3371
ऐ दर्द...
कुछ तो
कम कर,
मैं तेरा...
रोजका ग्राहक
हूँ.......
3372
मत रख बहते
पानीमें,
अपने पाँव ए
सनम...
के सारा दरीया,
शराब हो जायेगा.......!
3373
मेरी मंज़िल मेरी हद ।
बस तुमसे तुम तक़ ।।
ये फ़क़्र हैं क़ि तुम मेरे हो ।
पर फ़िक़्र हैं क़ि क़ब तक़ ।।
3374
अगर देखनी हैं क़यामत
तो,
चले आओ हमारी
महफ़िलमें...
सुना हैं आज
महफ़िलमें,
वो
बेनक़ाब आनेवाली हैं.......!
3375
ठुकराया
हमने भी,
बहुतोंको हैं... तेरी खातिर,
तुझसे फासला भी शायद...
उनकी बददुआओंका असर
हैं...
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