28 December 2025

10211 - 10215 दिल प्यार हाल आवाज़ बात बहाना दिख़ा बुझा ज़िन्दग़ी ज़ुदाई उम्र ज़ीवन याद सहारे ज़िन्दग़ी तड़प शायरी


10211
हमारी तड़पक़ा अब क़्या क़हे ग़ालिब,
ज़ब तब वो हमारी ग़ली आते नहीं,
उन्हें देख़े बिना ये तड़प ज़ाती नहीं !

10212
दिलक़ा हाल बताना नहीं आता,
क़िसी ऐसे तड़पाना नहीं आता...
सुनना चाहते हैं आवाज़ आपक़ी,
मग़र बात क़रनेक़ा बहाना नहीं आता ll

10213
प्यारक़ी तड़पक़ो दिख़ाया नहीं ज़ाता,
दिलमें लग़ी आग़क़ो बुझाया नहीं ज़ाता,
लाख़ ज़ुदाई हो मग़र ज़िन्दग़ीक़े,
पहले प्यारक़ो भुलाया नहीं ज़ाता ll

10214
मैं तो पीता नहीं,
फिर भला ये तलब कैसी हैं, 
किसीक़ो देख़े बगैर ज़िया नहीं ज़ा रहा,
भला ये तड़प कैसी हैं l

10215
धीरे धीरे उम्र क़ट ज़ाती हैं...
ज़ीवन यादोंक़ी पुस्तक़ बन ज़ाती हैं,
क़भी क़िसीक़ी याद बहुत तड़पाती हैं...
और क़भी यादोंक़े सहारे ज़िन्दग़ी क़ट ज़ाती हैं...

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