2 June 2026

10716 - 10720 ज़िन्दग़ी याँद तमन्ना ग़िरवी पसंद फ़र्क़ क़माल लफ्ज़ इत्तेफ़ाक़ रूठी क़ीमत तरक़ीब बहाने मुस्क़ुरा शायरी

 
10716
हमें बस मुस्क़ुराना पसंद हैं,
फ़िर...
हमारा हो या तुम्हारा...
फ़र्क़ क़्या पड़ता हैं......
!!! 

10717
मुस्क़ुराहट एक़,
क़मालक़ी पहें हैं l
ज़ितना बताती हैं,
उससे क़हीं ज़्यादा छुपाती हैं ll

10718
लफ्ज़ोंक़े इत्तेफ़ाक़में,
यूँ बदलाव क़रक़े देख़ l
तू देख़क़र न मुस्क़ुरा,
बस मुस्क़ुराक़े देख़ !

10719
तू रूठी रूठीसी लग़ती हैं,
क़ोई तरक़ीब बता मनानेक़ी,
मैं ज़िन्दग़ी ग़िरवी रख़ दूंग़ा,
तू क़ीमत बता मुस्क़ुरानेक़ी।

10720
मुस्क़ुरानेक़े अब,
बहाने नहीं ढूंढ़ने पड़ते…
तुझे याँद क़रते हैं तो,
तमन्ना पूरी हो ज़ाती हैं !

1 June 2026

10711 - 10715 दिल रिश्ता क़मज़ोर ड़ोर संग़ीन सयाना बिग़ड़ तड़प मुसीबतअनसुने ख़ामोशी शायरी

 
10711
रिश्तोंक़ी ड़ोर,
तब क़मज़ोर होने लग़ती हैं…
ज़ब दोनों तरफ़से,
ख़ामोशी होने लग़ती हैं !

10712
ज़ब ख़ामोशी होती हैं,
तब दिलक़ी आवाज़ तेज़ होती हैं…
सब सुनते हैं, पर शायद हम ही,
अनसुने रह ज़ाते हैं !

10713
ख़मोशीसे मुसीबत,
और भी सं
ग़ीन होती हैं …
तड़प ऐ दिल तड़पनेसे,
ज़रा तस्कीन होती हैं !

10714
लोग़ क़हते हैं क़ि,
वो बड़ा सयाना हैं
उन्हें क़्या पता,
ख़ामोशीसे उसक़ा रिश्ता पुराना हैं !

10715 
बोलनेसे ज़ब,
बात बिग़ड़ ज़ाए हर बार…
तब रिश्तोंमें ख़ामोशी ही,
भली लग़ती हैं यार !

31 May 2026

10706 - 10710 वक़्त बात लफ़्ज़ गुलाम बान ज़वाब इत्मीनान लम्हों दुनियाँ ख़ामोशी शायरी

 
10706
क़भी वक़्तक़ी मारने,
चुप क़रा दिया हमें…
तो क़भी ख़ामोशीने ही,
वक़्तसे लड़ना सिख़ा दिया हमें !

10707
ज़रूरी नहीं क़ि,
हर बात लफ़्ज़ोंक़ी गुलाम हो ;
ख़ामोशीभी ख़ुदमें,
इक़ बान होती हैं…!

10708
वक़्तक़ो गुज़र ज़ाने दो,
ज़रा इत्मीनानसे…
ज़वाब ख़ुद मिलेग़ा सबक़ो,
मेरी ख़ामोशीक़ी ज़ुबानसे !

10709
ख़ामोश लम्होंमें,
एक़ दुनियाँ बसती हैं
ज़हाँ हर बात,
बिना लफ़्ज़ोंक़े क़ह ज़ाती हैं !

10710
ख़ामोश हूँ मैं क़्योंक़ि,
अभी मेरा वक़्त नहीं…
वरना ज़ो मेरे पास हैं,
वो क़िसीक़े पास नहीं !

30 May 2026

10701 - 10705 ग़हराई ज़वाब लफ़्ज़ आँख़ आलम दिल बातें अज़ीब ज़ज़्बात वक़्त सितम असलियत ग़िला शिक़वा ख़ामोशी शायरी

 
10701
ख़ामोशीक़ी ग़हराईमें अक़्सर
ज़वाब छुपें होते हैं l
ज़ो लफ़्ज़ नहीं क़ह पाते,
वो आँख़ोंसे बोंलते हैं ll

10702
ज़ब ख़ामोशीक़ा आलम होता हैं…
तब दिल सबसे ज़्यादा बातें क़रता हैं !

10703
अज़ीबसी ख़ामोशी हैं,
हम दोनोंक़े दरमियाँ…
बात तो होती हैं मग़र,
वो ज़ज़्बात नहीं होते !

10704
ये वक़्तक़ी ख़ामोशीभी,
क़्या अज़ीब सितम ढाती हैं…
बिना क़ुछ क़हें ही,
अपनोंक़ी असलियत दिख़ा ज़ाती हैं !

10705
ग़िला शिक़वा ही क़र डालो,
क़े क़ुछ वक़्त क़ट ज़ाए…
लबोंपें आपक़े यह ख़ामोशी,
अच्छी नहीं लग़ती !

29 May 2026

10696 - 10700 दिल बेवज़ह याँद लफ्ज़ बयाँ दर्द आँख़ अफ़सोस ख़ुशी चेहरे आवाज़ ख़ामोशी शायरी

 
10696
ज़ो लफ्ज़ोंमें बयाँ न हो सक़े,
वो दर्द आँख़ोंमें तैर ज़ाता हैं l
क़भी-क़भी क़िसीक़ी ख़ामोशी,
बहुत क़ुछ क़ह ज़ाती हैं ll

10697
मेरी ख़ामोशी थी,
ज़ो सब क़ुछ सह ग़यी l
उसक़ी याँदें ही अब,
इस दिलमें रह ग़यी !


10698
दर्द इतना हैं क़ि,
रहने लग़ा हूँ ख़ामोश…
इस बातक़ा मुझे,
नहीं हैं क़ोई अफ़सोस !

10699
ख़ुशी हैं चेहरेपर,
दिलमें ख़ामोशी भरी हैं l
याँदमें तेरे यह आँख़ें,
हर पल रो पड़ी हैं !

10700
दर्द हदसे ज़्यादा हो,
तो आवाज़ छीन लेती हैं ;
ऐ दोस्त क़ोई ख़ामोशी,
बेवज़ह नहीं होती हैं !

28 May 2026

10691 - 10695 बेवज़ह बर्दाश्त ग़िला तड़प आवाज़ अल्फाज़ ज़िन्दा ज़वाब सज़ा क़हानी ग़ौर ख़ामोश ख़ामोशी शायरी

 
10691
बेवज़ह ख़ामोश नहीं हूँ मैं,
क़ुछ तो बर्दाश्त क़िया होग़ा मैने।
न ज़ाने क़ौनसा ग़िला हैं तुझक़ो हमसे…
क़ि तू ख़ामोश रहता हैं।l

10692
ख़ामोशी भी बोलती हैं,
अग़र समझनेवाला हो…
हर आवाज़में एक़ क़हानी होती हैं,
अग़र सुननेवाला हो !

10693
तड़प रहें हैं हम,
तुमसे एक़ अल्फाज़क़े लिए…
तोड़ दो ख़ामोशी,
हमें ज़िन्दा रख़नेक़े लिए…!

10694
क़भी-क़भी ख़ामोशीभी,
एक़ ज़वाब होती हैं ;
मग़र रिश्तोंमें,
ये सज़ा-ए-आज़ाब होती हैं ll

10695
मेरी ख़ामोशीभी एक़ पुक़ार हैं,
ग़ौरसे सुन…
शायद वो मिल ज़ाए,
ज़ो मैं लफ़्ज़ोंमें न क़ह सक़ा !

27 May 2026

10686 - 10890 दिल मोहब्बत प्यार याद अरमान बातें सिलसिला ग़िला शिक़वा ख़मोशी ख़ामोशी शायरी

 
10686
क़ैसी हैं ये मोहब्बत,
क़ैसा ये प्यार हैं…
एक़ तरफ़ हैं ख़ामोशी,
एक़ तरफ़ इंतज़ार हैं ll

10687
ज़ो सुनता हूँ,
सुनता हूँ, मैं अपनी ख़मोशीसे…
ज़ो क़हती हैं,
क़हती हैं, मुझसे मिरी ख़ामोशी…!

10688
ख़ामोशीमें छिपी बातें,
दिलक़े अरमान बताती हैं l
ज़ब क़ोई नहीं बोलता,
तब भी ख़्वाहिशें ज़ग़ाती हैं !!

10689
न क़ोई शिक़वा,
न क़ोई ग़िला हैं अब…
बस तेरी यादमें,
ख़ामोशीक़ा सिलसिला हैं अब !

10690
वक़्त ग़वाह हैं क़ि,
ख़ामोशी क़भी बेवज़ह नहीं होती…
क़ुछ ज़ख्म ही ऐसे होते हैं,
ज़िनक़ी दवा नहीं होती !

25 May 2026

10861 - 10865 अज़ीब शोर सन्नाटे इज़हार ज़बां आँख़ बात दीवाना लफ़्ज़ इशारा दिन रात ख़मोशी शायरी

 
10861
अज़ीब शोर मचाने लग़े हैं,
सन्नाटे ये…
क़िस तरहक़ी ख़मोशी,
हर इक़ सदामें हैं……
                                    आसिम वास्ती

10682
इज़हारपें भारी हैं,
ख़मोशीक़ा तक़ल्लुम l
हर्फ़ोंक़ी ज़बां और हैं,
आँख़ोंक़ी ज़बां और…ll
हनीफ़ अख़ग़र

10683
ख़मोशीमें हर बात बन ज़ाए हैं;
ज़ो बोले हैं दीवाना क़हलाए हैं ll
                                                  क़लीम आज़िज़

10684
एक़ दिन मेरी ख़ामुशीने मुझे,
लफ़्ज़क़ी ओटसे इशारा क़ियाँ !
 अंज़ुम सलीमी

10685
याँर सब ज़म्अ हुए,
रातक़ी ख़ामोशीमें ;
क़ोई रोक़र तो क़ोई,
बाल बनाक़र आया ll
                             अहमद मुश्ताक़

24 May 2026

10856 - 10860 रूह अज़ब चीज़ चमन क़ली तड़प लफ़्ज़ ढुँढ नींद ज़िक़्र नफ़स ख़मोशियाँ ख़ामुशी ख़ामोशी शायरी

 
10856
निक़ाले ग़ए इसक़े मअ'नी हज़ार…
अज़ब चीज़ थी इक़ मिरी ख़ामुशी !!!
                                         ख़लील-उर-रहमान आज़मी

10557
चमनसे क़ौन चला हैं,
ख़मोशियाँ लेक़र…
क़ली क़ली तड़प उट्ठी हैं,
सिसक़ियाँ लेक़र……

10858
सुनती रहीं मैं,
सबक़े दुख़ ख़ामोशीसे ;
क़िसक़ा दुख़ था मेरे ज़ैसा,
भूल ग़ई……
                                      फ़ातिमा हसन

10859
लफ़्ज़ तो सारे,
सुने सुनाये हैं l
अब तु मेरी ख़ामोशीमें,
ढुँढ ज़िक़्र अपना.....

10860
मिरे साज़-ए-नफ़सक़ी ख़ामुशीपर,
रूह क़हती हैं l
न आई मुझक़ो नींद और,
सो ग़या अफ़्साना-ख़्वाँ मेरा ll
                                                   इज़्तिबा रिज़वी

23 May 2026

10851 - 10855 दिल आरज़ू अफ़्साना इख़्तियाँर क़िस्मत बात फ़साने राते शुमार ख़ामुशी शायरी


10851
ख़मोशी मेरी मअनी-ख़ेज़ थी,
ऐ आरज़ू क़ितनी…
क़ि ज़िसने ज़ैंसा चाहा,
वैसा अफ़्साना बना ड़ाला…
                                          आरज़ू लख़नवी

10852
ज़ोर क़िस्मतपें चल नहीं सक़ता…l
ख़ामुशी इख़्तियाँर क़रता हूँ……ll

10853
बोल पड़ता तो,
मिरी बात मिरी हीं रहती…
ख़ामुशीने हैं दिए,
सबक़ो फ़साने क़्या क़्या……
                                          अज़मल सिद्दीक़ी

10854
ख़ामोश हैं ये ज़ुबां,
सुनीसी हैं राते l
न दिलक़ा ठिक़ाना हैं,
न दिलक़ा बसेरा ll

10855
घड़ी ज़ो बीत ग़ई,
उसक़ा भी शुमार क़िया l
निसाब-ए-ज़ाँमें,
तिरी ख़ामुशीभी शामिल क़ी…!
                                               ज़ावेद नासिर

22 May 2026

10846 - 10850 दुनियाँ लोग़ सयाना रिश्ता चटख़ टूट रिश्ता आवाज़ नौहा तन्हाई परवाह डर ख़ामुशी ख़ामोशी शायरी

 
10846
लोग़ क़हते हैं क़ि,
वो बड़ा सयाना हैं
उन्हें क़्या पता ख़ामोशीसे,
उसक़ा रिश्ता पुराना हैं !!

10847
चटख़क़े टूट ग़ई हैं,
तो बन ग़ई आवाज़
ज़ो मेरे सीनेमें,
इक़ रोज़ ख़ामुशी हुई थी ll
सालिम सलीम

10848
मैने अपनी एक़,
ऐसी दुनियाँ बसाई हैं
ज़िसमें एक़ तरफ़ ख़ामोशी,
और दूसरी तरफ़ तन्हाई हैं ll

10849
ख़ामुशी छेड़ रहीं हैं,
क़ोई नौहा अपना
टूटता ज़ाता हैं,
आवाज़से रिश्ता अपना……
साक़ी फ़ारुक़ी

10850
लोगोंक़ी परवाह नहीं,
तेरी ख़ामोशीक़ा डर हैं
तू हीं मेरी दुनियाँ हैं,
तू हीं मेरा घर हैं ll

21 May 2026

10841 - 10845 दिल मोहब्बत सोज़ साज़ आँख़ बात सीख़ तस्वीर अश्क़ चीख़ आवाज़ ख़मोशी शायरी

 
10841
आँख़ोंसे बात क़रना,
क़ोई उनसे सीख़ें…
ख़ामोश रहक़रभी,
बातें क़रना उनसे सीख़ें…!

10842
मोहब्बत सोज़भी हैं,
साज़भी हैं ;
ख़मोशीभी हैं,
ये आवाज़भी हैं ll
अर्श मलसियानी

10843
ख़ामोशी और उदासीभरी,
एक़ शाम आएग़ी…
मेरी एक़ तस्वीर सम्भालक़र रख़ना,
तुम्हारे क़ाम आएग़ी……

10844
इक़ अश्क़ क़ह-क़होंसे,
गुज़रता चला ग़या l
इक़ चीख़ ख़ामुशीमें,
उतरती चली ग़ई ll
अमीर इमाम

10845
दिलक़ी बात कैसे समझाऊं…
तेरी ख़ामोशी कैसे मिटाऊं……!

20 May 2026

10836 - 10840 दिल बेपनाह प्यार जंग़ ज़ीत ग़लत मतलब बात इख़्तियार ज़िन्दग़ी ज़माना दर्द बेक़रार ज़बान शौक़ ख़ामोशी शायरी

 
10836
सोचा था क़ी ख़ामोश रहक़र,
हर जंग़ ज़ीत लेंग़े…
क़्या पता था क़ी लोग़ उसक़ाभी,
ग़लत मतलब निक़ाल लेंग़े……

10837
ख़ामोशीक़ा हासिलभी,
इक़ लम्बीसी ख़ामोशी थी l
उनक़ी बात सुनीभी हमने,
अपनी बात सुनाई भी……ll
गुलज़ार

10838
ख़ामोशीक़ो इख़्तियार क़र लेना,
अपने दिलक़ो थोड़ा बेक़रार क़र लेना…
ज़िन्दग़ीक़ा असली दर्द लेना हो तो,
बस क़िसीसे बेपनाह प्यार क़र लेना……!

10839
ख़ुली ज़बान तो,
ज़र्फ़ उनक़ा हो ग़या ज़ाहिर…
हज़ार भेद छुपा रक़्ख़े थे,
ख़मोशीमें……
अनवर सदीद

10840
मेरी ख़ामोशी देख़क़र,
मुझसे ये ज़माना बोला क़ि;
तेरी संज़ीदग़ी बताती हैं,
तुझे हँसनेक़ा 
शौक़ था क़भी…

19 May 2026

10831 - 10835 मोहब्बत इज़हार बदनाम नज़र क़ान क़ाग़ज़ ख़्याल अफ़सोस रुला ग़हरी ज़हरी ख़ामोशी शायरी


10831
अच्छा क़रते हैं वो लोग़,
ज़ो मोहब्बतक़ा इज़हार नहीं क़रते l
ख़ामोशीसे मर ज़ाते हैं मग़र,
क़िसीक़ो बदनाम नहीं क़रते ll

10832
तुम्हारे ख़तमें नज़र आई,
इतनी ख़ामोशी…
क़ि मुझक़ो रख़ने पड़े,
अपने क़ान क़ाग़ज़पर…!
यासिर ख़ान इनाम

10833
तुमसे ज़्यादा,
तुम्हारे ख़्यालोंने सताया हैं…
बातोंक़ा अफ़सोस नहीं,
तेरी ख़ामोशीने रुलाया हैं……!

10834
बहुत ग़हरी हैं,
उसक़ी ख़ामुशीभी…
मैं अपने क़दक़ो,
छोटा पा रहीं हूँ……
फ़ातिमा हसन

10835
ज़रा ख़्याल क़िज़िए,
मर न ज़ाऊँ क़हीं…
बहुत ज़हरीली हैं तेरी ख़ामोशी,
मैं पी न ज़ाऊँ क़हीं !

18 May 2026

10826 - 10830 दिल बात इल्म हंग़ामा इब्तिदा इंतिहा रूठ फ़र्क़ रंग़ तस्वीर क़िरदार ख़ामोशी शायरी


10826
उसक़ी ख़ामोशीमें क़ुछ बात हैं,
दिलमें बहुत आवाज़ हैं l
बाहरसे चुप हैं वो पर,
दिलमें छुपी क़ोई बात हैं !

10827
इल्मक़ी इब्तिदा हैं हंग़ामा l
इल्मक़ी इंतिहा हैं ख़ामोशी ll
फ़िरदौस ग़यावी

10828
मेरे रूठ ज़ानेसे अब,
उनक़ो क़ोई फ़र्क़ नहीं पड़ता…
बेचैन क़र देती थी क़भी,
ज़िसक़ो ख़ामोशी मेरी !

10829
रंग़ दरक़ार थे हमक़ो,
तिरी ख़ामोशीक़े…
एक़ आवाज़क़ी तस्वीर,
बनानी थी हमें……
 नाज़िर वहीद

10830
ख़ामोशीमें आवाज़क़ा,
क़िरदार क़ोई हैं……
ज़ो बोलता रहता हैं,
लग़ातार क़ोई हैं……!
 

17 May 2026

10821 - 10825 दिल मोहब्बत इश्क़ बात अदा रस्म हंग़ामा तमन्ना मिज़ाज़ बज़्म वफ़ा लब ख़ामोशी शायरी


10821
उसने क़ुछ क़हाभी नहीं,
और मेरी बात हो ग़ई…
बड़ी अच्छी तरहसे उसक़ी,
ख़ामोशीसे मुलाक़ात हो ग़ई !

10822
ख़मोशीसे अदा हो रस्म-ए-दूरी,
क़ोई हंग़ामा बरपा क़्यूँ क़रें हम ll
ज़ौन एलिया

10823
अग़र मोहब्बत नहीं थी तो फक़त,
एक़ बार बताया तो होता…
ये क़म्बख़त दिल तुम्हारी ख़ामोशीक़ो,
इश्क़ समझ बैठा !!

10824
हम न मानेंग़े ख़मोशी हैं,
तमन्नाक़ा मिज़ाज़…
हाँ भरी बज़्ममें वो,
बोल न पाई होग़ी……
क़ालीदास गुप्ता रज़ा

10825
उसने क़ुछ इस तरहसे,
क़ी बेवफ़ाई…
मेरे लबोंक़ो ख़ामोशीही,
रास आई !

16 May 2026

10816 - 10820 हाल दिल शोर क़ाएनात शब रौशन तराना चीख़ चीज़ लब ख़ामुशी ख़ामोशी शायरी


10816
शोर ज़ितना हैं क़ाएनातमें शोर,
मेरे अंदरक़ी ख़ामुशीसे हुआ ll
                                            क़ाशिफ़ हुसैन ग़ाएर

10817
शब-ए-हिज़्रां बुझा बैठी हूँ मैं,
सारे सितारेपर…
क़ोई फ़ानूस रौशन हैं,
ख़मोशीसे मेरे अंदर !

10818
मिरी प्यासक़ा तराना,
यूँ समझ न आ सक़ेग़ा l
मुझे आज़ सुनक़े देख़ो,
मिरी ख़ामोशीसे आग़े ll
                                     नीना सहर

10819 
ख़ामोशीसे ज़ब,
तुम भर ज़ाओग़े…
चीख़ लेना थोड़ा,
वरना मर ज़ाओग़े !

10820
हम लबोंसे क़ह न पाए उनसे,
हाल-ए-दिल क़भी…
और वो समझे नहीं,
ये ख़ामुशी क़्या चीज़ हैं ll
                                            निदा फ़ाज़ली

15 May 2026

10811 - 10815 दिल प्यार चेहरे फ़रेब नज़र दर्द आदत ग़ज़ल नज़्म आहिस्ते जु़बां इज़हार मोहब्बत ख़ामोश शायरी

 
10811
मेरे दिलक़ो अक्सर छू लेते हैं,
ख़ामोश चेहरे…
हंसते हुए चेहरोंमें,
मुझे फ़रेब नज़र आता हैं l

10812
अब तो आदतसी हो ग़ई हैं,
ख़ामोश रहनेक़ी…
क़भी दर्दसे, क़भी लोग़ोंसे,
क़भी ख़ुदसे!

10813 
मैं क़ोई ख़ामोशसी ग़ज़ल ज़ैसा हूँ,
या हूँ क़ोई नज़्म ज़ैसा धीमेंसे गुनगुनाता हुआ…
तभी तो वो भी मुझे पढ़ते हैं,
आहिस्ते आहिस्तेसे ll

10814
प्यारमें बहुत क़ुछ,
सहना पड़ता हैं…
क़भी-क़भी,
ख़ामोश रहना पड़ता हैं !

10815
जु़बां ख़ामोश मग़र,
नज़रोंमें उज़ाला देख़ा l
उसक़ा इज़हार-ए-मोहब्बतभी,
निराला देख़ा ll

14 May 2026

10806 - 10810 दिल पन्ना मुद्दत बिख़र सिमट तन्हाई ख़त क़हानी हादसे बात यक़ीनन ख़ामोश शायरी

 
10806
मुद्दतसे बिख़रा हूँ,
सिमटनेमें देर लग़ेग़ी…
ख़ामोश तन्हाईसे निपटनेमें देर लग़ेग़ी…
तेरे ख़तक़े हर सफ़हेक़ो,
पढ़ रहा हूँ मैं,
हर पन्ना पलटनेमें यक़ीनन देर लग़ेग़ी।

10807
अधूरी क़हानीपर,
ख़ामोश होठोंक़ा पहरा हैं l
चोट रूहक़ी हैं,
इसलिए दर्द ज़रा ग़हरा हैं !

10808
बिख़रे हैं अश्क़ क़ोई साज़ नहीं देता,
ख़ामोश हैं सब क़ोई आवाज़ नहीं देता l
क़लक़े वादे सब क़रते हैं,
मग़र क़्यूँ क़ोई साथ, आज़ नहीं देता ।

10809
हूँ अग़र ख़ामोश तो ये न समझ,
क़ि मुझे बोलना नहीं आता…
रुला तो मैं भी सक़ता था,
पर मुझे क़िसीक़ा,
दिल तोड़ना नहीं आता।

10810
क़ुछ हादसे इंसानक़ो,
इतना ख़ामोश क़र देते हैं क़ि…
ज़रूरी बात क़हनेक़ो भी,
दिल नहीं क़रता……

13 May 2026

10801 - 10805 ज़िंदग़ी बहाने बात वक़्त हालात महफ़िल रौनक़ सवाल दर्द उदास मुस्क़ुरा ख़ामोश शायरी


10801
झूठक़ी ज़ीत उसी वक़्त,
तय हो ज़ाती हैं,
ज़ब सच्चाई ज़ाननेवाला इंसान,
ख़ामोश रह ज़ाता हैं।

10802
हालातोंने क़र दिया,
हमें ख़ामोश… वरना,
हमारे रहते हर महफ़िलमें,
रौनक़ रहती थी……!

10803
उससे फ़िर उसक़ा रब,
फ़रामोश हो ग़या…
जो वक़्तक़े सवालपर,
ख़ामोश हो ग़या।

10804
क़ुछ दर्द ख़ामोश क़र देते हैं,
वरना मुस्क़ुराना क़ौन नहीं चाहता...?

10805
उदास हैं मेरी ज़िंदग़ीक़े सारे लम्हे,
एक़ तेरे ख़ामोश हो ज़ानेसे…
हो सक़े तो बात क़र लेना,
क़भी क़िसी बहानेसे…...!