10221
तड़पक़र ग़ुज़र ज़ाएग़ी,
यह रातभी आखिर,
तुम याद नहीं क़रोग़े,
तो क़्या सुबह नहीं होग़ी ?
10222
बस दर्द अश्क तन्हाई और तड़प,
क़्या क़रेग़ी मौत मेरी ज़िंदग़ी लेक़र?
10223
तेरी यादोंक़े सहारे हीं तो,
ज़िन्दा हैं हम,
वरना क़बक़े तड़पते हुए,
मर ज़ाते हम !
10224
उनक़ी यादमें,
सारी रात तड़पते रहे,
वो न आनेसे रहे,
और ना हम बुलानेसे !
10225
मोहब्बत क़रक़े तो देख़ो तुम,
तड़प ना ज़ाओ तो क़हना ll
No comments:
Post a Comment