3366
उम्मीदोंका दामन थाम
रहे हो,
तो
"हौसला" कायम रखना...
क्योकि...
जब नाकामियाँ "चरम" पर हों,
तो "कामयाबी" बेहद करीब
होती हैं...!
3367
न ज़ी भरक़े देख़ा न क़ुछ बात क़ी,
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात क़ी।
बहूत सालसे क़ुछ ख़बर हीं न थी,
क़हाँ दिन ग़ुज़रा क़हा रात क़ी।
3368
बढ़ने दिये नहीं क़भी,
दुनियाँक़े हौसले…
ज़ब क़भी चोट ख़ाये हैं,
हम मुस्कराये हैं।
3369
तारीख हजार सालमें,
बस इतनीसी
बदली हैं...
तब दौर पत्थरका था,
अब लोग पत्थरके हैं...!
3370
कैसे कह दूँ
कि,
थक गया
हूँ मैं;
न जाने किस-किसका,
हौसला हूँ मैं.......!
No comments:
Post a Comment