5191
लम्हे फुर्सतक़े आएं तो,
रंज़िशें भुला देना दोस्तों...
क़िसीक़ो नहीं ख़बर क़ि,
साँसोंक़ी मोहलत क़हाँ तक़ हैं ॥
5192
दवाईयाँ
वक़्तपर,
मिलती
नही;
और रिश्ते वक़्त-वक़्त
पर,
चोट देते
रहते हैं.......
5193
कभी मिल जाए
कहीं वो कारीगर,
तो मिलाना ज़रूर...
जिसने घड़ी बनायी
उसे,
वक़्त रोकना
भी आता होगा.......
5194
कुछ रिश्तें...
सिर्फ़ एक ही
चीज़ माँगते हैं,
और वो हैं "वक़्त"...!!!
5195
किसीने क्या
खूब लिखा हैं...
वक़्त निकालकर,
बाते कर लिया
करो अपनोंसे;
अगर अपने ही
न रहेंगे,
तो वक़्तका क्या
करोगे.......?
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