7 August 2016

485 दिल ठान कमबख्त पल्लू अल्फाज बगावत शायरी


485

Bagawat, Upraise 

ठान लिया था मेरे दिलने,
के अब शायरी नहीं करेंगे...
कमबख्त उनका पल्लू क्या गिरा,
अल्फाज बगावत कर बैठे...

My Heart had Determined,
Not to make any Poem...
Damned her Stole Dropped down,
and Words Upraised... 

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