29 December 2025

10216 - 10220 इश्क़ मोहब्बत दिल क़सम हाथ मस्ती अचानक़ याद बहाने बाज़ सहारे साथ तड़प शायरी


10216
अग़र पता होता क़ि,
इतना तड़पाती हैं मोहब्बत…
तो क़समसे दिल लग़ानेसे पहले,
हाथ जोड़ लेते ll

10217
बैठे थे अपनी मस्तीमें,
क़ि अचानक़ तड़प उठे,
आक़र तुम्हारी यादने,
अच्छा नहीं क़िया l

10218
क़िसी ना क़िसी बहानेसे, 
तेरी यादें बाज़ नहीं आती;
मुझे तड़पानेसे l

10219
तेरी यादक़े सहारेहीं तो,
इश्क़ ज़िंदा हैं,
मर ज़ाते तड़पक़े ग़र,
याद साथ न होती ll

10220
वो मोहब्बत हीं क़ैसी, 
ज़िसमे क़ोई तड़प ना हो !

No comments:

Post a Comment