4 June 2018

2826 - 2830 दिल मोहब्बत तराज़ू दिल्लगी अदा नजर वादा खबर पलक ख्बाब चाहत शायरी


2826
रोज इक ताजा शेर,
कहाँसे लिखू तेरे लिए,
तुझमें तो हर रोज ही,
इक नई अदा दिखती हैं !

2827
दिल जीत ले वो जिगर हम भी रखते हैं,
कत्ल कर दे वो नजर हम भी रखते हैं,
वादा किया हैं किसीको हमेशा मुस्कुरानेका,
वरना इन आँखोंमें समंदर हम भी रखते हैं...
2828
मैंने तो बाहोंमें लिया था,
एक लम्हेक़े लिए...
क्या खबर थी की,
रग रगमें समा जाओगे यूँ...!

2829
ऐ पलक, तू बंद हो जा...
ख्बाबोंमें उसकी सूरत तो नजर आयेगी;
इंतज़ार तो सुबह दोबारा शुरू होगा,
कमसे कम रात तो खुशीसे कट जायेगी...!!!

2830
मत तोल मोहब्बत मेरी,
अपनी दिल्लगीसे,
चाहत देखकर मेरी अक्सर,
तराज़ू टूट जाते हैं.......!

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