ुदक़ो ढूँड़ रहें हैं लोग़,
अब रावनमें……
                                     राज़ ख़ेती

11159
इन क़िताबोंने,
बड़ा ज़ुल्म क़िया हैं मुझपर…
इनमें इक़ रम्ज़ हैं,
ज़िस रम्ज़क़ा मारा हुआ ज़ेहन…

11160
मैं मुल्क-बदर सब्रभी,
क़र सक़ती थी लेक़िन…
ये देख़ना था,
ज़ुल्मक़ी सरहद हैं क़हाँ तक़……
                                                        मीना नक़वी

29 July 2026

11151 - 11155 इश्क़ हक़ीक़त याद क़यामत होंठ ज़र्फ़ आईना टूट लुत्फ़से ड़र ज़ब्ह क़ज़ा ज़ुल्म शायरी

 
11151
क़िया इश्क़-ए-मज़ाज़ीने,
हक़ीक़त आश्ना मुझक़ो ;
बुतोंने ज़ुल्म वो ढाया क़ि,
याद आया ख़ुदा मुझक़ो ll
ख़िज़्र नाग़पुरी

11152
तेरे हर ज़ुल्मक़ा मेरे ऊपर,
हिसाब तुझक़ो याद दिलाएंग़े…
क़यामत होनेसे पहले,
तुझक़ो हर बार यह एहसास दिलाएंग़े।

11153
ज़ुल्म सहक़े भी,
मैने होंठ सी लिए 'ग़ाज़ी' ;
एक़ ज़र्फ़ उनक़ा हैं,
एक़ ज़र्फ़ मेरा हैं……
                                शाहिद ग़ाज़ी

11154
आईना भी उन्हें देख़क़े,
शर्मा ग़या होग़ा l
उनक़े ज़ुल्म देख़क़े,
ख़ुद बख़ुद टूट ग़या होग़ा…

11155
ज़ुल्मसे ग़र ज़ब्हभी क़र दो,
मुझे परवा नहीं…
लुत्फ़से ड़रता हूँ,
ये मेरी क़ज़ा हो ज़ाएग़ा…
                                    बेख़ुद देहलवी

28 July 2026

11146 - 11150 ज़िन्दग़ी बात लोग़ आदत दरबार सुनवाई आईने चेहरा नज़र फ़रेबी इंतिहा सायाँ ज़ुल्फ़े परीशाँ ज़ुल्म शायरी

 
11146
बात ये हैं क़ी,
लोग़ बदल ग़ए हैं...
ज़ुल्म ये हैं क़ी,
वो मानते भी नहीं...

11147
क़ुछ ज़ुल्म ओ सितम,
सहनेक़ी आदत भी हैं हमक़ो
क़ुछ ये हैं क़ि
दरबारमें सुनवाई भी क़म हैं
ज़िया ज़मीर

11148
ज़िन्दग़ी अपने आईनेमें,
तुझे अपना चेहरा नज़र नहीं आता,
ज़ुल्म क़रना तो तेरी आदत हैं,
ज़ुल्म सहना मग़र नहीं आता।
नरेश क़ुमार ‘शाद’

11149
ख़ुद-फ़रेबीमें मुब्तला रख़क़र,
ज़ुल्मक़ी तुमने इंतिहा क़ी हैं ll
अज़ीम हैंदराबादी

11150
इक़ न इक़ ज़ुल्मतसे,
ज़ब वाबस्ता रहना हैं ‘ज़ोश’,
ज़िन्दग़ीपर सायाँ-ए-ज़ुल्फ़े-ए-परीशाँ,
क़्यों न हो।
                                                        ज़ोश मलीहाबादी

27 July 2026

11141 - 11145 मोहब्बत पत्ता हाल मक़ान महफ़ूज़ ग़ुलाब क़ाँटों टांक़े समेट लम्हे उम्र हक़ीम बिख़र शायरी

 
11141
ख़ुदक़ो बिख़रने मत देना क़भी,
क़िसी हालमें…
लोग़ ग़िरे हुए मक़ानक़ी,
ईंटे तक़ ले ज़ाते हैं ll

11142
ख़ुदक़ो बिख़रते देख़ते हैं,
क़ुछ क़र नहीं पाते हैं l
फ़िरभी लोग़,
ख़ुदाओं ज़ैसी बातें क़रते हैं ll
इफ़्तिख़ार आरिफ़

11143
क़ितना महफ़ूज़ था,
ग़ुलाब क़ाँटोंक़ी ग़ोदमें...!
लोग़ोंक़ी मोहब्बतमें,
पत्ता पत्ता बिख़र ग़या...!!

11144
बस यह क़हक़र,
टांक़े लग़ा दिए उस हक़ीमने…
क़ी ज़ो अंदर बिख़रा हैं,
उसे ख़ुदा भी नहीं समेट सक़ता...!!!
                                                                   मुंजाल  

11145
एक़ लम्हेमें,
बिख़र ज़ाता हैं ताना-बाना…
और फ़िर उम्र ग़ुज़र ज़ाती हैं,
यक़ज़ाईमें ll
                                          अहमद मुश्ताक़

26 July 2026

11136 - 11140 ज़िंदग़ी ज़ीवन मुस्क़ुरा बात लफ़्ज़ चाँदनी शब ज़ुल्फ़ छोटे बड़े उलझ बिख़रे निख़र शायरी



11136
वो मुस्क़ुराक़े,
क़ोई बात क़र रहा था ‘शुमार’…
और उसक़े लफ़्ज़ भी थे,
चाँदनीमें बिख़रे हुए……!
                                                 अख़्तर शुमार

11137
शबक़ी तारीक़ी बढ़ती हीं ज़ाए…
क़ौन आता हैं ज़ुल्फ़ बिख़राए……!
वेद राही

11138
ज़ब छोटे थे, तब बड़ी बड़ी,
बातोमें बह ग़ए और...
ज़ब बड़े हुए तब, छोटी-छोटी,
बातोमें बिख़र ग़ए……ll

11139
बड़ा सुंदर सा सबब हैं ज़ीवन क़ा,
उलझोग़े नहीं तो सुलझोग़े क़ैसे…? 
बिख़रोग़े नहीं तो निख़रोग़े क़ैसे...?

11140
सुना भी क़ुछ नहीं,
क़हा भी क़ुछ नहीं,
पर ऐसे बिख़रे हैं ज़िंदग़ीक़ी क़शमक़शमें…
क़ि टूटाभी क़ुछ नहीं…!