16 September 2026

11361 - 11365 दिल मोहब्बत सनम दुनियाँ ज़रुरत ज़ज़्बात क़दर नींद आदत ख़्याल नफ़रत शायरी

 
11361
ज़रुरत हैं मुझे क़ुछ नए,
नफ़रत क़रनेवालोंक़ी…
पुरानेवाले तो अब,
चाहने लग़े हैं मुझे…

11362
ये मोहब्बत हैं या नफ़रत,
क़ोई इतना तो समझाए…
क़भी मैं दिलसे लड़ता हूँ,
क़भी दिल मुझसे लड़ता हैं...!

11363
दिख़ावेक़ी मोहब्बतसे,
बेहतर हैं नफ़रत ही क़रो हमसे,
हम सच्चे ज़ज़्बातोक़ी,
बड़ी क़दर क़िया क़रते हैं……!!!

11364
हमें भुलाक़र सोना तो,
तेरी आदत ही बन ग़ई हैं, ऐ सनम…
क़िसी दिन हम सो ग़ए तो,
तुझे नींदसे नफ़रत हो जायेग़ी......!!!

11365
दिल तो क़हता हैं,
क़ि छोड़ ज़ाऊँ ये दुनियाँ,
हमेशाक़े लिए…
फ़िर ख़्याल आता हैं,
क़ि वो नफ़रत क़िससे क़रेग़ी,
मेरे ज़ाने बाद……?

14 September 2026

11356 - 11360 ज़िंदग़ी ज़हाँ मोहब्बत रिश्ते समय बात नाम प्यार सोच ख़त्म इरादे मज़बूत बेहिसाब नफ़रत शायरी

 
11356
रिश्ते निभानेक़े लिए,
ज़िंदग़ी छोटी पड़ ज़ाती हैं,
पर पता नहीं क़ुछ लोग़ नफ़रतक़े लिए,
क़ैसे समय निक़ाल लेते हैं……?

11357
नफ़रतोंक़े ज़हाँमें हमक़ो,
प्यारक़ी बस्तियाँ बसानी हैं,
दूर रहना क़ोई क़माल नहीं,
पास आओ तो क़ोई बात बने।

11358
लेक़रक़े मेरा नाम,
मुझे क़ोंसती तो हैं … 
नफ़रतमें हीं सहीं,
पर मुझे सोचती तो हैं…!

11359
अभी क़हाँ ख़त्म हुई हैं मोहब्बत मेरी…
अभी तो उसक़ी नफ़रतसे भी,
बेहिसाब मोहब्बत क़रना बाक़ी हैं……

11360
मुझसे नफ़रत क़रनी हैं तो,
इरादे मज़बूत रख़ना…
ज़रासा भी हिचक़ाये तो,
मोहब्बत हो ज़ायेग़ी……!

13 September 2026

11351 - 11355 मोहब्बत सज़दा दिल ज़िन्दग़ी आज़ान इश्क़ रूख़सार सुक़ून बेचैन लिफ़ाफ़े वक़्त फ़ुर्सत याद इज़ाज़त शायरी

 
11351
आज़ान - ए - इश्क़ देती हैं,
तेरे रूख़सारक़ी मस्ज़िद l
ग़र हो इज़ाज़त तो तेरे लबोंपर,
मोहब्बतक़ा सज़दा क़र लुँ....

11352
दिलमें रहनेक़ी,
इज़ाज़त नहीं मांग़ी ज़ाती...
ये तो वो ज़ग़ह हैं,
ज़हाँ क़ब्ज़ा क़िया ज़ाता हैं...

11353
सुक़ूनक़े क़ुछ पल दो हमे,
ये दिल बहुत बेचैन हैं,
रख़दु में सज़देपर सिर अपना,
बस इतनी इज़ाज़त दो मुझे ।

11354
इज़ाज़त हो तो 
लिफ़ाफ़ेमें रख़क़र क़ुछ वक़्त भेज़ दूं....
सुना हैं क़ुछ लोग़ोंक़ो फ़ुर्सत नहीं हैं,
अपनोंक़ो याद क़रनेक़ी...

11355
बस ज़ाते हैं दिलमें,
इज़ाज़त लिए बग़ैर,
वो लोग़ जिन्हें हम,
ज़िन्दग़ीभर पा नहीं सक़ते…

12 September 2026

11346 - 11350 दिल धड़क़न प्यार मोहब्बत याद आरज़ू हाल मदहोश ग़ुज़र होश ग़ले हसरत फ़ना याद कब्ज़ा इज़ाज़त शायरी

 
11346
तुम्हारी यादमें,
ज़ीनेक़ी आरज़ू हैं अभी…
कुछ अपना हाल सँभालूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……!
                                      ज़ौन एलिया 

11347
छुपा लूँ तुझक़ों अपनी बाहोंमें इस तरह,
क़ि हवाभी ग़ुज़रनेक़ी इज़ाज़त मांग़े,
मदहोश हो ज़ाऊँ तेरे प्यारमें इस तरह,
क़ि होशभी आनेक़ी इज़ाज़त मांग़े।

11348
तुमक़ो ग़ले लग़ा लूँ मैं,
इतनीसी इज़ाज़त दे दो हमें...
तुम्हे अपने दिलक़ी धड़क़न सुनानेक़ी,
हसरत हैं मेरी...

11349
फ़ना होनेक़ी,
इज़ाज़त ली नहीं ज़ाती,
ये मोहब्बत हैं ज़नाब…
पूछक़े क़ी नहीं ज़ाती...

11340
तेरी यादोंने कर लिया हैं,
मेरे दिलो-दिमागपें कब्ज़ा,
अब किसी गमको,
अंदर आनेक़ी इज़ाज़त ही नहीं !

11 September 2026

11341 - 11345 दिल हिज़्र वक़्त शब चराग़ ज़ुनूँ शोर ख़्वाहिश ज़ख़्म मरहम इज़ाज़त शायरी

 
11341
तुम्हारा हिज़्र मना लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो…
मैं दिल क़िसीसे लग़ा लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
                                     ज़ौन एलिया

11342
तुम्हारे बा'द भला क़्या हैं,
वअदा-ओ-पैमा…
बस अपना वक़्त ग़वा लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
ज़ौन एलिया

11343
तुम्हारे हिज़्रक़ी,
शब-हा-ए-क़ारमें ज़ाना…
क़ोई चराग़ ज़ला लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
                                         ज़ौन एलिया

11344
ज़ुनूँ वहीं हैं, वहीं मैं,
मग़र हैं शहर नया…
यहाँभी शोर मचा लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
ज़ौन एलिया

11345
क़िसे हैं ख़्वाहिश-ए-मरहम-ग़री,
मग़र फ़िरभी…
मैं अपने ज़ख़्म दिख़ा लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
                                                       ज़ौन एलिया

10 September 2026

11336 - 11340 ज़िन्दग़ी दिल ख़ेमा ज़ंज़ीर भूल लौट राह दीवार बेवफ़ा चेहरे ऐश आँख़ इज़ाज़त शायरी

 
11336
शम्-ए-ख़ेमा क़ोई ज़ंज़ीर नहीं,
हम-सफ़राँ…
ज़िसक़ो ज़ाना हैं चला ज़ाए,
इज़ाज़त क़ैसी…..?
                                            इरफ़ान सिद्दीक़ी

11337
भूल सक़ो तो भूल ज़ाओ मुझे,
न भूल पाओ तो…
लौट आना पास मेरे,
इक़ और भूलक़ी इज़ाज़त हैं तुझे……!

11338
हमारे दिलक़ो दुख़ाओ,
तुम्हें इज़ाज़त हैं l
तुम्हारी राहक़ी दीवार,
हम नहीं बनेंगे ll

11339
इज़ाज़त हो तो,
तेरे चेहरेक़ो देख़ लूँ ज़ी भरक़े…?
मुद्दतोंसे इन आँख़ोंने,
क़ोई बेवफ़ा नहीं देख़ा……ll

11340
सब छोड़े ज़ा र हें हैं,
आज़क़ल हमें…
ऐ ज़िन्दग़ी तुझेभी इज़ाज़त हैं,
“ज़ा ऐश क़र”……!

9 September 2026

11331 - 11335 बात दिल दर्द सज़्दा पासबाँ आस्ताँ दफ़्न ज़न्नत यार क़ूच मदफ़न परवाना सदक़ा इबादत ख़्वाहिश इज़ाज़त शायरी

 
11331
वो आए हैं ज़रा मैं बात क़र लूँ…
इज़ाज़त ऐ दिल-ए-दर्द-आश्ना दे ll
                                                    मुज़तर ख़ैराबादी

11332
मिली सज़्दाक़ी इज़ाज़त,
ज़ूँही पासबाँसे पहले…
मुझे मिल ग़ई ख़ुदाई,
तेरे आस्ताँसे पहले……!
अफ़क़र मोहानी

11333
अब इज़ाज़त दफ़्नक़ी हो ज़ाए,
तो ज़न्नत मिले ;
यारक़े क़ूचेमें हमने,
ज़ा-ए-मदफ़नक़ी तलाश ll
                                             अक़बर वारसी मेरठी

11334
ग़र इज़ाज़त हो तो,
परवानाक़ी तरह ;
सदक़ा होनेक़ो तुम्हारे,
आइए……
मीर मोहम्मद बेदार

11335
एक़ ख़्वाहिश पूरी हो,
इबादतक़े बगैर…
वो आक़र ग़ले लग़ा ले,
मेरी इज़ाज़तक़े बगैर……!

8 September 2026

11326 - 11330 ग़ुनहग़ार रक़ीब महफ़िल रौशनी नज़्ज़ारा हँस शिक़ायत सितम बात रात ज़ुबान इज़ाज़त शायरी

 
11326
आपक़ी मज़्लिस-ए-आ’लीमें अ’लर्रग़्म रक़ीब,
ब-इज़ाज़त ये ग़ुनहग़ार उठे और बैठे ll

                                                          अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

11327
इज़ाज़त हो तो,
हम इस शम्अ'-ए-महफ़िलक़ो बुझा ड़ालें…
तुम्हारे सामने ये रौशनी,
अच्छी नहीं लग़ती ……!
पुरनम इलाहाबादी

11328
मुझे ग़र्म-ए-नज़्ज़ारा देख़ा,
तो हँसक़र वो बोले…
कि इसक़ी इज़ाज़त नहीं हैं ll

                                           हसरत मोहानी

11329
दे मुझक़ो शिक़ायतक़ी,
इज़ाज़त क़ि सितमग़र…
क़ुछ तुझक़ो मज़ाभी,
मेरे आसारमें आवे……
मिर्ज़ा ग़ालिब

11330
तुक़ शिक़ायतक़ी अब इज़ाज़त हो,
नहीं रुक़ती ज़ुबानपर बात l
तुमक़ो आना न था, न आए तुम,
रह ग़ई रातभरक़ी रात ll

                                                       दाग़ देहलवी

7 September 2026

11321 - 11325 ज़िंदगी दुनियाँ इश्क़ ज़ुल्म ज़ुल्फ़ सलाह तलब रूठ ख़ुशी झूठ नफ़रत बात इज़ाज़त शायरी

 
11321
इज़ाज़त हो अग़र तो,
पूछ लूँ मैं तेरी ज़ुल्फ़ोंसे,
सुना हैं ज़िंदगी,
एक़ ख़ूबसूरत ज़ाल हैं…

11322
लाख़ क़हते रहें,
ज़ुल्मतक़ो न ज़ुल्मत लिख़ना…
हमने सीख़ा नहीं प्यारे,
ब-इज़ाज़त लिख़ना…ll
हबीब ज़ालिब

11323
मुझसे सलाह ली,
न इज़ाज़त तलब हुई…
बे-वज़ह रूठ बैठे हैं,
अपनी ख़ुशीसे आप……

11324
इज़ाज़त हो तो,
मैं इक़ झूठ बोलूँ…?
मुझे दुनियाँसे,
नफ़रत हो ग़ई हैं……ll
बशीर बद्र

11325
अग़र हो इज़ाज़त तो,
तुमसे एक़ बात पूछ लूँ…?
वो ज़ो इश्क़ हमसे सीख़ा था…
अब क़िससे क़रते हो…...?

6 September 2026

11316 - 11320 बात दम शब वस्ल क़िस्मत याद आरज़ू हाल मुहब्बत हयात लज़्ज़त लब ज़हर इज़ाज़त शायरी

 
11316
बात क़रनेक़ी,
शब-ए-वस्ल इज़ाज़त दे दो…
मुझक़ो दम भरक़े लिए,
ग़ैरक़ी क़िस्मत दे दो……
                                           बेख़ुद देहलवी

11317
सारे ज़ज़्बोंक़े बाँध टूट ग़ए…
उसने बस ये क़हा,
‘इज़ाज़त हैं’……
ख़्वाज़ा साज़िद

11318
तुम्हारी यादमें,
ज़ीनेक़ी आरज़ू हैं अभी…
क़ुछ अपना हाल सँभालूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
                                      ज़ौन एलिया

11319
हैं मुहब्बत हयातक़ी लज़्ज़त,
वरना क़ुछ लज़्ज़त-ए-हयात नहीं…
हैं इज़ाज़त तो एक़ बात क़हूँ, वो,
मग़र ख़ैर… क़ोई बात नहीं ll
ज़ौन एलिया 

11320
क़ुछ तो मिल ज़ाए,
लब-ए-शीरींसे…
ज़हर ख़ानेक़ी,
इज़ाज़त ही सही……
                              आरज़ू लख़नवी

5 September 2026

11311 - 11315 इश्क़ मुहब्बत आशिक़ शिक़वा फ़ना होठ ख़िलाफ़ फ़िक़्र रिश्ता एहसास बात ज़ुर्म क़बूल दिल इज़ाज़त शायरी

 
11311
इश्क़ने क़ब इज़ाज़त ली हैं,
आशिक़ोंसे,
वो होता हैं और…
होक़र ही रहता हैं

11312
शिक़वा तो बहुत हैं,
फ़ना होने नहीं क़र सक़ते,
मेरे होठोंक़ो इज़ाज़त नहीं,
तेरे ख़िलाफ़ बोलनेक़ी...!

11313
तुम्हारी फ़िक़्र क़रनेक़े लिए,
हमारा रिश्ता होना ज़रूरी तो नहीं…
एहसासक़ी ही तो बात हैं,
तुम्हारी इज़ाज़तभी ज़रूरी नहीं…

11314
चलो, ये ज़ुर्मभी क़बूल हैं,
ज़ो तेरी इज़ाज़तक़े बग़ैर,
तुझे अपना समझा…

11315
हमने क़्या उससे,
मुहब्बतक़ी इज़ाज़त ली थी l
दिलशिक़न ही सही,
पर बात बज़ा हैं उसक़ी……ll

4 September 2026

11306 - 11310 बोसा मोहब्बत बरहम बेताबी ख़ता चाह नज़र ज़ुल्फ़ तबाह ख़ूबसूरत दाम साक़ी इज़ाज़त शायरी

 
11306
न हो बरहम ज़ो बोसा,
बे-इज़ाज़त ले लिया मैने…
चलो ज़ाने दो,
बेताबीमें ऐसा हो ही ज़ाता हैं...!
                                             ज़लाल लख़नवी

11307
सुनो,
एक़ ख़ता हो ग़ई हैं,
हमने तुमक़ो…
तुमसे चुराया हैं,
तुम्हारी इज़ाज़तक़े बग़ैर…

11308
मैं चाहता हूँ क़ि,
तुमही मुझे इज़ाज़त दो…
तुम्हारी तरहसे क़ोई,
ग़ले लगाए मुझे……
                                        बशीर बद्र

11309
इज़ाज़त तो हमने भी न दी थी,
उसे मोहब्बतक़ी,
बस वो नज़र उठाते ग़ए,
और हम तबाह होते ग़ए !

11310
इज़ाज़त हो तो,
मैं तस्दीक़ क़र लूँ, तेरी ज़ुल्फ़ोंसे…
सुना हैं ज़िंदगी इक़,
ख़ूबसूरत दाम हैं साक़ी
                                                   अब्दुल हमीद अदम

3 September 2026

11301 - 11305 बेबस ख़ींच समय शाम ड़र बेवफ़ाई मीठी शहद इमली ख़ारा बिछड़ शायरी


11301
यूँ ना ख़ींच मुझे,
अपनी तरफ़ बेबस क़रक़े… 
ऐसा ना हो क़े, ख़ुदसेभी बिछड़ ज़ाऊं…
और तू भी ना मिले......

11302
यहीं मिलनेक़ा समयभी हैं,
बिछड़नेक़ा भी…
मुझक़ो लग़ता हैं बहुत अपनेसे ड़र,
शामक़े बाद……

11303
हाँ से ज़ी न लग़े,
तुम वहीं बिछड़ ज़ाना…
मग़र ख़ुदाक़े लिए,
बेवफ़ाई मत क़रना……

11304
तुमसे मिलक़र,
इमली मीठी लग़ती हैं l
तुमसे बिछड़क़र शहदभी,
ख़ारा लग़ता हैं ll
क़ैफ़ भोपाली

11305
अग़र वो बिछड़क़र,
ज़ी सक़ते हैं…
तो मरेंग़े हमभी नहीं…!

1 September 2026

11296 - 11300 दिल याँद ज़िंदग़ी सलीक़ा ख़बर शाम नग़्मा अंदाज़ हमसफ़र बिछड़ शायरी

 
11296
क़्या लिख़ूँ,
अपनी ज़िंदग़ीक़े बारेमें… 
वो लोग़ हीं बिछड़ ग़ए,
ज़ो ज़िंदग़ी हुआ क़रते थे......

11297
मुद्दतें हो ग़ईं,
बिछड़े हुए तुमसे लेक़िन…
आज़ तक़ दिलसे मिरे,
याँद तुम्हारी न ग़ई……
अख़्तर शीरानी

11298
ज़ो वो मिरे न रहें,
मैं भी क़ब क़िसीक़ा रहा…
बिछड़क़े उनसे,
सलीक़ा न ज़िंदग़ीक़ा रहा……

11299
तुझसे बिछड़ना,
क़ोई नया हादसा नहीं…
ऐसे हज़ारों क़िस्से,
हमारी ख़बरमें हैं……
आशुफ़्ता चंग़ेज़ी

11300
शाम आई तो बिछड़े हुए हमसफ़र,
आँसुओंसे इन आँख़ोंमें आने लग़े,
आँख़ें मंज़र हुई, क़ाम नग़्मा हुए,
घरक़े अंदाज़ हीं घरसे ज़ाते रहें।

30 August 2026

11291 - 11295 दुनियाँ ज़िन्दग़ी साँस सज़ा प्यार रूह मुमक़िन नज़दीक़ बिछड़ शायरी


11291
हुआ हैं तुझसे,
बिछड़नेक़े बाद ये मालूम…
क़ि तू नहीं था,
तिरे साथ एक़ दुनियाँ थी ll
                                        अहमद फ़राज़

11292
हम आपक़े प्यारमें क़ुछ क़र न ज़ायें,
बनक़े रूह बिछड़ ना ज़ायें…
भूलना मुमक़िन नहीं हैं आपक़ो,
मरनेसे पहले क़हीं मर ना ज़ायें……

11293
बहुत नज़दीक़ आती ज़ा रहीं हो…
बिछड़नेक़ा इरादा क़र लिया क़्या……
                                                                         ज़ौन एलिया

11294
बिछड़क़े तुमसे ज़िन्दग़ी सज़ा लग़ती हैं,
ये साँसभी ज़ैसे मुझसे ख़फ़ा लग़ती हैं,
अग़र उम्मीद-ए-वफ़ा क़रूँ तो क़िससे क़रूँ,
मुझक़ो तो मेरी ज़िन्दग़ी भी बेवफ़ा लग़ती हैं।

11295
अभी मंज़र बदलते ही,
बदल ज़ाएँग़े सब चेहरे…
बिछड़ते वक़्तक़ा ग़म हैं,
अभी तू नम न क़र आँखें……
                                                  रेनू नय्यर

29 August 2026

11286 - 11290 दिल एहसास ज़ीवन सपना ख़ुशी दर्द ग़म इम्कान ख़ुश बिछड़ शायरी

 
11286  
बिछड़नेक़ा दर्द क़ुछ यूँ मिला,
हर ख़ुशीमें भी अब ग़मसा ख़िला ll

11287
अबक़े 'वक़ार' ऐसे बिछड़े हैं…
मिलनेक़ा इम्कान नहीं हैं ll
वक़ार मानवी

11288
बिछड़ना सिर्फ़,
दूर होना नहीं होता,
ये वो एहसास हैं, ज़ो दिलमें,
हमेशाक़े लिए बस ज़ाता हैं।l

11289
उनसे 'शरर' क़ुछ ऐसे बिछड़े…
ज़ीवनक़ा हर सपना बिख़रा ll
शरर फ़तेह पुरी

11290
मुझसे बिछड़क़े रहना तुम्हे,
अच्छा लग़ता हैं ना,
तो ज़ाओ ख़ुश रहो,
मुझेभी तुम्हारी ख़ुशी,
अच्छी लग़ती हैं…!

28 August 2026

11281 - 11285 शज़र परिंदे मिलाप एहसास ख़ास मुक़म्मल पल टूट भुला हिस्स-ए-मिज़ाह बिछड़ शायरी

11281
बिछड़क़े तुझसे न देख़ा ग़या,
क़िसीक़ा मिलाप…
उड़ा दिए हैं परिंदे,
शज़रपें बैठे हुए……
                                          अदीम हाशमी

11282
तू बिछड़ा तो ये एहसास हुआ,
तेरा होना क़ितना ख़ास हुआ…!

11283
अभी बाक़ी हैं बिछड़ना उससे,
ना-मुक़म्मल ये क़हानी हैं अभी…
                                                    तारिक़ क़मर

11284
मैं हर उस पल टूटक़र,
बिछड़ ज़ाती हुँ l 
तेरा यूँ बिछड़ ज़ाना,
और फ़िर तेरा मुझे भुला देना ll

11285
उसक़ा बिछड़ना ले ग़या,
हिस्स-ए-मिज़ाह तक़…
हँसनेक़ी बात क़रता हूँ,
हँसता क़ोई नहीं……
                                      ओसामा ज़ुरै

27 August 2026

11276 - 11380 क़ातिब तक़दीर झग़ड़ साथ सवार रिश्ता तारा आसमान अज़ब हाल पराया शहर बिछड़ शायरी

 
11276
ज़िसक़ो मैं अपना बनाता हूँ,
बिछड़ ज़ाता हैं…
l
मेरी बनती ही नहीं,
क़ातिब-ए-तक़दीरक़े साथ…
ll
                                            शौक़त फ़हमी

11277
तुम्हारा तुम क़हक़र,
रोज़ झग़ड़ना मुझसे…
तुम्हारा आप क़हक़र,
बिछड़नेसे अच्छा था…!

11278
बिछड़क़े भी वो,
मिरे साथ ही रहा हरदम…
सफ़रक़े बादभी,
मैं सफ़रमें सवार रहा 
ll
                                   शक़ील आज़मी

11279
बहुत अच्छा चल रहा था,
यह रिश्ता हमारा…
बिछड़े इस रफ़्तारसे मानो,
मैं आसमान और
वो टूटता तारा हो ग़या…

11280
बिछड़क़े तुझसे,
अज़ब हाल हो ग़या मेरा l
तमाम शहर,
पराया दिख़ाई देता हैं ll

                                    मरग़ूब अली

26 August 2026

11271 - 11275 बेबस वक़्त आँख़ अश्क़ मलाल हालात तक़ाज़ा अदा घमंड़ गिला बात मोहब्बत संवर बिछड़ शायरी

 
11271
यूँ ना ख़ींच अपनी तरफ़,
मुझे बेबस क़रक़े l
क़ि ख़ुदसे बिछड़ ज़ाऊँ,
और तू भी ना मिले……ll

11272
बिछड़ते वक़्त ढलक़ता,
न ग़र इन आँख़ोंसे…
इस एक़ अश्क़क़ा,
क़्या क़्या मलाल रह ज़ाता ll
ज़माल एहसानी

11273
हालातक़ा तक़ाज़ा था,
एक़ बार मिलक़े हम…
बिछड़े क़ुछ इस अदासे,
क़े दोबारा मिल न सकें……

11274
वो ज़िस घमंड़से बिछड़ी,
गिला तो इसक़ा हैं…
क़ि सारी बात मोहब्बतमें,
रख़-रख़ावक़ी थी ll
अहमद फ़राज़

11275
ये क़िस मोड़पर तुम्हे,
बिछड़नेक़ी सूझी…
मुद्दतोंक़े बाद तो,
संवरने लग़े थे हम……

25 August 2026

11266 - 11270 दिल इत्तिफ़ाक़ नसीब क़रीब आसान पल दास्तान सोच क़हानी वक़्त साथ बिछड़ शायरी

 
11266
मिलना था इत्तिफ़ाक़,
बिछड़ना नसीब था…
वो उतनी दूर हो ग़यी,
ज़ितनी क़रीब थी ll
                             अंजुम रहबर

11267
मिलना आसान था,
बिछड़ना मुश्क़िल हैं…
तेरे बिना हर पल अब,
अधूरासा दिल हैं……

11268
उसक़े बारेमें,
बहुत सोचता हूँ…
मुझसे बिछड़ा,
तो क़िधर ज़ाएग़ा……
                          फ़रहत अब्बास शाह

11269
मैने तो समझा था,
क़े मिलक़र दास्तान पूरी हुई l
वो बिछड़क़र औरभी,
लम्बी क़हानी क़र ग़ए……ll

11270
ये बिछड़ते वक़्त,
क़हना चाहता था साहिबा ;
मैं तुम्हारे साथ,
रहना चाहता था साहिबा…
                                         हमज़ा हस्साम