2 February 2026

10371 - 10375 दिल दुनियाँ ज़िंदग़ी अक़ेले मुक़द्दर मौत इंक़ार क़ुबूल आँख़ इंतज़ार शायरी


10371
क़िस्मतने तुमसे दूर क़र दिया,
अक़ेलेपनने दिलक़ो मज़बूर क़र दिया l
हम भी ज़िंदग़ीसे मुंह मोड़ लेते मग़र,
तुम्हारे इंतज़ारने ज़ीनेपर मज़बूर क़र दिया ll

10372
आया था तुमसे मिलने तुम नहीं मिले...
ज़िंदग़ीमें क़ई तुम ज़ैसे मिले l
पर इंतज़ार तो सिर्फ़ तुम्हारा हैं...
ख़ुदासे आरजू हैं हमे तो सिर्फ़ तुम मिले ll

10373
दिलमें ज़ो आया वो लिख़ दिया,
क़भी मिलना क़भी बिछड़ना लिख़ दिया ;
तेरी ज़ुदाई ही हैं अब मुक़द्दर मेरा,
हमने ज़िन्दग़ीक़ा नाम इंतज़ार लिख़ दिया...!

10374
तेरे इंतज़ारक़े मारे हैं हम,
सिर्फ़ तेरी ही यादोंक़े सहारे हैं हम,
तुझे चाहा था ज़ितना इस दुनियाँसे,
और आज़ तेरे ही हाथों हारे हैं हम ll

10375
वो होते अग़र मौत, तो मौतसे भी न इंक़ार होता,
मर भी ज़ाते अग़र मिला उनक़ा प्यार होता ;
क़ुबूल क़र लेते हर सज़ा...
अग़र उनक़ी आँख़ोंमें हमारा इंतज़ार होता......!