8351
मुझे क़ोई पढ़ता,
तो क़्या पढ़ता...
मेरे रूहसे लेक़र चेहरेपें तो,
सिर्फ़ तुम लिख़ें हो.......!!!
8352ज़िस्मसे रूहतक़ ज़ाए,तो हक़ीक़त हैं इश्क़...और रूहसे रूहतक़ ज़ाए,तो इबादत हैं इश्क़.......!
8353
अधूरेसे रहते हैं,
मेरे लफ्ज़ तेरे ज़िक़्रक़े बिना,
ज़ैसे मेरी हर शायरीक़ी,
रूह तुमही हो.......!!!
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी
8354
ना चाहतोंक़ा,ना हीं ये दौलतोंक़ा रिश्ता हैं...ये तेरा मेरा,तो बस रूहक़ा रिश्ता हैं.......!
8355
मैं मुनक़्क़श हूँ,
तिरी रूहक़ी दीवारोंपर...
तू मिटा सक़ता नहीं,
भूलनेवाले मुझक़ो ll
मोहसिन एहसान
No comments:
Post a Comment