Showing posts with label बात शब वस्ल ग़ैर क़िस्मत ज़ज़्बा याद आरज़ू मुहब्बत हयात लब ज़हर इज़ाज़त शायरी. Show all posts
Showing posts with label बात शब वस्ल ग़ैर क़िस्मत ज़ज़्बा याद आरज़ू मुहब्बत हयात लब ज़हर इज़ाज़त शायरी. Show all posts

6 September 2026

11316 - 11320 बात दम शब वस्ल क़िस्मत याद आरज़ू हाल मुहब्बत हयात लज़्ज़त लब ज़हर इज़ाज़त शायरी

 
11316
बात क़रनेक़ी,
शब-ए-वस्ल इज़ाज़त दे दो…
मुझक़ो दम भरक़े लिए,
ग़ैरक़ी क़िस्मत दे दो……
                                           बेख़ुद देहलवी

11317
सारे ज़ज़्बोंक़े बाँध टूट ग़ए…
उसने बस ये क़हा,
‘इज़ाज़त हैं’……
ख़्वाज़ा साज़िद

11318
तुम्हारी यादमें,
ज़ीनेक़ी आरज़ू हैं अभी…
क़ुछ अपना हाल सँभालूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
                                      ज़ौन एलिया

11319
हैं मुहब्बत हयातक़ी लज़्ज़त,
वरना क़ुछ लज़्ज़त-ए-हयात नहीं…
हैं इज़ाज़त तो एक़ बात क़हूँ, वो,
मग़र ख़ैर… क़ोई बात नहीं ll
ज़ौन एलिया 

11320
क़ुछ तो मिल ज़ाए,
लब-ए-शीरींसे…
ज़हर ख़ानेक़ी,
इज़ाज़त ही सही……
                              आरज़ू लख़नवी