7 August 2018

3126 - 3130 दिल दर्द आँख आँसू संभल खैरियत तकलीफ मौत इत्तेफ़ाक़़ रास्ता भूल शायरी


3126
कहीं बह न जाऊ ए दिल,
तू संभलना जरा...
सुना हैं आज इन गलियोंमें,
वो फिरसे आये हैं...!!!

3127
अग़र होता हैं इत्तेफ़ाक़़,
तो यूँ क़्यों नहीं होता...
तुम रास्ता भूलो और,
मुझतक़ चले आओ..।

3128
तेरे हर दर्दको अपना बनालुँ ।
तेरी हर तकलीफको सिनेसे लगालुँ ।
मुझे करनी नहीं आती चोरी ।
वरना तेरे आँखोंसे आँसुकी बुंदे चुरालुँ ।।

3129
आँखोंमें आँसू हैं,
फिर भी दर्द सोया हैं...!
देखने वाले क्या जानेकी,
हँसने वाला कितना रोया हैं.......!

3130
तुम अगर चाहो तो,
पूछ लिया करो खैरियत हमारी...
कुछ हक़ दिए नहीं जाते,
ले लिए जाते हैं.......!

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