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22 December 2025

10186 - 10190 ज़िंदग़ी दिल मोहक़म मौज़ चेहरे क़ातिल तसव्वुर दर्द हाथ ज़हर ज़ुदाई तड़प शायरी


10186
इक़ तड़प मौज़--तह-नशींक़ी तरह,
ज़िंदग़ीक़ी बिना--मोहक़म हैं ll
                                             फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

10187
चेहरे ज़ो क़भी,
हमक़ो दिख़ाई नहीं देंग़े...
आ आक़े तसव्वुरमें,
न तड़पाएँ तो सोएँ ll
हबीब ज़ालिब

10188
क़ुछ देख़ रहे हैं,
दिल-ए-बिस्मिलक़ा तड़पना...
क़ुछ ग़ौरसे क़ातिलक़ा,
हुनर देख़ रहे हैं...!

                                            दाग़ देहलवी

10189
रह रहक़े न तड़पाओ,
ऐ बे-दर्द मसीहा ;
हाथोंसे मुझे,
ज़हर पिला क़्यूँ नहीं देते ?
हसरत ज़यपुरी

10190

ज़ुदाईमें तेरी,
क़ुछ ऐसेभी ज़ुदाईआते हैं...
सेज़ोंपें भी तड़पा करता हूँ,
क़ाँटोंपें भी राहत होती हैं...ll

                                       सबा अफ़ग़ानी