4196
मेरी ख़ूबीयो पर तो,
यहाँ सब खामोश
रहते हैं;
चर्चा मेरे बुराईपे हो तो
गूँगे भी बोल
पड़ते हैं...
4197
चुभनसी हैं इस खामोशीमें,
रूह बिखरकर
रह जाती हैं;
बस कुछ अल्फाजभर
दूरीपर हैं,
वो सुकून...
जो समेट ले
बिखरी रूहको.......
4198
जज़्बात
कहते हैं,
खामोशीसे बसर हो
जाए...
दर्दकी ज़िद
हैं की,
दुनियाको खबर हो
जाए...!
4199
शोर करते रहो
तुम...
सुर्ख़ियोंमें आनेका...!
हमारी तो खामोशियाँ भी...
एक अखबार
हैं.......
4200
ये जो मुस्कराहटका,
"लिबास"
पहना हैं मैंने...
दरअसल
"खामोशियों" को,
रफ़ू करवाया
हैं मैंने.......
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