2576
ख़ामोशीमें मुसीबत,
और भी संग़ीन होती हैं l
तड़प ऐ दिल तड़पनेसे,
ज़रा तस्कीन होती हैं ll
शाद अज़ीमाबादी
2577
तुझसे गुज़रकर
मुझतक,
जो एक हसीं
लम्हा आया हैं...
उदास पड़ी थी
रूह मेरी,
इसने उसको महकाया
हैं !!!
2578
कितने चेहरे हैं इस
दुनियाँमें;
मगर हमको एक
चेहरा ही नज़र
आता हैं;
दुनियाँको हम
क्या देखें;
उसकी यादोंमें सारा
वक़्त गुजर जाता
हैं...
2579
कसूर ना उनका
था ना हमारा;
हम दोनों ही रिश्तोंकी रसम निभाते
रहे;
वो दोस्तीका एहसास
जताते रहे;
और हम मोहब्बतको दिलमें
छुपाते रहे।
2580
तेरी पाकीज़ा निगाहोंमें,
फितूर आ जाएगा...
आईना मत देख,
तुझमें भी
ग़ुरूर आ जाएगा !
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