26 March 2018

2531 - 2535 बिछड़ चेहरे तलाशख्याल इंतज़ार धड़कन दर्द खामोश तकदीर जनाजा तमन्ना फुर्सत वक़्त शायरी



2531
तुझसे अग़र बिछड़ भी ग़याँ मैं, तो याद रख़,
चेहरेपें तेरे अपनी नज़र छोड़ ज़ाऊँग़ा...
बस एक़ वक़्तक़ा ख़ंज़र मिरी तलाश में हैं,
ज़ो रोज़ भेस बदलक़र मिरी तलाशमें हैं...ll


2532
चुभता तो बहुत कुछ मुझको भी हैं,
तीरकी तरह.......
मगर खामोश रहता हूँ,
अपनी तकदीरकी तरह.......

2533
मेरी धड़कनोंको छूकर,
और परेशां ना करो,
ये थमसी जाती हैं...
तेरा ख्यालभर आ जानेसे . . .


2534
इन आँखोंमें तेरे इंतज़ारके सिवा,
कुछ बाकी नहीं...
जान बाकी हैं मगर,
जीनेकी तमन्ना बाकी नहीं...

2535
कहो तो,
थोड़ा वक़्त भेज दूँ...
सुना हैं तुम्हें...
फुर्सत नहीं मुझसे मिलनेकी !

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